सबकी खबर , पैनी नज़र

October 10, 2026 9:47 pm

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शूलिनी विवि  के 25 शोधकर्ताओं को दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों की सूची में मिली जगह

सात शोधकर्ताओं को करियर-भर अनुसंधान प्रभाव में  भी मिली पहचान

सोलन, 9 अक्टूबर 2026, शूलिनी यूनिवर्सिटी के 25 शोधकर्ताओं को दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों की 2026 की सूची में शामिल किया गया है। इनमें से सात शोधकर्ताओं को  करियर-भर अनुसंधान प्रभाव में भी पहचान मिली यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में हो रहे शोध कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है।
यह सूची स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन पी. ए. इओनिडिस के नेतृत्व में तैयार किए गए डेटाबेस पर आधारित है। इसे एल्सेवियर (Elsevier) के स्कोपस (Scopus) डेटा की मदद से तैयार किया जाता है। इसमें दुनिया भर के वैज्ञानिकों के शोध कार्यों और उनके शोध को दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए संदर्भों (साइटेशन) के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।

7 अक्टूबर, 2026 को जारी इस सूची का आधार 1 अगस्त, 2026 तक का स्कोपस डेटा है। इसमें दो तरह से शोधकर्ताओं के योगदान को देखा जाता है। पहलीश्रेणी में वर्ष 2025 के दौरान उनके शोध को मिले संदर्भों के आधार पर प्रभाव का आकलन किया जाता है। दूसरी श्रेणी में उनके पूरे करियर के दौरान शोध को मिले संदर्भों को देखा जाता है, जिसके आंकड़े वर्ष 2025 के अंत तक के हैं।
शूलिनी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को 12 वैज्ञानिक विषयों में उनके काम के लिए यह पहचान मिली है। इनमें पर्यावरण विज्ञान, नैनोटेक्नोलॉजी, केमिकल इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी और फार्माकोलॉजी सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। यह उपलब्धि अलग-अलग विषयों में विश्वविद्यालय के शोध कार्यों की व्यापकता को दर्शाती है।
शूलिनी यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. पी. के. खोसला ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के उस सपने को आगे बढ़ाने का प्रमाण है, जिसके साथ इसकी शुरुआत हुई थी।  यह पूरे शूलिनी परिवार और मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से गर्व का क्षण है। जब हमने शूलिनी की शुरुआत की थी, तब हमारा एक बड़ा सपना था ऐसा विश्वविद्यालय बनाना, जहां युवा ज्ञान से प्रेरित हों, उनमें जिज्ञासा हो, वे सही सवाल पूछें और अपने काम से दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालें। हमारे 25 शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना इस बात का प्रमाण है कि हम लगातार उस सपने की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब शूलिनीयूनिवर्सिटी अलग-अलग विषयों में शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक प्रयोगशालाओं और शोध परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता के माध्यम से अपने शोध कार्यों को मजबूत कर रही है। विश्वविद्यालय के शोधकर्ता बुनियादी विज्ञान से लेकर नई तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग तक कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन शोधों का उद्देश्य समाज की समस्याओं के समाधान में योगदान देना और उद्योगों के लिए उपयोगी नई जानकारियां विकसित करना है।
शूलिनी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछली बार जब हमारे शोधकर्ताओं को दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में जगह मिली थी, तब मैंने एक बड़े सपने की बात की थी कि अगले दस वर्षों में शूलिनी को एक नोबेल पुरस्कार विजेता तैयार करने का प्रयास करना चाहिए। मेरा आज भी मानना है कि विश्वविद्यालयों को विज्ञान और समाज में अपने योगदान को लेकर बड़े सपने देखने चाहिए।
“दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों की नवीनतम सूची में शूलिनी के 25 शोधकर्ताओं को जगह मिलना इस विश्वास को और मजबूत करता है। मुझे सबसे ज्यादा गर्व केवल इस संख्या पर नहीं,बल्कि विश्वविद्यालय में हो रहे शोध की विविधता और गहराई पर है। उन्होंने कहा। 
प्रो. अतुल खोसला ने कहा नोबेल पुरस्कार का सपना अभी भी बड़ा है और हमें इसके लिए लंबा सफर तय करना है। लेकिन आज हमारे 25 शोधकर्ताओं की उपलब्धि बताती है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य यहीं रुकना नहीं, बल्कि शोध के क्षेत्र में और बेहतर प्रदर्शन करना है।  यह उपलब्धि शूलिनी यूनिवर्सिटी के बढ़ते शोध कार्यों और विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में उसके शोधकर्ताओं के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाती है।