सबकी खबर , पैनी नज़र

LIVE TV

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

March 12, 2026 6:41 pm

दाऊद आने वाला है …जो लाने वाला है, उनके बारे में जानिए, ओर कैसे आएगा, वह भी जाने ।।

अजीत डोभाल – NSA.
(Real James Bond of India)

अजीत डोवाल, संभवतः इनके पूरे जीवन का एक ही मकसद रहा था, दुनिया के सबसे बड़े गैंगस्टर डॉन में ए एक दाऊद इब्राहिम को पकड़ना । ओर मोदी सरकार ने 2014 चुनावो से पहले ही दाऊद को पकड़ने का एलान किया था । अजीत डोवाल जी के लिए या भारत सरकार के लिए दाऊद उतनी बड़ी तोप नही है, लेकिन दाऊद के मुंह से जनता के समक्ष कहलवाया जा सकता है, की देश के गद्दार कौन कौन है ? और उसी की पहली कड़ी महाराष्ट्र कांड है …
अजीत डोवाल जी कौन है, इनके केरियर की शुरुवात कैसे हुई, वह जानिए, किसी फिल्मी स्टोरी से कम नही है ।।

क्या है केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और अजित डोवाल का रिश्ता, जानिए…

यह वास्तविक घटना 49 साल पहले घटित हुई थी। जब केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री कॉमरेड पिनाराई विजयन ने कपड़ो में पॉटी और सुस्सू कर दी थी। दिसंबर 1971 में केरल के थलसरी जिले में भयंकर साम्प्रदायिक दंगे हुए थे। दंगों के डर से शहर के लोग सड़कों पर नहीं निकल पा रहे थे। अधिकांश लोग अपने घरों में ताला लगा कर अपने रिश्तेदारों के घर चले गए थे। ऐसी हालात में #विजयन_कोरान नाम का 26 वर्षीय कट्टर कम्युनिस्ट गुंडा कई मुस्टन्डों को दो जीपों में इलाके में घूमते हुए लोगों को दंगों के लिए उकसा रहा है। इसी क्रम में 04 जनवरी, 1972 को थालास्सेरी में इस गिरोह के हाथों #कुंजीरामन नामक एक निर्दोष हिन्दू की हत्या हो गई थी। उससे ठीक दो दिन पहले, थालास्सेरी क्षेत्र में एक 25 वर्षीय युवा आईपीएस अधिकारी ने एएसपी के रूप में पदभार संभाला था।

हत्या की जानकारी मिलने पर, वह मौके पर पहुंचा और हत्यारों की धर पकड़ में लग गया। जब उसे मुखबिरों से पता चला कि विजयन कुरान गिरोह एक फार्म हाउस में ड्रग्स पार्टी कर रहा है तो उस युवा IPS ने तुरंत अपनी पुलिस ब्रिगेड के साथ वहाँ दबिश दी। गिरोह का सरगना विजय कुरान को एक कान्स्टेबल पकने गया तो कुरान ने उसे धमका दिया। स्थानीय कान्स्टेबल जो विजय कुरान की गुंडागर्दी को जानता था, डर कर पीछे हट गया। यह सब देखकर युवा आईपीएस अधिकारी खुद मैदान में उतर गया। वह उसके पीछे भागा और उसके पिछवाडे जोर से लात मारी।विजयन कुरान औंधे मुँह जमीन पर गिर गया और उसका चेहरा घायल हो गया। चेहरे और हाथों से खून बह रहा था और उसकी सफेद लुंगी खुल कर नीचे गिर गई। उसे थल्सेरी बाज़ार के बीच एक खुले जीप में थाने ले जाया गया जिसे थलासेरी के सभी लोग देख रहे थे। युवा आईपीएस अधिकारी ने इस दौरान के दौरान एक शब्द नहीं कहा।

उसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया और सेल में डाल दिया गया।
एक कांस्टेबल ने सेल में जाकर उसके हथकडियोँ को खोल दिया और कहा, “मुझे विश्वास नहीं है कि आप कल का सूर्योदय देखेंगे।” इस बीच उस युवा आईपीएस अधिकारी ने सेल में प्रवेश किया। उसने एक हाथ से गुंडे की गर्दन पकड़ ली और उसे दीवार में लगे एक खूँटे पर टांगकर भरपूर सेवा की। वह कम्युनिस्ट गैन्गस्टर मार खाकर पानी मांगने लगा । उस अधिकारी की अनुमति से कांस्टेबल ने एक गिलास पानी लाकर उसे पिलाया ।

अब IPS अधिकारी ने उसके झुके सर को ऊपर उठाते हुए कहा “Vijayan Koran ….look at me.” लेकिन उस उपद्रवी कॉमरेड को मलयालम के अलावा कुछ नहीं आता था और उस IPS को अभी तक मलयालम ठीक से आयी नहीं थी। तब गुंडे के रोनेधोने को नजरअंदाज करते हुए वह IPS एक रिवाल्वर लाया और गुंडे के माथे पर लगा दिया, इतने में ही गुंडे का पेशाब निकल गया और सारी हेकडी गायब हो गई। और तब वह युवा आईपीएस टूटे फूटे मलयालम में कहा : “इस थालास्सेरी क्षेत्र में कहीं भी कोई हिंसा या झड़प नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो पिस्तौल की गोली सीधे तुम्हारी खोपड़ी में चली जाती है। बात समझ में आई की नहीं .. ?? “

“एस सर ..” उस कॉमरेड गुंडा ने रोते हुए कहा। अधिकारी ने बाहर जाते हुए गुण्डे को अपने पैरों और नीचे फर्श पर फैले मूत्र को साफ करने का आदेश दिया जिसे उस गुण्डे ने बखूबी किया। उसके बाद छह महीने तक थालास्सेरी में कोई झड़प नहीं हुई।जब वहां सब कुछ शांत हो गया, तो युवा IPS अधिकारी को मुख्यमंत्री #अच्युतामीनन ने सराहा और दूसरे अशांत क्षेत्र में भेज दिया।

आप जानना चाहेंगे कि वह गुंडा और वह युवा IPS अधिकारी कौन थे। वह युवा IPS अधिकारी तो हमारे भारतीय जेम्स बॉन्ड #अजीतडोभाल थे । लेकिन वह कम्युनिस्ट गुंडा विजयन कुरान कौन था? वह गुंडा था केरल का वर्तमान मुख्यमंत्री #पिनियारिविजयन। घटना के बाद अपमान की आग में जलते हुए विजयन कुरान ने अपना नाम बदलकर #पिन्नाराईविजयन कर लिया। फ़िर कम्युनिस्ट पार्टी मे उसका विकास होता गया और वह केरल का मुख्यमंत्री बन गया।

और भाग्य का चक्र देखिए। 50 वर्षों बाद सोना तस्करी कांड में इसी पिनियारि विजयन का नाम प्रमुखता से आ रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से इस केस की गम्भीरता को देखते हुए NSA अजीत डोवल को भी इस जाँच में शामिल किया गया है।
एक ऐसा भारतीय जो खुलेआम पाकिस्तान को एक और मुंबई के बदले बलूचिस्तान छीन लेने की चेतावनी देने से गुरेज़ नहीं करता, एक ऐसा जासूस जो पाकिस्तान के लाहौर में 7 साल मुसलमान बनकर अपने देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा हो।
वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यहां हम बात कर रहे हैं केरल कैडर के 1968 बैच के आईपीएस अजीत डाभोल की जो 1972 में भारतीय खुफिया एजेंसी आईबी से जुड़े। मूलत: उत्‍तराखंड के पौडी गढ़वाल के ब्राह्मण परिवार से आने वाले अजीत डोभाल ने अजमेर मिलिट्री स्‍कूल से पढ़ाई की है और आगरा विवि से अर्थशास्‍त्र में एमएम किया है।

डोभाल से क्यों डरता है पाकिस्तान..?

डाभोल कई ऐसे खतरनाक कारनामों को अंजाम दे चुके हैं जिन्हें सुनकर जेम्स बांड के किस्से भी फीके लगते हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन अजीत कुमार डाभोल से बड़े-बड़े मंत्री भी सहमे रहते हैं।

भारतीय सेना द्वारा म्यनमार में सीमापार सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए डाभोल ने भारत के शत्रुओं को सीधा और साफ संदेश दे दिया है कि अब भारत आक्रामक-रक्षात्मक रवैया अख्तियार कर चुका है।

आइए जानते हैं अजीत डोभाल के कुछ रोमांचक किस्सों के बारे में :

  1. भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका। इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, उन दिनों वो अमृतसर में रिक्शा चलाते थे और पाकिस्तानियों को विश्वास में ले लेते थे , जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी।
  2. जब 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था तब उन्हें भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था। बाद में, इस फ्लाइट को कंधार ले जाया गया था और यात्रियों को बंधक बना लिया गया था।
  3. कश्मीर में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया था और उग्रवादी संगठनों में घुसपैठ कर ली थी।

उन्होंने उग्रवादियों को ही शांतिरक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था। उन्होंने एक प्रमुख भारत-विरोधी उग्रवादी कूका पारे को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था।
अगले पन्ने पर, उत्तर-पूर्व राज्यों में करवाया संघर्षविराम

  1. अस्सी के दशक में वे उत्तर पूर्व में भी सक्रिय रहे। उस समय ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसा और अशांति फैला रखी थी, लेकिन तब डोवाल ने ललडेंगा के सात में छह कमांडरों का विश्वास जीत लिया था और इसका नतीजा यह हुआ था कि ललडेंगा को मजबूरी में भारत सरकार के साथ शांतिविराम का विकल्प अपना पड़ा था।
  2. डोभाल ने वर्ष 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाई थी।
  3. डाभोल ने पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और भारतीय सेना ने सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया। भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों सहयोग से ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए हैं।
  4. डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का लीड किया।

👉 पाकिस्तान को अंदर घुस कर मारने वाली सर्जिकल स्ट्राइक हो या फिर धारा 370 तोड़ने के बाद स्वयं कश्मीर में जाकर हालात को नियंत्रण करना हो आज भी पंडित अजीत डोभाल जी देश की सेवा पूरी लगन से कर रहे हैं और दुश्मन उनके नाम से आज भी थरथर कांपते हैं।।


वर्तमान में परमवीर के माध्यम से शवसेना , कांग्रेस और पंवार ने देशमुख को बलि का बकरा बनाने की सोची है, जिससे यह सभी लोग बच जाए । देशमुख के मर जाने से इनके धंधे पर फर्क नही पड़ने वाला । लेकिन यह सभी अगर अन्दर हो गए, या शक्तिहीन तो धंधा ठप्प पड़ जायेगा ।
पाकिस्तान में दाऊद अपने पैसों के दम पड़ सिक्योरिटी लेता है, अगर उसकी सम्पति जप्त हो गयी, तो पाकिस्तान उसपर एक फूटी कौड़ी खर्च करने वाला नही है । पाकिस्तान दाऊद को मार देगा, या बड़ी दौलत की लेन देन में दाऊद को सौंपने की तैयारी हो जाएगी ।।
साभार 👌✍️✍️
@highlight