शिमला, 23 सितंबर 2026:
हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता एवं संस्थागत गरिमा के समर्थन में HPUTWA द्वारा 25 सितंबर को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) परिसर में काले रिबन लगाकर शांतिपूर्ण मार्च किया जाएगा।
“स्वायत्तता की आवाज़, काले रिबन के साथ — 25 सितंबर को HPU परिसर में मार्च।”
हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा 2 सितंबर 2026 को हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया। विधेयक में राज्य के विश्वविद्यालयों की भर्ती व्यवस्था तथा वित्तीय प्रशासन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
सरकार की ओर से विधेयक का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, मेरिट और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना बताया गया है। वहीं, विश्वविद्यालय शिक्षक समुदाय की ओर से विश्वविद्यालयों की संस्थागत एवं अकादमिक स्वायत्तता तथा भर्ती एवं वित्तीय निर्णयों में अकादमिक विशेषज्ञता की भूमिका को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
यह विषय केवल सरकार और विश्वविद्यालय के बीच मतभेद का प्रश्न नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा में सरकारी जवाबदेही और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के बीच उचित संतुलन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता, शोध, शिक्षण, नवाचार तथा विषय-विशेषज्ञता आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुरक्षित रखना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालय परिवार से मार्च में शामिल होने का आह्वान
HPUTWA के अध्यक्ष नितिन व्यास, उपाध्यक्ष डॉ. योगराज, सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज तथा संयुक्त सचिव डॉ. अंजली शर्मा ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं समस्त विश्वविद्यालय परिवार से 25 सितंबर को आयोजित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है।
HPUTWA पदाधिकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा केवल शिक्षक समुदाय का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य और उच्च शिक्षा के भविष्य से है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से अपील की कि वे काले रिबन लगाकर 25 सितंबर को HPU परिसर में आयोजित मार्च में अपनी सहभागिता दर्ज करवाएं।
उन्होंने कहा कि काला रिबन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह मार्च किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की अकादमिक एवं संस्थागत स्वायत्तता के समर्थन में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ रखने का माध्यम है।
जवाबदेही के साथ स्वायत्तता भी जरूरी
HPUTWA का कहना है कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार आवश्यक हैं, लेकिन इन सुधारों के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विश्वविद्यालयों की अकादमिक एवं संस्थागत निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रभावित न हो।
शिक्षकों की नियुक्ति जैसी अकादमिक प्रक्रियाओं में विषय-विशेषज्ञता, शैक्षणिक योग्यता, शोध एवं शिक्षण अनुभव तथा विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इसलिए शिक्षक समुदाय का मानना है कि विश्वविद्यालयों से संबंधित किसी भी नई व्यवस्था में लागू राष्ट्रीय उच्च शिक्षा मानकों और विश्वविद्यालयों की वैधानिक एवं अकादमिक संरचना का समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए।
HPUTWA ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान, शोध, नवाचार, स्वतंत्र चिंतन और अकादमिक संवाद के केंद्र हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णयों पर व्यापक विमर्श और विश्वविद्यालय समुदाय की चिंताओं पर विचार किया जाना आवश्यक है।
25 सितंबर को काले रिबन के साथ शांतिपूर्ण मार्च
इन्हीं मुद्दों को लेकर 25 सितंबर को HPU परिसर में काले रिबन लगाकर शांतिपूर्ण मार्च आयोजित किया जाएगा। HPUTWA ने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से इस कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण सहभागिता दर्ज करवाने की अपील की है।
HPUTWA पदाधिकारियों ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा से जुड़े विषयों को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखना तथा इस विषय पर सार्थक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करना है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता केवल वर्तमान पीढ़ी का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक स्वतंत्रता से जुड़ा प्रश्न है।
“स्वायत्तता की आवाज़, काले रिबन के साथ — 25 सितंबर को HPU परिसर में मार्च।”






