सबकी खबर , पैनी नज़र

October 10, 2026 6:08 pm

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एम डब्लूयु बी कि मांग पर  नायब सिंह सैनी ने कल्याण कोष की सहायता 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की

चंद्र शेखर धरणी ने कैबिनेट के फैसले का किया स्वागत, बोले—पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए एमडब्ल्यूबी के प्रयास रंग लाए                                           

अब कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और 30 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग भी जल्द पूरी करे सरकार

चंडीगढ़। हरियाणा में पत्रकारों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सरकार ने हरियाणा मीडिया कर्मी कल्याण कोष वितरण योजना में संशोधन करते हुए पत्रकारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है। मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबी) लंबे समय से इस राशि में वृद्धि की मांग उठा रही थी। एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से किया अपना वादा निभाया है।
धरणी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। वे जनसमस्याओं को सामने लाने, सरकार और जनता के बीच संवाद कायम करने तथा समाज को जागरूक बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस दौरान उन्हें कई बार जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बीमारी, दुर्घटना अथवा अन्य संकट के समय पत्रकारों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे में कल्याण कोष की सहायता राशि दोगुनी होने से पात्र पत्रकारों को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि एमडब्ल्यूबी पत्रकारों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार सरकार के समक्ष उठाती रही है। संगठन का प्रयास है कि पत्रकारों को केवल काम के दौरान ही नहीं, बल्कि बीमारी, दुर्घटना, सेवानिवृत्ति और पारिवारिक संकट के समय भी पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा मिल सके। धरणी ने उम्मीद जताई कि सरकार अन्य लंबित मांगों पर भी इसी तरह सकारात्मक निर्णय लेगी।
एमडब्ल्यूबी की मांग पर एफआईआर होते ही मान्यता रद्द करने का नियम भी वापस
चंद्र शेखर धरणी ने बताया कि एमडब्ल्यूबी के प्रयासों के बाद प्रदेश सरकार पत्रकार पर एफआईआर दर्ज होते ही उसकी मान्यता रद्द करने से संबंधित नियम को पहले ही वापस ले चुकी है। अब मीडिया कर्मी कल्याण कोष के तहत सहायता राशि बढ़ाने के निर्णय को भी संगठन पत्रकार हितों से जुड़ी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें उन्हें कानूनी प्रक्रिया, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ता है। इसलिए पत्रकारों से संबंधित नीतियां बनाते समय उनकी कार्य परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पत्रकारों को 10 लाख का दुर्घटना बीमा, टर्म इंश्योरेंस और 33 लाख तक की चिकित्सा सुरक्षा
एमडब्ल्यूबी ने पत्रकारों और उनके परिवारों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए भी पहल की है। संगठन के अनुसार, पात्र पत्रकारों के लिए 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा और 10 लाख रुपये तक का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा संस्थापक सदस्यों के लिए 33 लाख रुपये तक के कैशलेस चिकित्सा बीमा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
संगठन का कहना है कि इन बीमा सुविधाओं के लिए पत्रकारों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। चिकित्सा बीमा योजना से करीब 150 लोगों को लाभ मिलने की बात भी एमडब्ल्यूबी ने कही है। इन सुविधाओं के लिए सदस्यता अवधि और संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी से जुड़े मानदंड निर्धारित किए गए हैं। संगठन के अनुसार, दुर्घटना बीमा के लिए एक वर्ष, टर्म इंश्योरेंस के लिए तीन वर्ष तथा उच्च राशि की कैशलेस चिकित्सा बीमा सुविधा के लिए पांच वर्ष की सदस्यता का प्रावधान है। इसके साथ ही निर्धारित कार्यक्रमों में कम से कम 50 प्रतिशत उपस्थिति का मानदंड भी रखा गया है।
धरणी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में हरियाणा और चंडीगढ़ के तीन दर्जन से अधिक पत्रकारों तथा उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों और आपात परिस्थितियों में 48 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में संगठन ने सहयोग किया है। इसमें कैंसर, किडनी प्रत्यारोपण, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से जुड़े मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संकट के समय पत्रकार परिवारों की मदद करना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
*कैशलेस स्वास्थ्य बीमा लागू करने की मांग*
एमडब्ल्यूबी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना को जल्द अधिसूचित किया जाए। संगठन ने राजस्थान मॉडल की तर्ज पर प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा देने का सुझाव रखा है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने के साथ बाह्य रोगी उपचार यानी ओपीडी को भी शामिल करने की मांग की गई है।
धरणी ने कहा कि कैंसर, किडनी प्रत्यारोपण और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी धनराशि खर्च होती है। यदि पत्रकारों को व्यापक स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता है तो बीमारी के समय उन्हें और उनके परिवारों को इलाज के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की चिंता से राहत मिल सकती है।
*सेवानिवृत्त पत्रकारों को 30 हजार रुपये मासिक पेंशन देने का आग्रह*
एमडब्ल्यूबी ने सेवानिवृत्त पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। संगठन की मांग है कि पात्र पत्रकारों को न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए। धरणी ने कहा कि पत्रकारिता में वर्षों तक सेवाएं देने वाले लोगों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
संगठन ने पेंशन के लिए पांच वर्ष की अनिवार्य मान्यता संबंधी शर्त समाप्त करने, न्यूनतम 15 वर्ष की सक्रिय पत्रकारिता सेवा पूरी करने वाले पत्रकारों को पात्रता देने और न्यूनतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित करने का सुझाव दिया है। इसके अतिरिक्त पेंशन प्राप्त कर रहे पत्रकार की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी अथवा पात्र आश्रितों को पारिवारिक पेंशन देने की मांग भी की गई है।
डिजिटल पत्रकारों की मान्यता से लेकर आवास और बच्चों की शिक्षा तक उठाए मुद्दे
धरणी ने कहा कि बदलते मीडिया परिदृश्य में डिजिटल पत्रकारिता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदेश की सोशल मीडिया नीति को सरल और समावेशी बनाया जाना चाहिए, ताकि ऑनलाइन माध्यमों से समाचार प्रकाशित करने वाले पात्र पत्रकार भी मान्यता और सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
एमडब्ल्यूबी ने हरियाणा परिवहन विभाग की विभिन्न श्रेणियों की बसों में पत्रकारों के लिए कम से कम दो सीटें आरक्षित करने तथा निजी बसों में भी निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने पर विचार करने का आग्रह किया है। संगठन का मानना है कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में समाचार संकलन करने वाले पत्रकारों को इससे विशेष मदद मिलेगी।
इसके साथ ही पंचकूला में एमडब्ल्यूबी के मुख्यालय के लिए रियायती दरों पर सरकारी भूखंड उपलब्ध कराने, पत्रकारों के लिए विशेष आवासीय योजनाएं शुरू करने और पत्रकारों के बच्चों को विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा सरकारी नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी उठाई गई है।
*वरिष्ठ पत्रकारों के सम्मान की भी पहल*
एमडब्ल्यूबी ने पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा के साथ उनके अनुभव और योगदान को सम्मान देने की पहल भी की है। धरणी के अनुसार, संगठन अपने कार्यक्रमों में 60 वर्ष से अधिक आयु के तीन वरिष्ठ पत्रकारों को मुख्य अतिथि के हाथों सम्मानित करता है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ पत्रकारों के लंबे अनुभव और पत्रकारिता में उनके योगदान को सम्मान देना है।
धरणी ने कहा कि पत्रकार कल्याण कोष की सहायता राशि बढ़ाने का निर्णय स्वागतयोग्य है, लेकिन पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए अभी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने बाकी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, डिजिटल पत्रकारों की मान्यता और आवास संबंधी मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि एमडब्ल्यूबी पत्रकारों के हितों की रक्षा, उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी।