???????? आज भारतीय नेशनल कैलेंडर के अनुसार दिनांक राष्ट्रीय सौर INC 13 भाद्रपद 1945
???????? आज पोप ग्रेगोरियन के अनुसार अंग्रेजी दिनांक 04 सितंबर 2023
???????? राष्ट्रीय दिनांक का प्रयोग हमें चैक,NEFT, बैंक cash counter पर, प्रवेश पत्र, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र,विद्यालय के प्रवेश पत्र ब निष्कासन पत्र पर
अंग्रेजी में लिखना हो तब INC 13 BHDR 1945 हिंदी में लिखना हो तब
राष्ट्रीय सौर 13 भाद्र 1945 इस प्रकार लिखना चाहिए।
???? मंदिर सूचना पट्ट, कथा, कीर्तन, विवाह शादी, गृह प्रवेश निमंत्रण पत्र आदि पर दिनांक इस प्रकार लिखें 13 भाद्रपद ( नभस्य) 1945 (5125)
???? सनातन धर्म में तुलसी वृक्ष का बहुत अधिक महत्व है अक्सर देखने में आता है कि अधिकतर सज्जन अपने घर में तुलसी का पौधा लगाते हैं ब सूख जाने पर कहीं पीपल के नीचे अथवा डस्टबिन में फेंक देते हैं एक दिन बह पैरों के नीचे ही आता है यह पाप है, तुलसी की लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े करके धूप में मिलाकर जलाया जा सकते हैं। घिसकर माथे पर लगाए , घर में हवन आदि के समय हवन में भी समिधा के रूप में प्रयोग करें। किसी की अंत्येष्टि संस्कार में जाते समय साथ ले जाएं ब चिता पर तुलसी लकड़ी दान करके मृत आत्मा के लिए पुण्य अर्जित करें ऐसा भागवत जी का कथन है
???? जो सज्जन प्रतिदिन व्यक्तिगत पूजा करते हैं बह संकल्प इस प्रकार पढ़ सकते हैं ओम विष्णु विष्णु विष्णु श्रीमद् भगवतो महत् पुरुषस्य विष्णो राजया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणो द्वितीये परार्धे श्री श्वेत वराह कल्पे सप्तमे वैवस्वत मन्वंतरे अष्टा विंशति तमे कलियुग संबत 5125 (वैदिक मासे नभस्य मासे) दिनांक भाद्रपद 13 सोम वासरे ……. नामक स्थाने ( अपना गोत्र ब नाम ),,,,,, पूजा अहम् करिष्यामी
???????? राष्ट्रीय शक् संवत् (सन्)1945
???? विक्रमी संवत् (सन्) 2080
???? महावीर जैन सम्वत् 2549
???? बौद्ध संवत् 2563
???? युगाब्द या कलियुग संवत् 5125
???? श्री कृष्ण संवत् (सन्) 5250
???? श्री राम संवत्(सन्) 880166
???? सृष्टि संवत् 1955885125
???? संवत्सर पिंगल
???? दक्षिणायन
???? ऋतु शरद
???? वेदों के अनुसार नभस्य मास है
???? ऋतुओं के अनुसार भाद्रपद मास यही भारतीय संवैधानिक राष्ट्रीय महीना है
???? चन्द्र के अनुसार महीना भाद्रपद पक्ष कृष्ण
???? तिथि पंचमी शाम 4: 41 तक तदुपरांत षष्ठी
???? वार सोम वार
???? नक्षत्र अश्विनी सुबह 9:26 तक तंदुपरान्त भरणी
???? दिनमान 31 घटी 20 पल (एक दिन रात 60 घटी अथवा 24 घंटे का होता है)
????सूर्य उदय 6:04 सूर्य अस्त 6:36
???? सिंह राशि में सूर्य संक्रान्ति से प्रविष्टे 19???? दिशाशूल पूर्व (यदि यात्रा आवश्यक हो तो दर्पण देख कर या दूध पी कर घर से निकलें) हमने किसी स्थान पर जाना है और वहां से उसी दिन वापस आना है तो दिशाशूल नहीं होता)
???? अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:54 to 12:45
(इस समय किये गये कार्य की रक्षा स्वयं भगवान विष्णु करते हैं)
???? राहुकाल 07:35 am से 09:10 am तक ( इस समय में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए ऐसा दक्षिण भारत में मान्यता है)
???? यह पंचांग दिल्ली के अक्षांश रेखांश पर आधारित है।???? चंदन षष्ठी व्रत 4 सितंबर सोमवार चंद्रोदय रात्रि 9:35 पर
???? श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत स्मार्तानाम( शिव दुर्गा शक्ति आदि के उपासक) रोहिणी व्रत 6 सितंबर बुधवार
???? श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत वैष्णवानाम,(जिनके गुरु कंठीधारी है अथवा रामकृष्ण विष्णु हनुमान आदि के उपासक)संत ज्ञानेश्वर जयंती, आद्य काली जयंती, अष्टमी व्रत 7 सितंबर गुरुवार
???????? चिंतनीय यह नहीं है कि जन्माष्टमी का उत्सव दो दिन सुना जा रहा है महत्व इस पर होना चाहिए कि हम धूमधाम से मनायें। प्राचीन भारत में शैव और वैष्णव संप्रदाय अलग-अलग विधि से अपने व्रत त्यौहार मनाते थे परंतु अब शैव और वैष्णव में कोई भेद नहीं रहा है इसलिए दोनों में से जो भी उपयुक्त दिन लगे उसे दिन हमें धूमधाम से श्री कृष्ण जन्माष्टमी माननी चाहिए
???? गोगा नवमी, नंद उत्सव नंदगांव, विश्व साक्षरता दिवस 8 सितंबर शुक्रवार
???? अजा एकादशी व्रत 10 सितंबर रविवार
???? गोवत्स पूजा, बछ बारस, पर्यूषण पर्वा आरंभ जैन, 11 सितंबर सोमवार
???? भौम प्रदोष व्रत, छठी पूजन 12 सितंबर मंगलवार???? गंडमूल 2 सितंबर दोपहर 12:30 से 4 सितंबर प्रातः 9:26 तक
???? पंचक
???? सर्वार्थ सिद्धि योग 5 सितंबर प्रातः 9:00 बजे से 7 सितंबर प्रातः 6:06 मिनट तक (इस मुहूर्त में किए गए सभी कार्य सिद्ध होते हैं)
???? सर्वार्थसिद्धि योग 3 सितंबर प्रातः 10:37 से 4 सितंबर प्रातः 6:04 तक
???? अमृत सिद्धि योग 17 सितंबर प्रातः 6:11 से प्रातः 10:00 बजे तक
???? द्विपुष्कर जोग 17 सितंबर प्रातः 10: 01 बजे से दोपहर 11:08 तक
???? त्रिपुष्कर योग 5 सितंबर शाम 3: 46 से 6 सितंबर प्रातः 6:05 तक
???? ज्वालामुखी योग 4 सितंबर प्रातः 9:26 से शाम 4:41 तक (इसमें कभी भी कोई कार्य सफल नहीं होता)








