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भारतीय दिनांक – ०१ माघ
???? अंग्रेजी दिनांक – २१
जनवरी २०२४
???? गतकलियुग- ५१२४
???? विक्रम संवत – २०८०
???? शक संवत – १९४५
???? सम्वत्सर – पिंगल
???? अयन – उत्तरायण
???? ऋतु – शिशिर
???? मास – पौष
???? पक्ष – शुक्ल
???? वार – रविवार
???? तिथि – एकादशी रात ०९:२८ बजे तक
???? नक्षत्र – रोहिणी देर रात ०५:३२ तक
???? योग – शुक्ल प्रातः ११:४२ तक
???? करण- प्रथम-वणिज, द्वितीय-विष्टि
???? सूर्योदय (म.स.)-०६:४७
???? सूर्यास्त (म.स.)-०५:३२
???? भद्रा – प्रातः ०९:४६ से रात ०९:२८ तक
???? मूल – नही
???? पंचक – नही
???? दिशाशूल – पश्चिम दिशा
???? राहुकाल- से तक
*व्रत पर्व विवरण–*
● एकादशी व्रत, तैलंग स्वामी जयंती,
???? *विशेष:-* एकादशी को चावल, साबूदाना और सिम्बी (सेम) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खण्ड २७.२९-३४)
● *एकादशी में क्या करें, क्या न करें –*
१. एकादशी को लकड़ी का दातुन का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।
२. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।
३.हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।
४.*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*
एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
५. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।
६. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।
७. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।
८. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।
९. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।
१०. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।
११. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।
१२. एकादशी के दिन किसी भी जीव की हत्या न हो इस बात का विशेष ध्यान रखें। घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।
१३. इस दिन बाल नहीं कटायें ।
१४. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।
१५. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए। (जागरण रात्र १ बजे तक)
१६. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।
इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।






