सबकी खबर , पैनी नज़र

June 19, 2026 3:52 am

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एसजेवीएन के बक्सर थर्मल पावर परियोजना की 660 मेगावाट, यूनिट -1 ने वाणिज्यिक प्रचालन सफलतापूर्वक हासिल किया

शिमला: 14.11.2025, श्री भूपेन्द्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन ने अवगत करवाया कि एसजेवीएन ने आज 1320 मेगावाट (2×660 मेगावाट) बक्सर ताप विद्युत परियोजना की यूनिट-1 (660 मेगावाट) की वाणिज्यिक प्रचालन तिथि (सीओडी) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है, जो राष्ट्र की विद्युत उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में कंपनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
श्री गुप्ता ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए समस्त कर्मचारियों को बधाई दी और कहा कि यह सफलता न केवल एसजेवीएन की तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाती है, अपितु कर्मचारियों, ठेकेदारों और सभी हितधारकों के समर्पण और समन्वित प्रयासों को भी दर्शाती है।श्री अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक) ने सभी संबंधित टीमों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की तथा इस बात पर बल दिया कि यह उपलब्धि एसजेवीएन के दक्ष निष्पादन एवं उच्च-गुणवत्तापूर्ण परियोजना वितरण के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एसजेवीएन की मज़बूत संगठनात्मक क्षमताओं एवं टीम वर्क का प्रमाण है।
श्री सिपन कुमार गर्ग, निदेशक (वित्त) ने कहा कि यूनिट-1 के कमीशन होने से एसजेवीएन का विद्युत उत्पादन पोर्टफोलियो और अधिक सुदृढ़ होगा तथा भारत के सतत ऊर्जा विकास में योगदान देने वाली विविधमुखी ऊर्जा कंपनी के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी।
बिहार के बक्सर जिले के चौसा में स्थित 1320 मेगावाट (2×660 मेगावाट) बक्सर ताप विद्युत परियोजना का निष्पादन एसजेवीएन की पूर्ण स्वामित्व वाली अधीनस्थ कंपनी एसजेवीएन थर्मल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिनांक 22 अगस्त 2025 को परियोजना की 660 मेगावाट की प्रथम यूनिट का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया। अत्याधुनिकसुपरक्रिटिकल तकनीक से सुसज्जित यह परियोजना उच्च दक्षता और कम पर्यावरणीय प्रभाव सुनिश्चित करती है। इस परियोजना से प्रतिवर्ष  9,828.72 मि.यू. विद्युत का उत्पादन होगा, जिसमें से 85% विदयुत दीर्घकालिक विद्युत क्रय करार के अंतर्गत बिहार को आबंटित की गई है। यह परियोजना बिहार तथा पूर्वी क्षेत्र में विद्युत की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी, व्यस्ततम समय में विद्युत की कमी को कम करेगी तथा ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी।