शिमला 01 सितम्बर 2023: हिमाचल प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों के किसान दशकों से अपनी निजी ज़मीन खेत मे पॉपुलर और सफेदा जैसे पेड़ों की खेती करते हैं जिस पर हाल में हिमाचल सरकार ने कटाई और Export पर पाबंदी लगा दी है। ऐसा अधिकारियों की समझ के अभाव में हुआ है जिनको जंगलात और खेती का फर्क़ तक नहीं पता। देवदार चीड़ शीशम बान जैसी प्रजाति के पेड़ जो प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं उनको निजी मिल्कियत से काटना सरकार की मर्जी के दायरे में आता था पर जिन प्रजाति के पेड़ किसान खुद लगाता और पालता है जिसका उपयोग प्लाई उद्योग में होता है उसको सरकारी नियंत्रण में रखना गलत है ऐसा पूरे देश में कहीं नहीं होता क्यूंकि यह कैश क्रॉप की परिभाषा में आता है। वैसे भी पूरे हिमाचल में पॉपुलर पर अधारित कोई उद्योग ही नहीं है इसलिए इसको पठानकोट होशियारपुर या यमुनानगर जैसी मंडियों में ले जाया जाता है। अगर सरकार इसका export रोकना चाहती है तो 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर इसकी सरकारी खरीद सुनिश्चित करे। हिमाचल सरकार जब मंडी मध्यस्थ योजना में सेब खरीद रही है और केंद्र सरकार गेहूं और धान खरीद रही है तो हिमाचल सरकार पॉपुलर सफेदा भी खरीदना शुरू करे वर्ना किसानों को कम से कम उनके हाल पर छोड़ दे।
और ऐसे तुगलकी फरमान जारी करने वाले अफसरों को सस्पेंड करे जिनको किसानों की समस्या का खुद पता नहीं है जिनके कारण किसानो का लाखो क्विंटल कटा माल खेतों में सड़ने को मजबूर है।भारतीय किसान यूनियन (Tikait) मुख्यमंत्री से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करती है वरना किसान भारतीय किसान यूनियन अपना अगला कदम उठाएगी और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय किसान नेता हिमाचल आयेंगे और हम माननीय हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर सकते हैं।








