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सिंघाड़ा Singhada: के हैं अद्भुत फायदे-
Contents
1 सिंघाड़ा का परिचय (Introduction of Shingada)
2 सिंघाड़ा क्या है ?(What is Shingada in Hindi?)
3 अन्य भाषाओं में सिंघाड़ा के नाम (Name of Shingade Fruit in Different Languages)
4 सिंघाड़े के फायदे (Singhara Fruit Benefits and Uses in Hindi)
4.1 दंतरोग में फायदेमंद सिंघाड़ा (Singhada Benefits for Tooth Diseases in Hindi)
4.2 तपेदिक के लक्षणों से दिलाये राहत सिंघाड़ा (Shingade Fruit to Fight Tuberculosis in Hindi)
4.3 गला सूखने या बार-बार प्यास की परेशानी को करे दूर सिंघाड़ा (Singhada Fruit Benefit to Get Relief from Dipsia in Hindi)
4.5 अतिसार या दस्त से दिलाये राहत सिंघाड़ा (Singada for Diarrhoea in Hindi)
4.7 पाइल्स या अर्श के दर्द और ब्लीडिंग को करे कम सिंघाड़ा (Singada benefits for Piles in hindi)
4.8 पैत्तिक मूत्रकृच्छ्र या पेशाब संबंधी समस्या में फायदेमंद सिंघाड़ा (Benefits of Singhara to Treat Dysuria in Hindi)
4.9 प्रमेह या डायबिटीज को नियंत्रण करने में लाभकारी सिंघाड़ा (Singhada Benefits to Control Diabetes in Hindi)
4.10 पोस्ट प्रेगनेंसी ब्लीडिंग को कम करने में फायदेमंद सिंघाड़ा (Singhara fruit benefits for Post pregnancy bleeding in hindi)
4.11 रक्तप्रदर की परेशानी को करे कम सिंघाड़ा (Singhara Benefits for Metrorrhagia in Hindi)
4.12 स्पर्म काउन्ट को बढ़ाने में लाभकारी सिंघाड़ा (Singhara Fruit Beneficial for Sperm Count in Hindi)
4.13 ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने में मदद करता है सिंघाड़ा (Singada Beneficial to Increase Breast Size in Hindi)
4.14 रक्तपित्त (कान-नाक से खून बहना) में फायदेमंद सिंघाड़ा (Singada Benefits for Haemoptysis ya Raktpitta in Hindi)
4.15 आग के जलने से जो घाव बनता है उससे दिलाये आराम (Benefit of Singhara Fruit to Get Relief from Burn in Hindi)
4.16 सेक्सुअल स्टैमिना को बढ़ाने में फायदेमंद सिंघाड़ा (Singhada Fruit Beneficial in Sexual Stamina in Hindi)
5 सिंघाड़े का उपयोगी भाग (Useful Parts of Singhara)
6 सिंघाड़ा का इस्तेमाल कैसे करें?(How to Use Singhara in Hindi?)
7 सिंघाड़ा कहां पाया या उगाया जाता है?(Where is Singhara Found or Grown in Hindi?)
सिंघाड़ा का परिचय
सिंगाड़ा (Singhada) एक ऐसा फल है जो त्रिकोण आकार का और दो सिंग वाला होता है। लेकिन इसके अनोखे आकार की तरह फायदे भी अनगिनत होते हैं। सिंगाड़ा (shingade fruit) मूल रुप से सर्दी के मौसम में पाया जाता है।
सिंघाड़ा क्या है ?
सिंघाड़ा (Shingade fruit) तालाब के पानी की सतह पर तैरने वाला जलीय शाकीय पौधा होता है। इसके काण्ड टेढ़े-मेढ़े, आरोही होते हैं। इसके पत्ते जलकुंभी के समान, किन्तु त्रिकोणाकार तथा स्पंजी होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के तथा जल की ऊपरी सतह पर खुले हुए होते हैं। इसके फल कठोर, त्रिकोणीय, चपटे तथा दो कोणों पर कंटकों से बने हुए होते हैं। इसके बीज संख्या में एक तथा सफेद रंग के होते हैं। इसकी जड़ हरे रंग की, जल में डूबी हुई होती है।
वैसे तो हर मौसम के फल के फायदे खास होते हैं। सिंघाड़ा जलिय पौधे का फल (Shingade fruit) होता है। सिंघाड़ा मधुर, ठंडे तासिर का, छोटा, रूखा, पित्त और वात को कम करने वाला, कफ को हरने वाला, रूची बढ़ाने वाला एवं वीर्य या सीमेन को गाढ़ा करने वाला होता है। यह रक्तपित्त तथा मोटापा कम करने में फायदेमंद होता है।
इसके बीज पोषक, दर्द को कम करनेवाला, ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने वाला, बुखार कम करने वाला, भूख बढ़ाने वाला तथा कमजोरी कम करने वाला होता है।
इसके फल अतिसार या दस्त में लाभप्रद होते हैं और फल का छिलका कमजोरी दूर करने और बुखार के लक्षणों से आराम दिलाने में मदद करता है।
अन्य भाषाओं में सिंघाड़ा के नाम
सिंघाड़ा (shingada) का वानास्पतिक नाम Trapa natans Linn. var-bispinosa (Roxb.) Makino (ट्रापा नटान्स किस्म-बाइस्पाइनोसा) Syn-Trapa bispinosaRoxb है। यह Onagraceae (ओनाग्रेसी) कुल का है। सिंघाड़ा को अंग्रेज़ी में Water caltrops (वॉटर केलट्रॉपस्) कहते हैं, लेकिन सिघाड़ा को अन्य भाषाओं भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है।
Shingade in-
Sanskrit-शृङ्गाटक, जलफल, त्रिकोणफल, पानीयफल;
Hindi-सिंघाड़ा, सिंहाड़ा;
Urdu-सिंघारा (Singhara);
Odia-पानीसिंगाड़ा (Panisingada);
Kannada-सगाड़े (Sagade); गुजराती-शीघ्रोड़ा (Shingoda);
Tamil-चिमकारा (Cimkhara), सिंगाराकोट्टाई (Singarakottai);
Telugu-कुब्यकम (Kubyakam);
Bengali-पानिफल (Paniphal), सिंगारा (Singara);
Panjabi-गॉनरी (Gaunri);
Marathi-सिंगाडा (Singada), सिघाड़े (Sigade), शेगाडा (Shegada);
Malayalam-करीमपोलम (Karimpolam)।
English-इण्डियन वॉटर चैस्टनट (Indian water chestnut), सिंगारा नट (Singara nut)।
सिंघाड़े के फायदे
सिंघाड़े (Shingade fruit) में इतने पोषक तत्व हैं कि आयुर्वेद में उसको बहुत तरह के बीमारियों के लिए औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। चलिये इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
दंतरोग में फायदेमंद सिंघाड़ा
अगर चलदंत से परेशान हैं तो सिंघाड़े का सेवन से तरह से करने पर राहत मिलता है। चलदंत की अवस्था में दाँत को उखाड़कर, उस स्थान का लगाने से, विदारीकंद, मुलेठी, सिंघाड़ा, कसेरू तथा दस गुना दूध से सिद्ध तेल लगाने से आराम मिलता है।
तपेदिक के लक्षणों से दिलाये राहत सिंघाड़ा
तपेदिक के कष्ट से परेशान हैं तो सिंघाड़ा का सेवन इस तरह से करने पर लाभ मिलता है। समान मात्रा में त्रिफला, पिप्पली, नागरमोथा, सिंघाड़ा, गुड़ तथा चीनी में मधु एवं घी मिलाकर सेवन करने से राजयक्ष्मा या टीबी जन्य खांसी, स्वर-भेद तथा दर्द से राहत मिलती है।
गला सूखने या बार-बार प्यास की परेशानी को करे दूर सिंघाड़ा
कभी-कभी किसी बीमारी के कारण प्यास लगने की समस्या होती है तो कशेरु, सिंघाड़ा, कमल, सेमल, कमल की जड़ तथा इक्षु से बने काढ़े (10-30 मिली) का सेवन करने से प्यास लगने की बीमारी से आराम मिलता है।
अतिसार या दस्त से दिलाये राहत सिंघाड़ा
अगर मसालेदार खाना खाने से दस्त की बीमारी हो गई है तो सिंघाड़ा का सेवन इस तरह से करें। इमली बीज को भिगोकर, छिलका निकालकर आधा भाग शृंगाटक चूर्ण तथा चौथाई भाग अपांप्म मिलाकर, पीस कर टिकिया बनाकर, लोहे के तवे पर सेंक कर चावल के धोवन का सेवन करने से अतिसार में लाभ मिलता है। इसके अलावा सिंघाड़ा का सेवन करने से अतिसार या दस्त की परेशानी कम होती है।
पाइल्स या अर्श के दर्द और ब्लीडिंग को करे कम सिंघाड़ा
कच्चे सिंघाड़े का सेवन करने से पाइल्स के कारण जो ब्लीडिंग होता है उसके दर्द और रक्तस्राव को कम करने में सहायता करता है।
पैत्तिक मूत्रकृच्छ्र या पेशाब संबंधी समस्या में फायदेमंद सिंघाड़ा
मूत्र संबंधी समस्या में मूत्र करते समय जलन और दर्द होना और धीरे-धीरे मूत्र होना जैसी समस्याएं आती हैं। सिंघाड़ा इस समस्या से राहत दिलाने में बहुत काम करता है। सिंघाड़े के हिम (15-30 मिली) में शहद तथा चीनी मिलाकर सुबह पीने से मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है।
प्रमेह या डायबिटीज को नियंत्रण करने में लाभकारी सिंघाड़ा
डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर को कंट्रोल करना सबसे ज्यादा ज़रूरी होता है। सिंघाड़ा का इस तरह से सेवन करने पर शुगर को कंट्रोल में करना आसान होता है। शृंगाटक आदि से बने अरिष्ट, अयस्कृति, लेह, आसव आदि तथा शृंगाटकादि वर्ग के कषायों से सिद्ध यवागू या सिंघाड़े का सेवन का सेवन करने से प्रमेह रोग में लाभ मिलता है।
पोस्ट प्रेगनेंसी ब्लीडिंग को कम करने में फायदेमंद सिंघाड़ा
कभी-कभी प्रेगनेंसी के बाद भी ब्लीडिंग होता है जिसके कारण नई नई बनी माँ के लिए बहुत ही कष्टदायक स्थिति हो जाती है। सिंघाड़ा का इस तरह से सेवन करने पर लाभ मिलता है।
पांचवे महीने में यदि गर्भिणी को गर्भस्राव की आंशका हो तो सिंघाड़ा कमलगट्टा तथा कशेरु का सेवन करना चाहिए। इससे गर्भस्राव नहीं होता है।
यदि सातवें माह में गर्भिणी को रक्तस्राव हो रहा हो तब सिंघाड़ा, कमलमूल, किशमिश, कशेरु तथा मुलेठी का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली काढ़े में मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
गर्भावस्था में होने वाले रक्तस्राव में भी सिंघाड़े का प्रयोग अन्य द्रव्यों के साथ किया जाता है। शारीरिक कमजोरी में यह औषधि बहुत ही लाभदायक होता है।
रक्तप्रदर की परेशानी को करे कम सिंघाड़ा
रक्तप्रदर की समस्या से निजात पाने के लिए सिंघाड़ा आटा का सेवन करना लाभदायक होता है। सिंघाड़े के आटे की रोटी बनाकर खाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
स्पर्म काउन्ट को बढ़ाने में लाभकारी सिंघाड़ा
अगर स्पर्म काउन्ट को बढ़ाना चाहते हैं तो सिंघाड़े के आटे के हलवा का सेवन करना लाभदायक होता है।
सिंघाड़े के आटे का हलुआ बनाकर खाने से शुक्राणु की वृद्धि होती है।
सिंघाडे के 5-10 ग्राम चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से शुक्राणु की वृद्धि होती है।
ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने में मदद करता है सिंघाड़ा
अगर ब्रेस्ट का साइज संतोषजनक नहीं है तो इसको बढ़ाने के लिए सिंघाड़े का सेवन करें। प्रसूता स्त्री द्वारा सिंघाड़ा का सेवन करने से स्तन की वृद्धि होती है।
रक्तपित्त (कान-नाक से खून बहना) में फायदेमंद सिंघाड़ा
रक्तपित्त में लाभकारी होता है सिंघाड़े का इस तरह से सेवन। समान मात्रा में सिंघाड़ा, धान का लावा, नागरमोथा, खर्जूर तथा कमल केशर के चूर्ण (2-4 ग्राम) को मधु के साथ सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
आग के जलने से जो घाव बनता है उससे दिलाये आराम
अक्सर घर में काम करते हुए हाथ जल जाता है तब सिंघाड़े का पेस्ट काम आता है। सिंघाड़े के पत्तों को पीसकर लेप करने से जलन कम होता है।
सेक्सुअल स्टैमिना को बढ़ाने में फायदेमंद सिंघाड़ा
कभी-कभी किसी बीमारी के कारण सेक्चुअल स्टैमिना में कमी आ जाता है। समान भाग में सिंघाड़े के बीज, उड़द की दाल, खजूर, शतावर की जड़, सिंघाड़ा तथा किशमिश को विधि पूर्वक आठ गुना जल एवं आठ गुना दूध डालकर दूध के बचे रहने तक पकायें। फिर इसमें चीनी, वंशलोचन, ताजा घी और शहद मिलाकर पीने से वाजीकरण गुण की वृद्धि यानि सेक्स करने के दौरान सेक्सुअल स्टैमिना को बढ़ाने में करता है मदद।
सिंघाड़े का उपयोगी भाग
आयुर्वेद में सिंघाड़े के फल और पत्ते का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।
सिंघाड़ा का इस्तेमाल कैसे करें?
हर बीमारी के लिए सिंघाड़ा का सेवन और इस्तेमाल कैसे करना चाहिए, इसके बारे में पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए सिंघाड़े (Shingade fruit) का उपयोग कर रहें हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।
चिकित्सक के परामर्शानुसार-
5-10 ग्राम चूर्ण और
15-30 मिली हिम का प्रयोग कर सकते हैं।
सिंघाड़ा कहां पाया या उगाया जाता है?
समस्त भारत में मुख्यत बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में तालाबों आदि में इसकी खेती की जाती है। सिंघाड़े के आटे से बने खाद्द पदार्थो का प्रयोग व्रत आदि में किया जाता है। इसके फलों का आटा अत्यन्त पौष्टिक एवं मधुर होता है।








