मेयर सुरेंद्र चौहान को एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उनका पैर टूट गया। इस झटके के बावजूद, उनका दृढ़ संकल्प अटल रहा, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यालय से अपने कर्तव्यों को पूरा करना जारी रखा।
चोट लगने के बावजूद मेयर सुरेंद्र चौहान की अपने कार्यालय में मौजूदगी उनकी जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण को बयां करती है। अपनी शारीरिक स्थिति को बाधा बनने की बजाय, उन्होंने शिमला के लोगों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए दृढ़ रहने का फैसला किया।
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