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March 5, 2026 8:31 am

विपाशा पत्रिका ने हिमाचल ही नहीं अपितु पूरे देश में एक विशिष्ट स्थान बनाया है।

भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रकाशित द्विमासिक पत्रिका विपाशा सन् 1985 से निरंतर प्रकाशित हो रही है। पिछले चालीस वर्षों से छप रही इस पत्रिका ने हिमाचल में ही नहीं अपितु पूरे देश में एक विशिष्ट स्थान बनाया है।
पत्रिका को राष्ट्रव्यापी बनाने के लिए देश के जाने-माने प्रशिष्ठित रचनाकारों की रचनाएं छापी जातीं है जिनके साथ प्रदेश के वरिष्ठ व उदीयमान साहित्यकारों को भी शामिल किया जाता है। पत्रिका में ‘देशांतर’ और ‘भाषांतर’ जैसे स्तम्भ है जिनमें विदेशी और भारतीय भाषाओं की रचनाओं के अनुवाद दिए जाते हैं।
पत्रिका का उद्देश्य प्रदेश के सृजनात्मक साहित्य, संस्कृति और कलाओं को बढ़ावा देना है। अतः कथा साहित्य, कविता, व्यंग्य के साथ शोध, समीक्षा को भी नियमित फीचर के रूप में स्थान दिया जाता है। लोक वार्ता, लोक संस्कृति, देव संस्कृति, कला और पुरातत्व सम्बन्धी लेख व शोधपत्र भी पत्रिका के नियमित फीचरों में रहते हैं।
देश तथा प्रदेश के साहित्य को एकसाथ सामने लाने से यह पत्रिका पूरे देश में जानी जाती है। देश भर से निकलने वाली सरकारी व गैर सरकारी पत्रिकाओं में ‘विपाशा’ की वर्षों से एक साख बनी हुई है और इसका पत्रिका जगत में अच्छा नाम है।
प्रदेश के साहित्यकारों को एक मंच प्रदान करना भी पत्रिका का उद्देश्य रहा है। प्रदेश के स्थापित व नवोदित रचनाकारों की रचनाओं को पत्रिका में शामिल किया जाता है। साथ में प्रदेश के बाहर के जाने-माने लेखकों के एकसाथ आने से इसका क्षेत्र देशव्यापी हो जाता है। प्रदेश के रचनाकारों की रचनाएं बाहर पढ़ी जाती हैं और देश का साहित्य यहाँ पढ़ा जाता है। इस तरह से एक साहित्यिक आदान प्रदान का सिलसिला भी बनता है।
यह एक सरकारी पत्रिका है जिससे कोई भी व्यक्ति जुड़ सकता है। यह ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचे, यही विभाग का उद्देश्य रहता है। पत्रिका का शुल्क कोई भी व्यक्ति जमा करवा कर इसका सदस्य बन सकता है। अतः समस्त पाठक वर्ग प्रदेश तथा प्रदेश के बाहर से जो भी हिन्दी साहित्य में शौक रखता हो सीधे विभाग के कार्यकारी उप-संपादक का संपर्क नं0-0177-2626614-15 तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के जिला भाषा अधिकारियों से सम्पर्क कर और शुल्क जमा करवाकर सीधे घर बैठे इसे प्राप्त कर सकता है।
विभाग का समस्त प्रदेश वासियों से व अन्य राज्यों से अनुरोध रहेगा कि विपाशा जैसी साहित्यिक पत्रिकाएं समय-समय पर प्रकाशित होती रहें तथा ज्यादा से ज्यादा पाठकगण साहित्य से जुड़ सकें ताकि इस तरह के प्रयासों से हिन्दी साहित्यकारों को भी अपनी रचनाएं लोगों तक पहुंचाने का एक सीधा व सरल मार्ग प्राप्त हो सके और राष्ट्रभाषा को भी वही दर्जा मिल सके जैसे कि अन्य भाषाओं में प्रकाशित होने वाले साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रदान किया जाता है। इस प्रकार के प्रयासों से प्रदेश की संस्कृति को दूरगामी क्षेत्रों से जोड़ा जा सकेगा तथा साहित्यकारों को भी एक मंच प्रदान किया जा सकेगा ताकि सभी अपने विचार जनसाधारण तक पहुंचा सके जिसके लिए विभाग आप सभी का आभारी रहेगा।

निदेशक, भाषा एवं संस्कृति हिमाचल प्रदेश, शिमला-9.