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February 12, 2026 8:52 pm

हिमाचल प्रदेश के हजारों मजदूर किसान राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान सड़कों पर उतरे।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व राष्ट्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर सीटू के बैनर तले प्रदेश के मजदूरों द्वारा प्रदेशव्यापी हड़ताल आयोजित की गई। इस हड़ताल में  आंगनबाड़ी, मिड डे मील, मनरेगा, निर्माण, प्रदेश व बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ क्षेत्र के औद्योगिक मजदूर, बीआरओ, आउटसोर्स, ठेका, स्वास्थ्य विभाग के वार्ड अटेंडेंट, सुरक्षा, सफाई, डेटा एंट्री ऑपरेटर, ईसीजी, नर्सिंग कर्मियों, 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मियों, निर्माणाधीन पनबिजली परियोजना, उत्पादनरत बिजली परियोजना, सतलुज जल विद्युत निगम, होटल, रेहड़ी फड़ी तहबजारी, सैहब, सीवरेज ट्रीटपेंट प्लांट, एसबीआई ठेका मजदूरों, विशाल मेगामार्ट, कालीबाड़ी मंदिर आदि के हजारों मजदूरों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदेश में जिला व ब्लॉक मुख्यालयों में कई जगह धरने प्रदर्शन रैलियां की गईं। इन प्रदर्शनों में एचपीएमआरए से संबंधित मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, एनजेडआईईए से संबंधित एलआईसी कर्मी, बैंक इंप्लाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया बेफ़ी से संबंधित यूको बैंक कर्मी भी शामिल रहे। हड़ताल को हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएलयू, पेंशनर एसोसिएशन, दलित शोषण मुक्ति मंच, जन विज्ञान आंदोलन आदि का समर्थन रहा। हिमाचल प्रदेश में किसानों ने कई जगह देहात बंद करके जिला व ब्लॉक मुख्यालय प्रदर्शनों में शामिल होकर मजदूर किसान एकता को मजबूत किया।

हड़ताल के दौरान शिमला में सीटू के बैनर तले सैंकड़ों मजदूर हड़ताल में शामिल हुए। शिमला में आईजीएमसी, केएनएच, चमयाना,  मानसिक रोगियों के अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, होटल, तहबाजारी, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, नगर निगम शिमला की सैहब सोसाइटी, विशाल मेगामार्ट, कालीबाड़ी मंदिर, गाइड आदि के मजदूरों ने पूर्ण हड़ताल की व कामकाज पूरी तरह ठप्प कर दिया। शिमला में प्रदर्शन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, हिमाचल किसान सभा अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर, एलआईसी नेता प्रदीप मिन्हास, बेफ़ी नेता दीक्षांत ठाकुर, एचपीएमआरए नेता चमन ठाकुर, रमाकांत मिश्रा, विवेक कश्यप, मीनाक्षी ठाकुर, शांति देवी, अनिल ठाकुर, रंजना जरेट, एडवोकेट सुरेंद्र वर्मा, प्रताप चौहान, वीरेंद्र लाल, प्रवीण शर्मा, ओमप्रकाश गर्ग, दलीप सिंह, प्रेम लाल आदि ने संबोधित किया।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने देशव्यापी हड़ताल के तहत हिमाचल प्रदेश में हड़ताल के दौरान हुए प्रदर्शनों को बेहद सफल करार दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार लेबर कोड के जरिए मजदूरों पर गुलामी थोपने व बंधुआ मजदूरी कायम करने के खिलाफ, 30 हजार रुपए न्यूनतम वेतन, योजना कर्मियों, आउटसोर्स, ठेका प्रथा, मल्टी टास्क, टेंपररी, कैजुअल, ट्रेनी की जगह नियमित रोजगार देने, मनरेगा कानून को खत्म करके वी बी ग्राम जी लागू करने, श्रमिक कल्याण बोर्ड के आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने, अमरीका द्वारा भारत पर थोपे गए 18 प्रतिशत टैरिफ, किसानों की कर्जा मुक्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने, किसानों की आत्म हत्याओं पर रोक लगाने, जमीनों व घरों से जनता की बेदखली, फोरलेन प्रभावितों को उचित मुआवजा व अस्सी प्रतिशत रोजगार आदि मांगों पर हिमाचल प्रदेश के हजारों मजदूर किसान राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान सड़कों पर उतरे।
उन्होंने कहा कि लेबर कोड लागू होने से सत्तर प्रतिशत उद्योग व चौहतर प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हड़ताल करने पर मजदूरों को कड़ी सजाओं व जुर्मानों का प्रावधान किया गया है। पक्के किस्म के रोजगार के बजाए ठेका प्रथा व फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। काम के घंटे आठ के बजाए बारह घंटे करने से बंधुआ मजदूरी स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, मिड डे मील व आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने तथा ग्रेच्युटी लागू करने, मजदूरों का न्यूनतम वेतन 30 हज़ार रुपये घोषित करने, मजदूर विरोधी चार लेबर कोडों, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन, बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, मजदूरों के काम के घंटे आठ से बढ़ाकर बारह करने, फिक्स टर्म रोज़गार को रद्द करने, असंगठित मजदूरों के लिए सार्वभौमिक व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने, ठेका मजदूरों की रोज़गार सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें नियमित कर्मियों के बराबर वेतन देने, निर्माण मजदूरों के श्रमिक कल्याण बोर्ड से आर्थिक लाभ व पंजीकरण सुविधा बहाल करने, एसटीपी मजदूरों के लिए शेडयूल एम्प्लॉयमेंट घोषित करने, आउटसोर्स व अस्पताल कर्मियों के लिए नीति बनाने, औद्योगिक मजदूरों को 40 प्रतिशत अधिक वेतन देने, तयबजारी को उजाड़ने के खिलाफ, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों कल लागू करने, मनरेगा को बहाल करने एवं शहरी क्षेत्रों में विस्तार के साथ ही ग्रामीण रोजगार में 600 रुपये प्रति दिन की मजदूरी पर 200 दिन कार्य दिवस प्रदान करने, निर्माण तथा बीआरओ मजदूरों का श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण व आर्थिक लाभ बहाल करने, आउटसोर्स, सैहब व 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मियों के लिए नीति बनाने, भारी महंगाई पर रोक लगाने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकने, किसानों की कर्ज़ा मुक्ति आदि मांगों को लेकर आंदोलन तेज होगा।