सबकी खबर , पैनी नज़र

September 23, 2026 12:29 am

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एसबीआई कॉन्ट्रेक्ट वर्करज़ यूनियन सम्बन्धित सीटू का गैर कानूनी तबादलों व अन्य मांगों को लेकर राज्य स्तरीय विशाल प्रदर्शन

शिमला: एसबीआई डीजीएम कार्यालय कुसुंपटी शिमला के बाहर पांच घंटे तक चला प्रदर्शन। इस दौरान मजदूर उग्र हो गए तथा बैंक कार्यालय गेट पर पहुंच गए व अधिकारियों को घेराबंदी की। प्रदर्शन में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला शिमला सचिव रमाकांत मिश्रा, विवेक कश्यप, दलीप सिंह, पूर्ण चंद, सीताराम, यूनियन अध्यक्षा डिम्पल, महासचिव राकेश, विनय, सीमा, चंदेल सिंह, ममता, पूनम, सुनीता, राकेश, अरुण, रवि, राजेन्द्र, प्रताप, रविन्द्र, रवि, सुमित, छूनो राम, सुभाष, नीमा, राजन, साहिल, रंजन, सुरेश, अश्वनी, राज आदि मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान बैंक प्रबंधन व यूनियन प्रतिनिधियों में चली एक घंटे की बैठक के बाद गैर कानूनी तरीके से ट्रांसफर किए गए सैकड़ों कर्मचारियों की ट्रांसफर को रोक दिया गया है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विजेंद्र मेहरा, रमाकांत मिश्रा, विवेक कश्यप, डिंपल व राकेश ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एसबीआई ब्रांचों में कार्यरत हाउस कीपिंग स्टाफ का भारी शोषण हो रहा है। उन्हें गैर कानूनी तरीके से ट्रांसफर किया जा रहा है। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। उन्हें हर महीने वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई जगह मजदूरों को तीन महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। कई स्थानों पर कई महीनों से मजदूरों का ईपीएफ जमा नहीं किया गया है। मजदूरों के ईपीएफ में भारी गड़बड़ियां हैं। ठेका मजदूर अधिनियम 1970 की अवहेलना करके मजदूरों का स्थानांतरण किया जा रहा है जोकि गैर कानूनी है। उनसे दस से ग्यारह घण्टे कार्य लिया जा रहा है परन्तु उन्हें ओवरटाइम वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इन कर्मचारियों से सुबह आठ बजे से शाम सात बजे तक कार्य करवाया जा रहा है जबकि इनमें से बहुत सारे कर्मचारी महिलाएं हैं। इस तरह इन कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। इनसे अपने कार्य के अलावा बैंक खोलने व बन्द करने, बाउचर लगाने, डॉक्यूमेंट निकालने, पानी पिलाने, चाय व खाना बनाने, बर्तन साफ करने, मेसेंजर, चपड़ासी, डाक वितरण, बिजली व अन्य बिल जमा करने, अटल पेंशन योजना व जीवन ज्योति योजना, अकाउंट ओपनिंग के फॉर्म भरने, रजिस्टर मेंटेनेंस सहित कई तरह के कार्य लिए जा रहे हैं जोकि इनकी कार्य की शर्तों के खिलाफ है। इन्हें इस अतिरिक्त कार्य का कोई वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है। इन्हें इन कार्यों के लिए टीए का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इन कर्मचारियों को दी जा रही दो वर्दियों का पैसा भी इनसे ही काटा जा रहा है। इन कर्मचारियों को सेलरी स्लिप, ईपीएफ एनुअल स्टेटमेंट, पहचान पत्र आदि नहीं दिए जा रहे हैं। इनको साप्ताहिक अवकाश के अलावा कोई भी छुट्टी नहीं दी जा रही है। छुट्टी जाने पर इन्हें अपने पैसे से ही रिलीवर की व्यवस्था करनी पड़ती है। इन्हें मेडिकल सुविधा भी नहीं दी जा रही है। इन्हें माननीय सुप्रीम कोर्ट के 26 अक्तूबर 2016 के आदेश अनुसार समान कार्य का समान वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। इन्हें कानून अनुसार हर महीने सात तारीख़ से पहले वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई ठेकेदार कई महीनों तक मजदूरों का वेतन भुगतान नहीं कर रहे हैं। कर्मचारियों के रोज़गार की कोई सुरक्षा नहीं है तथा नियोक्ता की मनमानी का विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां दी जाती हैं। इन्हें सफाई के सामान का हर महीने लगभग आठ सौ रुपये अपनी जेब से खर्चने पड़ रहे हैं। इन्हें 50 वर्ष की उम्र में ही जबरन नौकरी से बेदखल किया जा रहा है। मजदूरों को बेवजह स्थानांतरित किया जा रहा है। यूनियन ने चेताया है कि अगर शीघ्र ही समस्याओं का समाधान न किया गया तो यूनियन आंदोलन तेज करेगी।