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February 25, 2026 9:50 pm

अमेरिका-भारत व्यापार समझौता व देश की संप्रभुता पर हो रहे हमले के खिलाफ शिमला के डीसी ऑफिस में विरोध प्रदर्शन।

शिमला: प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए सीपीएम राज्य सचिवमंडल सदस्य डॉ कुलदीप सिंह तंवर, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, लोकल कमेटी सचिव जगत राम, अमित कुमार व विवेक कश्यप ने कहा कि साम्राज्यवादी अमेरिका दूसरे देशों की संप्रभुता पर आक्रमक रूप से हमला कर रहा है। पिछले 6 महीनों में अमेरिका द्वारा बिना किसी युद्ध के 7 देशों पर 658 हवाई हमले करके अपनी साम्राज्यवादी नीति को आक्रमक तरीक़े से बढ़ा रहा है। अमेरिका आर्थिक संकट को झेल रहा है इसलिए अपने हितों को साधने के लिए दूसरे देशों पर अपनी नीतियों को थोपने में तीव्र वृद्धि कर रहा  है जो दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में जारी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति 2025 के वास्तविक चरित्र को उजागर करता है।
अमेरिकी आक्रमण की यह बढ़ती हुई तीव्रता अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मौजूदा संकट चरण और इससे उबरने की उसकी सैन्य योजना से उत्पन्न हो रही है। इसलिए अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार, व्यापक गैस क्षेत्र, महत्वपूर्ण सोने के भंडार और कोल्टान तथा थोरियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडार ,जो आधुनिक तकनीकों,रक्षा उद्योगों व कृषि उत्पादों के लिए बाजार  आवश्यक हैं को कब्जा करने के लिए दूसरे देशों पर हमले व टेरिफ लगाकर अपने हितों को साधने का काम कर रहा है।
जैसे-जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विवरण धीरे-धीरे सामने आ रहा है, यह जानते हुए कि ट्रम्प द्वारा  लगाया गया टेरिफ गैर कानूनी है जिसे अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है यह स्पष्ट होता जा रहा है कि उसके बावजूद भी भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तथाकथित ‘अंतरिम समझौते’ में संयुक्त राज्य अमेरिका को व्यापक रियायतें दी हैं। ये रियायतें भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध आंशिक जानकारी के अनुसार भी, भारत सरकार ने अमेरिका से फलों, कपास, मेवों, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य खाद्य और कृषि उत्पादों के निर्यात पर कोई टैरिफ (शून्य टैरिफ) नहीं लगाने पर सहमति व्यक्त की है। यह निर्णय देश भर में लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोया किसानों की आजीविका को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाएगा।
हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और अन्य राज्यों में सेब किसान पहले से ही न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ पहले किए गए व्यापार समझौतों के कारण पीड़ित हैं। अमेरिका के साथ यह वर्तमान समझौता उनकी आजीविका को और नष्ट कर देगा। कपास किसान, जो पहले से ही बढ़ती इनपुट लागत और बढ़ते कृषि संकट से परेशान हैं, उन्हें भी इसी तरह की तबाही का सामना करना पड़ेगा।
रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि भारत सरकार ने खाद्य और कृषि उत्पादों पर गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने पर सहमति व्यक्त की है। इसका प्रभावी रूप से मतलब होगा कि भारतीय किसानों के लिए समर्थन और सब्सिडी वापस ले ली जाएगी, जिससे वे भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों से प्रतिस्पर्धा के सामने आ जाएंगे और भारतीय कृषि तेजी से अलाभकारी हो जाएगी।
यह व्यापार समझौता हमारी संप्रभुता पर एक झटका है, क्योंकि अमेरिका हमारी नीतियों को निर्देशित कर रहा है, जिसमें रूस से तेल खरीदने के हमारे फैसले भी शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेश इन निर्देशों के अनुपालन का आकलन करने के लिए एक निगरानी तंत्र स्थापित करता है और यदि इनका उल्लंघन किया जाता है तो टैरिफ लगाने की धमकी देता है। यह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा एक शर्मनाक आत्मसमर्पण है।
यह अत्यंत निंदनीय है कि सरकार ने अमेरिकी रक्षा आपूर्ति पर अपनी निर्भरता बढ़ाने का वादा किया है, जो भारत के रणनीतिक हितों के लिए हानिकारक होगा।
सीपीआईम मांग करती है कि अमेरिका के समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए व सरकार को ऐसे किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से रुकना जाना चाहिए जो भारतीय श्रमिकों, किसानों और आम लोगों के हितों के लिए हानिकारक हो और भारत को अमेरिका का जूनियर पार्टनर बनने की नीति को छोड़ना चाहिए।