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February 28, 2026 9:10 pm

महापौर को पार्षद निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं, कांग्रेस नगर निगम को बना रही राजनीतिक अखाड़ा : कर्ण नंदा

भाजपा पार्षद को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन

शिमला, भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने शिमला नगर निगम की बैठक में भाजपा पार्षद को निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस और नगर निगम के महापौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि महापौर के पास किसी भी निर्वाचित पार्षद को पद से निलंबित या बर्खास्त करने की कोई संवैधानिक या कानूनी शक्ति नहीं है।
कर्ण नंदा ने स्पष्ट किया कि भारत में, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में, पार्षद जनता द्वारा सीधे निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। किसी पार्षद को हटाने या अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया केवल नगर निगम अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों, राज्य सरकार की वैधानिक कार्रवाई या न्यायालय के आदेश से ही संभव है। महापौर को एकतरफा रूप से किसी पार्षद को निलंबित करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिमला के महापौर ने केवल भारतीय जनता पार्टी के एक पार्षद को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया और पूरे सदन के सामने उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया। नंदा ने प्रश्न उठाया कि आखिर केवल एक ही पार्षद को क्यों टारगेट बनाया गया? यह कांग्रेस की राजनीतिक सोच और प्रतिशोध की मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक विकास कार्यों में असफलकांग्रेस नगर निगम को राजनीतिक मंच बनाकर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। यदि महापौर संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण करेंगे तो उन्हें स्वयं कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है और शीघ्र निर्णय आने की संभावना है।
कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों और सदन की गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग बंद किया जाए, अन्यथा भाजपा जनता के बीच इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी।