सबकी खबर , पैनी नज़र

May 1, 2026 8:42 pm

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सीपीआरआई में आलू मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने पर जोर

शिमला। डॉ एम. एल. जाट, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ,नई दिल्ली ने 01 मई 2026 को केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला का दौरा किया। उनके साथ डॉ सुधाकर पाण्डे, सहायक महानिदेशक (फूल, सब्जी, मसाले एवं औषधीय पौधे) भी उपस्थित थे।
पूर्वाह्न सत्र के दौरान, डॉ. एम. एल. जाट ने संस्थान संग्रहालय तथा “जीनोम एडिटिंग उत्कृष्टता केंद्र” का उद्घाटन किया। इसके उपरांत उन्होंने प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशालाओं एवं सुविधाओं का अवलोकन किया, जिनमें एरोपोनिक्स सुविधा, पादप संरक्षण प्रयोगशालाएं, फसलोत्तर प्रौद्योगिकी एवं बीज प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएं, आलू जर्मप्लाज्म भंडार तथा जीनोम एडिटिंग प्रयोगशालाएं शामिल हैं।
इसके पश्चात संस्थान के सभागार में कर्मचारियों, छात्रों एवं फील्ड कार्यकर्ताओं के साथ एक संवाद बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ ब्रजेश सिंह, निदेशक, केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला ने संस्थान की प्रमुख अनुसंधान, बीज उत्पादन एवं विस्तार गतिविधियों तथा उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया।
अपने संबोधन में डॉ. एम. एल. जाट ने संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की सराहना की तथा कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने अनुसंधान नैतिकता, सुदृढ़ डेटा प्रबंधन, प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रणालियों में दक्षता तथा प्रौद्योगिकी के प्रसार एवं अपनाने में व्यवहार विज्ञान की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने पोषक तत्वों की दक्ष किस्मों के विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया तथा छात्रों को कृषि क्षेत्र में अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने कर्मचारियों को रिसर्च डेटा प्रबंधन नीति, संचार नीति एवं रणनीति, जेंडर रणनीति तथा MELIA (निगरानी, मूल्यांकन, अधिगम एवं प्रभाव आकलन) के बारे में भी अवगत कराया।
डॉ आलोक कुमार, अध्यक्ष , सामाजिक विज्ञान संभाग ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
दोपहर सत्र में “आलू मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना: हितधारकों का एक सम्मेलन” विषय पर एक हितधारक सम्मेलन का आयोजन केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के सम्मेलन कक्ष में किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. एम. एल. जाट ने की, जबकि डॉ. सुधाकर पांडे सह-अध्यक्ष, डॉ. बृजेश सिंह संयोजक तथा डॉ संजीव शर्मा, अध्यक्ष पौध संरक्षण संभाग  सह-संयोजक रहे।
इस सम्मेलन में ICAR संस्थानों, बीज कंपनियों, आलू प्रसंस्करण उद्योगों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), प्रगतिशील किसानों तथा राज्य कृषि विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विचार-विमर्श के प्रमुख विषयों में आलू एवं उसके उत्पादों का निर्यात, सुदृढ़ एवं पारदर्शी बीज प्रणाली का विकास, स्वच्छ रोपण सामग्री की उपलब्धता, पोषक दक्ष किस्मों का विकास, बीज उपलब्धता की रियल-टाइम जानकारी, किसानों की गुणवत्तापूर्ण बीज तक पहुंच, अनुसंधान-हितधारक सहयोग तथा बीज ग्रामों को बढ़ावा देना शामिल रहे।
इस सम्मेलन से कई व्यावहारिक सुझाव प्राप्त हुए तथा एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गई, जिसका उद्देश्य बीज से लेकर प्रसंस्करण एवं बाजार तक आलू मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना तथा किसानों एवं उद्योग के समक्ष आने वाली बाधाओं को कम करना है। यह पहल आईसीएआर के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य हितधारक-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से बीज प्रणालियों को मजबूत करना एवं किसान संपर्क को सुदृढ़ करना है।
सम्मेलन के उपरांत, डॉ. एम. एल. जाट ने केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की कुफरी इकाई में आलू प्रसंस्करण सुविधा एवं बीज आलू उपचार इकाई, फागू स्थित न्यूक्लियस बीज उत्पादन फार्म तथा कुफरी (आरामगढ़) स्थित ब्रीडर बीज उत्पादन फार्म का दौरा किया। उन्होंने चल रही गतिविधियों की समीक्षा की, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों से संवाद किया तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया।
सायंकाल में, डॉ. एम. एल. जाट ने केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला तथा शिमला स्थित अन्य आईसीएआर संस्थानों/क्षेत्रीय केंद्रों—जैसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) तथा राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) —के वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया। इस दौरान अनुसंधान प्राथमिकताओं, संस्थागत सहयोग तथा कृषि क्षेत्र की भविष्य की तैयारियों पर चर्चा की गई।