नारद के आदर्शों से प्रेरित, समाज को जोड़ती है पत्रकारिता : संजीव शर्मा
विश्व संवाद केंद्र, शिमला द्वारा कॉम्बरमेयर होटल, शिमला में देवर्षि नारद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकारों, संपादकों तथा मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री संजीव शर्मा, कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री राज कुमार वर्मा तथा मुख्त वक्ता प्रांत प्रचार प्रमुख श्री प्रताप समयाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर देवर्षि नारद एवं मां सरस्वती के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता श्री प्रताप समयाल ने कहा कि पत्रकारिता, संवाद और सूचना के लिए ‘नारद मुनि’ शब्द का प्रयोग होता रहा है, जो इस बात का प्रतीक है कि नारद जी तीनों लोकों में देवताओं के मध्य संवाद एवं सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे।
उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को ‘उदंत मार्तण्ड’ का प्रकाशन नारद जयंती के अवसर पर हुआ था। तभी से नारद जयंती मनाई जाती है। आज यह कार्यक्रम विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद केवल पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि प्रथम संचारक थे, जिन्होंने तीनों लोकों में संवाद स्थापित कर लोकहित को प्राथमिकता दी। मुख्य वक्ता प्रताप सामयाल ने नारद को ‘ग्लोबल कम्युनिकेटर’ बताते हुए कहा कि उनकी संवाद शैली समावेशी और संतुलित थी।
उन्होंने पत्रकारिता में सकारात्मकता, प्रामाणिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों, स्व-बोध और कर्तव्य पालन के पाँच संकल्पों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी युग में संपर्क तो बढ़ा है, पर मानवीय जुड़ाव घटा है।
उन्होंने पत्रकारों से देवर्षि नारद से प्रेरणा लेकर समाज को जोड़ने वाली संवाद शैली अपनाने का आह्वान किया। पत्रकारिता न्याय दिलाने के लिए सदैव जागरूक रही है। देशहित, जनकल्याण तथा सूचना एवं संपर्क के दायित्वों को निभाने में पत्रकारों ने विशेष योगदान दिया है। देवर्षि नारद पत्रकारिता के महान आदर्श एवं प्रेरणास्रोत रहे हैं।प्रताप समयाल ने संघ शताब्दी वर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रवर्तित ‘पंच परिवर्तन’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक समरसता इन पाँच संकल्पों से ही परिवार, समाज और राष्ट्र में परिवर्तन संभव है। सोशल मीडिया, समाचार रिपोर्टिंग और स्तंभ लेखन में नवाचार करते हुए समाज के कल्याण से जुड़ी घटनाओं एवं कार्यों को सर्वोपरि मानकर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीव शर्मा ने पत्रकारों और संपादकों से संवाद करते हुए कहा कि प्रसार भारती और पीआईबी सूचना तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूचनाओं का प्रसारण सत्य घटनाओं के आधार पर होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि समाचारों को सबसे पहले प्रस्तुत करने, सनसनी फैलाने और टीआरपी बटोरने की होड़ में कई बार उन्हें जल्दबाजी में प्रसारित कर दिया जाता है, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर भी संदेह होने लगता है। ऐसी स्थिति में नारद जी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री राज कुमार वर्मा ने कहा कि हर समस्या के समाधान के लिए केवल सरकार से उम्मीद करना उचित नहीं है। लोगों को स्वयं आगे आकर समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए सकारात्मक प्रयास करने चाहिए।उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के लिए भी यह आवश्यक है कि वह सार्थक प्रयासों का साथ दे और नकारात्मकता फैलाने से बचे। पत्रकारिता में व्यवसायिकता के साथ सच्चाई का साथ दिया जाना चाहिए, ताकि विचारों में सकारात्मक परिवर्तन आए और समाज सेवा का भाव बढ़े।
विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्री बसल ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, मुख्य वक्ता तथा पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो. नरेन्द्र शारदा, अजय श्रीवास्तव, श्री गणेश दत्त, वरिष्ठ पत्रकार नंदिनी मित्तल, श्री रितेश कपूर, डॉ. शशिकांत, श्री राकेश लोहमी, श्री राजीव पथरिया, श्री प्रकाश पंथ, मस्तराम डलैल सहित
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के संपादक, संवाददाता, ब्यूरो प्रमुख एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।










