सबकी खबर , पैनी नज़र

June 7, 2026 10:06 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

June 7, 2026 10:06 pm

एग्रो-प्रोसेसिंग फलों के निर्यात के लिए बनाई रणनीति में हिमाचल के जैविक फलों को मिलेगा वैश्विक अवसर – मोनिका गौर

शिमला, 07 जून, 2026, बागवानी उत्पादों के निर्यात संवर्धन हेतु एपीडा एवं एचपीएमसी द्वारा हितधारक सहभागिता कार्यशाला का आयोजन*

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीएमसी) के सहयोग से फागू, शिमला में “हिमाचल प्रदेश के कृषि-प्रसंस्कृत खाद्य एवं पेय उत्पादों के निर्यात” विषय पर एक हितधारक सहभागिता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार, एचपीएमसी, उद्योग जगत, निर्यातकों, उद्यमियों, प्रसंस्करण इकाइयों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा अन्य संबंधित हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और राज्य के बागवानी उत्पादों तथा मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की निदेशक सुश्री मोनिका गौर ने की। इस अवसर पर उन्होंने हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में उपलब्ध अपार निर्यात संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बाजार संपर्क, मूल्य संवर्धन तथा निर्यातोन्मुख अवसंरचना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एग्रो-प्रोसेसिंग फलों के अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए नई रणनीति बनाई है, जिससे हिमाचल के जैविक फलों को वैश्विक अवसर मिलेगा।
एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा ने अपने संबोधन में राज्य के बागवानी उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग तथा विपणन में एचपीएमसी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रसंस्करण एवं निर्यात मूल्य श्रृंखला से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितिन यादव ने मुख्य वक्तव्य देते हुए हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने तथा उच्च मूल्य वाले ताजे एवं प्रसंस्कृत बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की जिसमें हिमाचल प्रदेश के बागवानी उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं का आकलन, विशेषकर प्लम, आड़ू, खुबानी, चेरी जैसे स्टोन फ्रूट्स तथा उनसे निर्मित मूल्यवर्धित उत्पादों पर विशेष ध्यान देने बारे, राज्य के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, आयातकों एवं विदेशी बाजारों के साथ मजबूत संपर्क स्थापित करना, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन तथा निर्यात संवर्धन के क्षेत्रों में उद्यमिता विकास के अवसरों की पहचान, एपीडा की निर्यात संवर्धन योजनाओं, वित्तीय सहायता कार्यक्रमों, गुणवत्ता प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी मानकों तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी, हिमाचल प्रदेश के फलों के रस, कॉन्संट्रेट, जैम, स्क्वैश, अचार, कैनिंग उत्पादों तथा अन्य मूल्यवर्धित बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना शामिल है।
प्रतिभागियों ने बाजार पहुंच, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता मानकों, उत्पाद एकत्रीकरण, फसलोत्तर प्रबंधन, कोल्ड-चेन अवसंरचना तथा निर्यात सुविधा से संबंधित चुनौतियों पर भी चर्चा की। प्रतिभागियों के अनुसार यह कार्यशाला सरकारी एजेंसियों, निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों तथा किसान समूहों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र की निर्यात क्षमता को नई दिशा देने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. तरुण बजाज द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों, हितधारकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए राज्य में एक सशक्त निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए उनके योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधियों के अतिरिक्त किसान उत्पादक संगठनों के सदस्य, निर्यातक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।