सबकी खबर , पैनी नज़र

June 18, 2026 10:37 pm

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शूलिनी विवि QS ग्लोबल टॉप 500 में शामिल, लगातार चौथे साल भारत की नंबर 1 प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनी रही

दुनिया में 452वां और भारत में 10वां स्थान~ यह ग्लोबल टॉप 500 में शामिल इकलौती भारतीय प्राइवेट यूनिवर्सिटी है~

सोलन, 18 जून

शूलिनी यूनिवर्सिटी आज QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के ग्लोबल टॉप 500 में शामिल हो गई है, इसे दुनिया में 452वां और

भारत में 10वां (ओवरऑल) स्थान मिला है। यह ग्लोबल टॉप 500 में शामिल इकलौती भारतीय प्राइवेट यूनिवर्सिटी है और लगातार चौथे साल देश की नंबर 1 प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनी हुई है। QS क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS Quacquarelli Symonds) द्वारा आज जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के 2027 एडिशन में 106 हायर एजुकेशन सिस्टम की 1,500 से ज़्यादा यूनिवर्सिटीज़ शामिल हैं। भारत की 52 यूनिवर्सिटीज़ को इसमें जगह मिली है, जो अब तक की सबसे ज़्यादा संख्या है और एक दशक पहले की तुलना में पांच गुना ज़्यादा है। इस लिस्ट में, शूलिनी इकलौती प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैजिसने लगातार चार रैंकिंग साइकल में नेशनल टॉप 10 में अपनी जगह बनाए रखी है। पिछले एक दशक का सफर अपनी कहानी खुद बयां करता है। यूनिवर्सिटी ने QS वर्ल्ड रैंकिंग में 801-1000 बैंड से शुरुआत की, फिर 771-780, फिर 587, फिर

503 और अब 452 के पायदान पर पहुंची। हर साल, बिना किसी अपवाद के, इसने तरक्की की है।

शूलिनी यूनिवर्सिटी का QS वर्ल्ड रैंकिंग का सफर

 

Year

QS World Rank

India Rank

2023

801–1000

2024

771–780

2025

587

12

2026

503

11

2027

452

10सबसे बड़ी बढ़त ‘साइटेशन प्रति फैकल्टी’ (हर फैकल्टी सदस्य के काम का कितनी बार हवाला दिया गया) में मिली। यह पैमाना बताता है कि दुनिया भर के विद्वान किसी यूनिवर्सिटी की रिसर्च को कितना पढ़ते हैं और उस पर आगे कितना काम करते हैं। शूलिनी ने एक ही साल में ग्लोबल रैंकिंग में 138वें स्थान से 76वें स्थान पर छलांग लगाई। 62 स्थानों की यह बढ़त इस दौर में किसी भी भारतीय संस्थान द्वारा रिसर्च के असर में की गई सबसे बड़ी तरक्की में से एक है।

QS की रैंकिंग प्रक्रिया में ‘साइटेशन प्रति फैकल्टी’ को 20 प्रतिशत का सबसे ज़्यादा वेटेज (महत्व) दिया जाता है। इसलिए, इतनी बड़ी बढ़त सीधे तौर पर शूलिनी की रिसर्च की पहुँच को दर्शाती है।

संस्थापक चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने कहा कि यह नतीजा एक स्पष्ट एकेडमिक सोच के साथ संस्थान को खड़ा करने की सालों की मेहनत का परिणाम है। “जब हमने शूलिनी की शुरुआत की, तो हमारा मकसद सिर्फ़ एक और यूनिवर्सिटी बनाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा संस्थान बनानासंस्थान चाहते हैं जो उन्हें ग्लोबल एक्सपोज़र, बेहतरीन रिसर्च के मौके और इंडस्ट्री के साथ मज़बूत संबंध प्रदान करें। इस तरह की रैंकिंग हमें गहरे अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाने, बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित करने और ऐसे रास्ते तैयार करने में मदद करती है जो छात्रों को तेज़ी से बदलते करियर और इंडस्ट्री के लिए तैयार कर सकें।”

शूलिनी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने इस रैंकिंग कोभारतीय उच्च शिक्षा में हो रहे व्यापक बदलाव का एक हिस्सा बताया। “ग्लोबल नॉलेज इकॉनमी में भारत का भविष्य का नेतृत्व उन संस्थानों पर निर्भर करेगा जो रिसर्च, इनोवेशन और समस्या-समाधान को प्राथमिकता देते हैं। विश्वविद्यालयों को खोज और एंटरप्रेन्योरशिप का इंजन बनना होगा। यह उपलब्धि ऐसे इकोसिस्टम को बनाने की हमारी कोशिशों को दिखाती है, जहाँ छात्र और रिसर्चर दुनिया के बेहतरीन लोगों के साथ मुकाबला कर सकें।”ध्यान देने का फ़ैसला किया। हमारी फैकल्टी ने रिसर्च और पब्लिकेशन का एक मज़बूत कल्चर बनाया है। हमारे स्टूडेंट्स को इनोवेशन करने, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी बनाने और असल दुनिया की समस्याओं पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हमने ग्लोबल पार्टनरशिप, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और ऐसे इकोसिस्टम में काफ़ी निवेश किया है जो जिज्ञासा और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देता है।

शूलिनी यूनिवर्सिटी से ऊपर रैंक वाले नौ संस्थान – IIT दिल्ली (118), IIT बॉम्बे (134), IIT मद्रास (170), IIT खड़गपुर (205), IIT कानपुर (221), IISc बैंगलोर (221), दिल्ली यूनिवर्सिटी (322), IIT रुड़की (335) और IIT गुवाहाटी (349) – सभी सरकारी फ़ंडिंग वाली यूनिवर्सिटीज़ हैं, जिनका इतिहास कई दशकों और कई मामलों में एक सदी से भी ज़्यादा पुराना है। इसके उलट, 2009 में स्थापित शूलिनीयूनिवर्सिटी तेज़ी से एक प्रमुख संस्थान के तौर पर उभरी है, जो इसके एकेडमिक और रिसर्च-आधारित नज़रिए की मज़बूती को दिखाता है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के बारे में

ग्लोबल हायर एजुकेशन एनालिस्ट QS Quacquarelli Symonds की ओर से हर साल जारी की जाने वाली QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, दुनिया की सबसे असरदार और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाने वाली यूनिवर्सिटी रैंकिंग में से एक है। यह रैंकिंग कई पैमानों पर संस्थानों का आकलन करती है, जिनमें एकेडमिक रेप्युटेशन, एम्प्लॉयर रेप्युटेशन, प्रति फैकल्टी साइटेशन, फैकल्टी-स्टूडेंट रेश्यो, इंटरनेशनल फैकल्टी रेश्यो, इंटरनेशनल स्टूडेंट रेश्यो, इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क, एम्प्लॉयमेंट आउटकम और सस्टेनेबिलिटी शामिल हैं। QS रैंकिंग को दुनिया भर में संस्थान की बेहतरीन गुणवत्ता के पैमाने के तौर पर देखा जाता है और छात्र, रिसर्चर, एम्प्लॉयर और पॉलिसी बनाने वाले इसका इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के परफॉर्मेंस और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस का आकलन करने के लिए करते हैं।

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