
शिमला, 19 जून। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपूटवा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu से भेंट कर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपते हुए प्रदेश के महाविद्यालयों तथा राज्य के पाँचों विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की लंबित पदोन्नति (Promotion) तथा कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) को शीघ्र बहाल करने की माँग को प्रमुखता से उठाया।
संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि पिछले लगभग चार वर्षों से उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत अनेक शिक्षकों की पदोन्नति और CAS से संबंधित प्रक्रियाएँ बाधित हैं। इसके कारण शिक्षकों को न केवल व्यावसायिक प्रगति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उनके मनोबल और कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक लगातार शिक्षण, शोध, नवाचार और छात्र हितों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनकी वैधानिक और सेवा-संबंधी माँगें लंबे समय से लंबित पड़ी हुई हैं।
डॉ. व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि शिक्षकों को समय पर पदोन्नति और CAS के लाभ प्राप्त हों। यह केवल शिक्षकों के हित का विषय नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध गतिविधियों और शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ बनाने से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए ताकि प्रदेश के हजारों शिक्षकों को राहत मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि लंबे समय से पदोन्नति प्रक्रियाओं के रुके रहने के कारण अनेक शिक्षक अपने सेवा-काल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और पात्रताओं के बावजूद उचित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रगति से वंचित हैं। संघ ने इस स्थिति को उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा व्यक्त की।
माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुखू ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना तथा शिक्षकों की समस्याओं के प्रति सकारात्मक रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षकों की जायज माँगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि शिक्षकों की पदोन्नति और CAS से संबंधित विषयों को प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा तथा इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश के शिक्षकों का योगदान राज्य के शैक्षणिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए हुए है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस विषय पर संबंधित विभागों से चर्चा कर आवश्यक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा ताकि लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान संभव हो सके।
बैठक के दौरान संघ के प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री के बीच सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासनों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी। संघ ने कहा कि शिक्षकों की यह माँग केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने से भी जुड़ी हुई है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को सुनने और उन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने से शिक्षकों में नई आशा का संचार हुआ है। संघ को विश्वास है कि सरकार अपने आश्वासन के अनुरूप जल्द ही आवश्यक निर्णय लेकर शिक्षकों की लंबे समय से लंबित माँगों को पूरा करेगी।
संघ ने पुनः आग्रह किया कि प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति तथा CAS बहाली से संबंधित मामलों को शीघ्र निपटाया जाए, ताकि शिक्षकों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके और वे और अधिक उत्साह एवं समर्पण के साथ प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दे सकें।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षा किसी भी राज्य के विकास का आधार होती है और शिक्षकों का सम्मान तथा उनकी पेशेवर उन्नति इस व्यवस्था की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि शिक्षकों की उचित माँगों का समय पर समाधान किया जाता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों, शैक्षणिक संस्थानों और संपूर्ण शिक्षा प्रणाली पर दिखाई देगा।
अंत में संघ ने आशा व्यक्त की कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निर्णय लेगी तथा पदोन्नति एवं CAS बहाली के संबंध में लंबित मामलों का समाधान करेगी।








