सबकी खबर , पैनी नज़र

June 20, 2026 9:41 pm

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300 यूनिट फ्री बिजली की गारंटी देकर सत्ता में आई सुक्खू सरकार प्रदेशवासियों को दे रही बिजली के झटके : जयराम ठाकुर

प्रदेश में अपराध चरम पर और पुलिस आपस में “घर-घर” खेल रही

आईएएस अधिकारियों के बाद अब आईपीएस अधिकारियों की लड़ाई खुलकर सामने आई

शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सभी बड़े-छोटे नेताओं ने विधानसभा चुनाव के समय 300 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा की थी। बाकायदा होर्डिंग और बैनर छपवाए गए थे। कांग्रेस के नेता घर-घर जाकर लोगों को 300 यूनिट तक बिजली बिल निशुल्क करने की गारंटी दे रहे थे। सरकार बनी, लेकिन सत्ता में बैठे किसी भी जिम्मेदार नेता को कांग्रेस की कोई गारंटी याद नहीं रही। अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय सरकार उल्टा काम करती दिखाई दी।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक तरफ सरकार ने पहले दिन से ही पूर्व सरकार द्वारा दी जा रही 125 यूनिट फ्री बिजली योजना को निशाने पर लिया और उसे लगभग बंद करके छोड़ दिया। प्रदेश के जिन लोगों को 300 यूनिट तक बिजली उपयोग पर सब्सिडी मिल रही थी, उसे भी समाप्त कर दिया गया। इसकी वजह से लोगों के बिजली बिलों में दो से ढाई गुना तक वृद्धि हो गई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इसके बाद भी नहीं रुके और लगातार बिजली के दाम बढ़ते रहे। 300 यूनिट बिजली फ्री करने की गारंटी देकर सत्ता में आने वाली सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही बिजली के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर प्रदेशवासियों के साथ विश्वासघात किया है। यह सरकार की बेशर्मी है कि लोगों का वोट लेने के लिए झूठ बोलती है और सत्ता हासिल करने के बाद उसके विपरीत कार्य करती है। उन्होंने कहा कि अब फिर सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीसीए) के रूप में प्रति यूनिट 33 पैसे का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। इससे हर उपभोक्ता पर औसतन 100 से 125 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। यह अधिभार किसानों से भी वसूला जा रहा है, जिन्हें कृषि कार्य के लिए सब्सिडी वाली बिजली दी जाती है। सरकार ने प्रदेश के हर वर्ग को अपनी आय का जरिया बनाने का काम किया है।

जयराम ठाकुर ने प्रदेश में अफसरशाही के बीच चल रही खींचतान और बढ़ते अपराध को लेकर सीधे मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया माध्यमों से पुलिस अधिकारियों के बीच खींचतान का जो प्रकरण सामने आया है, वह न सिर्फ हास्यास्पद बल्कि हैरान करने वाला भी है। प्रदेश में अपराधी तांडव मचा रहे हैं। आशंका जताने और पुलिस से मदद मांगने के बाद भी दिनदहाड़े स्कूल परिसर में एक महिला की गोलियों से छलनी कर हत्या कर दी जाती है। पुलिस अपराधियों को पकड़ने का दावा कर रही है, लेकिन उससे आगे कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। आखिर वह कौन-सा सच है जिसे छिपाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि घर में अकेली रह रही एक बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हत्या हो रही है और हिमाचल पुलिस आपस में “घर-घर” खेल रही है। इतना सब कुछ होने के बाद भी मुख्यमंत्री तमाशबीन बनकर सब कुछ देख रहे हैं। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था पतन की ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती। सुक्खू सरकार की अस्थायी व्यवस्थाएं प्रदेश पर भारी पड़ रही हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बीते चार महीनों से प्रदेश की नौकरशाही में आपसी घमासान मचा हुआ था। पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आपस में लड़ रहे थे और प्रदेशहित दांव पर लगा हुआ था। वरिष्ठ नौकरशाह एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे और मुख्यमंत्री पूरे प्रकरण में कुछ भी बोलने से बच रहे थे। उन्होंने आपस में लड़ रहे आईएएस अधिकारियों के बचाव में जो टिप्पणी की थी, वह उनकी बेबसी का एक नमूना भर थी। उन्होंने कहा कि अब आईपीएस अधिकारियों की लड़ाई भी प्रदेश में चर्चा का विषय बन रही है और मुख्यमंत्री बेबस होकर सब कुछ देख रहे हैं। जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मनमानी करने की छूट दे दी है, उससे ऐसी स्थिति आनी ही थी। हमने मुख्यमंत्री को पहले ही आगाह किया था कि जिस रास्ते पर आप चल रहे हैं, उससे प्रदेश का नुकसान होगा। आज ऐसी-ऐसी घटनाएं और ऐसे-ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सब कुछ चुपचाप देखने को मजबूर हैं। वह समझौतों में घिरे हुए हैं, क्योंकि वह अधिकारियों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गए हैं।