सबकी खबर , पैनी नज़र

August 18, 2026 10:51 am

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केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान का माहभर चला ‘खेत बचाओ अभियान’

शिमला। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आह्वान पर आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा 1 से 30 जून, 2026 तक चलाया गया राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। संतुलित उर्वरक उपयोग, और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान में देशभर के किसानों और कृषि हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अभियान ने किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने तथा कृषि प्रसार सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।

यह अभियान आईसीएआर-सीपीआरआई मुख्यालय, शिमला के साथ-साथ पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और मेघालय स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों में एक साथ संचालित किया गया। अभियान के दौरान 100 किसान-केंद्रित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनसे देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के 5,456 किसानों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला।

अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों ने 178 खेत स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किए, जिनमें उन्नत फसल प्रबंधन, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन, बीज उपचार तथा टिकाऊ खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता के लिए 1,052 बैनर, पोस्टर और प्रचार सामग्री प्रदर्शित की गई। वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से चलाए गए व्यापक जनसंपर्क अभियान के जरिए लगभग 1.5 लाख हितधारकों तक अभियान का संदेश पहुंचाया गया। ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, गुणवत्तायुक्त बीजों का उपयोग, बीज उपचार, हरी खाद, आधुनिक बुवाई तकनीक तथा जल-कुशल कृषि पद्धतियों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया गया। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ जलवायु-अनुकूल तकनीकों एवं वैज्ञानिक फसल प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

अभियान की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. ब्रजेश सिंह, निदेशक ने कहा, “किसानों की उत्साहजनक भागीदारी वैज्ञानिक तकनीकों और समय पर उपलब्ध तकनीकी मार्गदर्शन के प्रति उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से आईसीएआर-सीपीआरआई ने किसानों तक टिकाऊ कृषि के व्यावहारिक समाधान पहुंचाने का सफल प्रयास किया है। संस्थान भविष्य में भी अपने कृषि प्रसार कार्यक्रमों का विस्तार करता रहेगा, ताकि नवीनतम अनुसंधान, तकनीक और नवाचार सीधे किसानों तक पहुंच सकें तथा कृषि उत्पादकता, किसानों की आय और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।”

अभियान के सह-नोडल अधिकारी डॉ. पिनबियानलांग के. ने बताया कि शिमला की टीमों ने शिमला और सोलन जिलों के विभिन्न विकास खंडों में लगभग 25 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे करीब 1,200 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। इन कार्यक्रमों में किसानों को संवादात्मक सत्रों, खेत प्रदर्शन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी सलाह प्रदान की गई।

इस अभियान के सफल संचालन में डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. विनय सागर तथा डॉ. सोम दत्त सहित संस्थान के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अभियान के दौरान 17 बहु-विषयक वैज्ञानिक दल, जिनमें मुख्यालय शिमला की छह टीमें शामिल थीं, पूरे महीने किसानों के बीच सक्रिय रहीं। इन टीमों ने गांवों का दौरा किया, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, फसलों का निदान सर्वेक्षण किया तथा किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान करते हुए प्रभावी फसल सुरक्षा के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। ‘खेत बचाओ अभियान’ का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आईसीएआर-सीपीआरआई प्रयोगशाला से खेत तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने के अपने मिशन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यापक कृषि प्रसार गतिविधियों के समन्वय से संस्थान किसानों को ज्ञान, आधुनिक तकनीक और समयबद्ध परामर्श उपलब्ध कराकर देश में सुदृढ़, उत्पादक एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।