सबकी खबर , पैनी नज़र

July 10, 2026 11:32 pm

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हरविंदर कल्याण ने किया 400 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक अगुआडा जेल का भ्रमण

गोवा के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम से हुए रूबरू

चंडीगढ़:पवन चोपड़ा, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने गोवा प्रवास के दौरान आयोजित हेरिटेज वॉक में लगभग 400 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक अगुआडा जेल का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने जेल परिसर, फोर्ट अगुआडा, संग्रहालय और वहां संरक्षित स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि देश की ऐसी विरासतें केवल इमारतें नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष, साहस और बलिदान की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
1612 में पुर्तगालियों ने बनवाया था फोर्ट अगुआडा
पणजी से लगभग 16 किलोमीटर दूर कैंडोलिम के निकट स्थित फोर्ट अगुआडा का निर्माण वर्ष 1612 में पुर्तगालियों ने डच और मराठा आक्रमणों से सुरक्षा के उद्देश्य से कराया था। ‘अगुआडा’ नाम पुर्तगाली शब्द ‘अगुआ’ (Agua) से लिया गया है, जिसका अर्थ पानी होता है। किले के भीतर मीठे पानी का विशाल स्रोत था, जहां से समुद्री जहाज अपनी जलापूर्ति किया करते थे। इसी कारण यह स्थान समुद्री व्यापार और सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था।
किले के एक हिस्से को बनाया गया था जेल
1930 के दशक में पुर्तगाली शासक एंटोनियो डी ओलिवेरा सालाजार के शासनकाल में फोर्ट अगुआडा के एक हिस्से को केंद्रीय जेल में परिवर्तित कर दिया गया। लंबे समय तक यह गोवा की सबसे बड़ी जेल रही और वर्ष 2015 तक यहां कैदियों को रखा जाता रहा। इसके बाद कैदियों को नई कोलवले जेल में स्थानांतरित कर दिया गया और इस ऐतिहासिक परिसर के संरक्षण एवं पुनरुद्धार का कार्य शुरू किया गया।
स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष की साक्षी रही अगुआडा जेल
गोवा मुक्ति आंदोलन के दौरान यह जेल भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष की साक्षी बनी। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी टी. बी. कुन्हा तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया सहित अनेक आंदोलनकारियों को पुर्तगाली शासन ने इसी जेल में कैद रखा था। आज भी संग्रहालय में उनकी स्मृति में विशेष कोठरियां संरक्षित हैं, जो उस दौर के संघर्ष और यातनाओं की कहानी बयां करती हैं।
हरविंदर कल्याण ने राम मनोहर लोहिया जी की कारागार कोठरी का अवलोकन कर उनके अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट समर्पण को नमन किया।

यह सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विचार और संघर्ष की अमिट चेतना का प्रतीक है। उनकी तपस्या और त्याग की यह विरासत सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।

अब बन चुकी है आधुनिक स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय
कैदियों के स्थानांतरण के बाद इस ऐतिहासिक जेल का व्यापक जीर्णोद्धार किया गया। 19 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे एक आधुनिक स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के रूप में जनता को समर्पित किया। यहां डिजिटल स्क्रीन, वीडियो गैलरी, साउंड एंड लाइट शो तथा इंटरैक्टिव प्रदर्शनी के माध्यम से गोवा के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
एशिया के सबसे पुराने लाइटहाउस का भी है आकर्षण
फोर्ट अगुआडा परिसर में स्थित 1864 में निर्मित 13 मीटर ऊंचा लाइटहाउस इस स्थल का प्रमुख आकर्षण है। इसे एशिया के सबसे पुराने प्रकाश स्तंभों में शामिल किया जाता है। यह प्रकाश स्तंभ कभी अरब सागर से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिखाने का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां से मांडोवी नदी के मुहाने और अरब सागर का अत्यंत मनोहारी दृश्य दिखाई देता है।
रणनीतिक दृष्टि से बेहद मजबूत था यह किला
अगुआडा किला और जेल अपनी मजबूत सैन्य संरचना के लिए प्रसिद्ध हैं। यह ऊंची पहाड़ी पर स्थित है तथा तीन ओर से समुद्र और चट्टानों से घिरा होने के कारण पुराने समय में यहां से किसी कैदी का भाग निकलना लगभग असंभव माना जाता था। किले की मोटी दीवारें स्थानीय लाल लैटेराइट पत्थरों से निर्मित हैं, जो आज भी अपनी मजबूती का प्रमाण देती हैं।
गुप्त सुरंगें और विशाल जल भंडार हैं विशेष आकर्षण
किले के भीतर कई गुप्त सुरंगें बनाई गई थीं, जिनका उपयोग युद्ध अथवा आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित निकास के लिए किया जाता था। इसके अलावा परिसर में लगभग 23.76 लाख गैलन पानी संग्रहित करने की क्षमता वाला विशाल भूमिगत जलाशय भी मौजूद है। यही मीठे पानी का स्रोत इस किले की सबसे बड़ी विशेषता था और इसी कारण इसका नाम ‘अगुआडा’ पड़ा।
इतिहास को संजोने वाली अमूल्य धरोहर
हरविंदर कल्याण ने कहा कि अगुआडा जेल केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, गोवा मुक्ति आंदोलन और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि ऐसे विरासत स्थलों का संरक्षण देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करता है तथा युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है।