सबकी खबर , पैनी नज़र

July 14, 2026 4:10 am

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नाबार्ड हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने मनाया 45वां स्थापना दिवस

2025-26 के दौरान ₹4,213 करोड़ का पुनर्वित्त वितरण किया

राज्य की 1,113 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां अब ई-पैक्स

जीआई टैग प्राप्त चंबा चप्पल की बाजार संभावनाओं का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

शिमला: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने राज्य में सतत कृषि को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने तथा सुदृढ़ एवं आपदा-सहनीय ग्रामीण आधारभूत संरचना के निर्माण के प्रति नई प्रतिबद्धता के साथ शिमला में अपना 45वां स्थापना दिवस मनाया।

इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ नाबार्ड के सभी जिला विकास प्रबंधकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 में क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा प्राप्त उपलब्धियों की समीक्षा की गई तथा आगामी वर्ष की विकासात्मक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम को नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानियाँ ने संबोधित किया।

इस अवसर पर महाप्रबंधक श्री संदीप शर्मा सहित क्षेत्रीय कार्यालय के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए मुख्य महाप्रबंधक ने हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण ऋण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में नाबार्ड के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ₹4,213 करोड़ का पुनर्वित्त वितरण किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कृषि, अनुषंगी गतिविधियों तथा व्यापक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संस्थागत ऋण के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए नाबार्ड द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

मुख्य महाप्रबंधक ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत हुई उल्लेखनीय प्रगति की भी जानकारी दी। नाबार्ड के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय तथा सहकारी समितियों के पंजीयक, हिमाचल प्रदेश के समन्वित प्रयासों से राज्य की 1,113 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां अब ई-पैक्स के रूप में कार्य कर रही हैं। इस पहल से पारदर्शिता एवं परिचालन दक्षता बढ़ने के साथ-साथ सहकारी ऋण व्यवस्था के सदस्यों को अधिक तेज और बेहतर सेवाएं उपलब्ध होने की अपेक्षा है।

पैक्स को सशक्त एवं सतत ग्रामीण व्यावसायिक संस्थाओं के रूप में विकसित करने के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने आदर्श उपविधियों को अपनाने, नई बहुउद्देशीय पैक्स के गठन तथा मौजूदा पैक्स की व्यावसायिक गतिविधियों के विविधीकरण जैसी प्रमुख पहलों का उल्लेख किया। इन उपायों से पैक्स पारंपरिक ऋण गतिविधियों से आगे बढ़कर किसानों एवं ग्रामीण समुदायों को व्यापक स्तर पर विभिन्न
सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।

ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत हुई प्रगति भी मुख्य महाप्रबंधक के संबोधन का एक प्रमुख विषय रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल प्रदेश में ₹783 करोड़ की वित्तीय सहायता वाले विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें 50 पुलों तथा पांच सड़कों का निर्माण शामिल है। इससे ग्रामीण संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी तथा राज्य की
ग्रामीण आधारभूत संरचना को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। इन परियोजनाओं से विशेष रूप से दूरदराज एवं पर्वतीय क्षेत्रों में बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की पहुंच में सुधार होने की अपेक्षा है।

मुख्य महाप्रबंधक ने सभा को यह भी बताया कि पूर्व में स्वीकृत इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग आधारभूत संरचना परियोजना का विस्तार 53 स्थानों से बढ़ाकर 80 स्थानों तक कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नाबार्ड द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन पारंपरिक उत्पादों—रणसिंघा, हिमाचली
गलीचा तथा हिमाचल वुड क्राफ्ट—के भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण में सहयोग प्रदान किया है। जीआई मान्यता से राज्य की पारंपरिक विरासत के संरक्षण, इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान की सुरक्षा तथा कारीगरों एवं उत्पादक समुदायों को जीआई पंजीकरण से जुड़े आर्थिक लाभ प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय की आगामी पहलों के बारे में भी जानकारी साझा की। इन पहलों में विशेष रूप से जीआई टैग प्राप्त चंबा चप्पल की मूल्य शृंखला को सुदृढ़ बनाने तथा उसकी बाजार संभावनाओं का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। नाबार्ड ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में भी विभिन्न गतिविधियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखता है। इसके अंतर्गत राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, पारंपरिक शिल्प, सांस्कृतिक विरासत तथा समुदाय आधारित उद्यमों का लाभ उठाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी अवसर सृजित किए जाएंगे।

क्षेत्र स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत बनाने के निरंतर प्रयासों के अंतर्गत नाबार्ड ने बिलासपुर जिले में जिला विकास प्रबंधक का नया कार्यालय भी खोला है। यह नया कार्यालय जिला प्रशासन, बैंकों तथा अन्य हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, विकासात्मक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी में सुधार लाने तथा हिमाचल प्रदेश में समावेशी ग्रामीण विकास के लिए नाबार्ड के प्रयासों
को और गति देने में सहायक होगा।

मुख्य महाप्रबंधक ने नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधकों एवं अधिकारियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था की उपलब्धियां क्षेत्र स्तर पर निरंतर सहभागिता तथा राज्य सरकार, बैंकों, सहकारी संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों और ग्रामीण समुदायों के साथ प्रभावी समन्वय का परिणाम हैं। उपस्थित अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण रूपांतरण में एक विश्वसनीय भागीदार बने रहने की
नाबार्ड की प्रतिबद्धता को दोहराया। आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय कार्यालय ग्रामीण ऋण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, जलवायु-अनुकूल एवं आपदा-सहनीय आधारभूत संरचना के वित्तपोषण, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, पारंपरिक विरासत के संरक्षण तथा नवाचार एवं साझेदारी के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करेगा।