सबकी खबर , पैनी नज़र

July 14, 2026 4:10 am

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2200 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से शहर में यातायात व्यवस्था सुधरेगी

शिमला 13 जुलाई, 2026, एशियन डेवलपमेंट बैंक करेगा प्रोजेक्ट की फंडिंग
-शिमला में प्रस्तावित सुरंग निर्माण परियोजनाओं पर हितधारकों से किया गया व्यापक विचार-विमर्श
– टनल की स्टडी होगी दोबारा, फोरलेन से जोड़ने की देखी जाएगी फिजिबिलिटी

राजधानी शिमला में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए 2200 करोड़ रुपए की लागत से  वैकल्पिक सड़कें, फ्लाईओवर और टनल आदि बनाए जाएंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है।।इस प्रोजेक्ट की फंडिंग एशियन डेवलपमेंट बैंक ( एडीबी) के माध्यम से की जाएगी। यह जानकारी हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (HPRIDCL) द्वारा शिमला शहर में प्रस्तावित दो महत्वपूर्ण सुरंग निर्माण परियोजनाओं के संबंध में पहली स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन मीटिंग का आयोजन होटल होलीडे होम में रखी गई।

इस बैठक में स्थानीय विधायक हरीश जनार्था ने कहा कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के बारे टॉलैंड से आईजीएमसी टनल निर्माण के माध्यम से हाईवे तक जोड़ने की दिशा में कार्य करना होगा। इस एक टनल से आईजीएमसी और फोरलेन दोनों से जोड़ना अनिवार्य होगा। अन्यथा ये टनल स्वीकार नहीं की जाएगी। जब ऐसा करेंगे  तभी ट्रैफिक कम हो पाएगा। अगर टनल निर्माण से ट्रैफिक कम न हो पाए और दूरी कम न हो पाए तो फिर कोई फायदा नहीं है। ऐसे में टनल निर्माण का कार्य कर रही कंपनी  को यह ध्यान रखना होगा।  हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड  की टीम टनल को फोरलेन से जोड़ने के लिए स्टडी जल्दी करवाए  ताकि ये देखा जाए कि इस टनल के लिए  फिजिबिलिटी स्टेट्स क्या है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करता हूं कि 2200 करोड़ रुपए शहर में यातायात व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए खर्च होगा। हमें ये देखना होगा कि एक भी पैसे का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर में भविष्य के हिसाब से आधारभूत ढांचा विकसित करना होगा ।

बैठक में शिमला शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित दो सुरंगों के निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तावित परियोजनाओं में आईजीएमसी जंक्शन से सेंट बीड्स कॉलेज के समीप आईपीएच पंप हाउस तक सुरंग तथा एचपी पीडब्ल्यूडी हट्स (हिमफेड पेट्रोल पंप के समीप) से निगम विहार (डाकघर के नीचे) तक दूसरी सुरंग का निर्माण शामिल है।

बैठक के दौरान परियोजनाओं की प्रारंभिक रूपरेखा, संभावित लाभ, तकनीकी पहलुओं तथा निर्माण के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। उपस्थित हितधारकों ने यातायात प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों की सुविधा तथा निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा संबंधी विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए।

एचपीआरआईडीसीएल के अधिकारियों ने कहा कि प्राप्त सुझावों का विस्तृत अध्ययन कर उन्हें परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में यथासंभव शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन सुरंगों के निर्माण से शिमला शहर में यातायात जाम की समस्या में कमी आएगी, यात्रा समय घटेगा तथा नागरिकों और पर्यटकों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होगी।

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित हितधारक उपस्थित रहे। परियोजना के डीपीआर सलाहकार द्वारा भी प्रस्तावित सुरंगों के तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की गई।

इस दौरान स्थानीय विधायक हरीश जनार्था को पवन शर्मा, निदेशक हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने शॉल टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया।

इस मौके पर महापौर सुरेंद्र चौहान, उप महापौर  उमा कौशल, डीएसपी वरुण पटियाल, पार्षद ममता चंदेल, पार्षद मीनू चौहान, पार्षद आलोक पठानिया सहित अन्य हितधारक मौजूद रहे।

विधानसभा फ्लाईओवर बनेगा दिसंबर 2026 तक*
विधानसभा के समीप बन रहा फ्लाईओवर दिसंबर 2026 में बनकर तैयार हो जाएगा। इसका निर्माण कार्य तीव्र गति से चला हुआ है। दिसंबर में इसका लोकार्पण किया जाएगा। इसके बनने से जाम से काफी निजात मिलेगा।

इन स्थानों पर हुआ सर्वे
हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से  विक्ट्री टनल, टॉलैंड जंक्शन,  छोटा शिमला,  शिमला बाईपास,  कुफरी रोड़ और आईजीएमसी जंक्शन में सर्वे किया गया है। इसमें संजोली जंक्शन से रोजाना  27,266 वाहन, छोटा शिमला 24,967 और विक्ट्री टनल पर 37,734 वाहन प्रतिदिन आते है। इस योजना के लिए ड्रोन से सर्वे किया गया है। शहर में सुबह शाम पीक आवर्स के दौरान किन स्थानों पर ज्यादा जाम लगता है, इसे भी चेक किया गया है।

*2200 करोड़ रुपए होंगे खर्च*
एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा वित्तपोषित STRIDe (Sustainable Transport, Resilience and Integrated Development in Himachal Pradesh) परियोजना का उद्देश्य शहरी परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना, जलवायु अनुकूल एवं सुरक्षित संपर्क विकसित करना तथा शिमला को लंबे समय तक ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराना है। इस परियोजना के तहत शिमला शहर के लिए सात प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें आईजीएमसी टनल के अतिरिक्त चक्कर बाईपास एवं एम.एल.ए क्रॉसिंग पर वायाडक्ट, रेलवे पार्किंग से होटल होलीडे होम तक केबल-स्टे ब्रिज, विक्ट्री टनल जंक्शन पर वायाडक्ट, मंजीयाठ में एंबुलेस रोड, मेहली-प्रीत नगर से लवासा चौकी सड़क उन्नयन तथा शहर में पैदल यात्री सुविधाओं का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं पर लगभग 2,200 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।

*टनल बनने से कम होगा शहर का जाम*
आईजीएमसी टनल परियोजना के अंतर्गत लगभग 1.45 किलोमीटर लंबाई (910 मीटर एवं 540 मीटर) की दो सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है, जो आईजीएमसी को छोटा शिमला तथा छोटा शिमला को संजौली से सीधे जोड़ेंगी। इससे वाहनों को सचिवालय क्षेत्र से होकर गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी और शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर उच्च क्षमता वाला वैकल्पिक यातायात मार्ग उपलब्ध होगा।
डीपीआर के अंतर्गत किए गए यातायात अध्ययन के अनुसार वर्ष 2032 तक परियोजना के पूर्ण होने पर आईजीएमसी जंक्शन से संजौली चौक मार्ग पर लगभग 27 प्रतिशत तथा नवबहार से संजौली चौक मार्ग पर लगभग 36 प्रतिशत तक यातायात कम होने की संभावना है। इससे यात्रियों को आवागमन में सुविधा, समय की बचत तथा शहर में बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

*रेलवे पार्किंग से होटल हॉलीडे होम तक प्रस्तावित केबल-स्टे ब्रिज*
रेलवे पार्किंग से होटल हॉलीडे होम तक प्रस्तावित केबल-स्टे (Cable-Stayed) ब्रिज शिमला की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रकार के पुल में सड़क का मुख्य डेक (Deck) ऊँचे पिलरों (Pylons) से निकलने वाली मजबूत स्टील केबलों के सहारे टिका होता है। प्रत्येक केबल सीधे पिलर से जुड़ी रहती है, जिससे पुल पर पड़ने वाला भार समान रूप से वितरित होता है और अतिरिक्त सहायक स्तंभों की आवश्यकता कम हो जाती है।
केबल-स्टे ब्रिज आधुनिक पुल निर्माण तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसकी संरचना न केवल मजबूत और टिकाऊ होती है, बल्कि कम भूमि उपयोग के साथ अपेक्षाकृत लंबी दूरी तक बिना मध्यवर्ती खंभों के पुल निर्माण की सुविधा भी प्रदान करती है। पर्वतीय क्षेत्रों में यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी होती है, क्योंकि इससे प्राकृतिक भू-आकृति और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

प्रस्तावित पुल का आकर्षक डिजाइन शिमला के शहरी परिदृश्य को नई पहचान देगा। साथ ही, यह पैदल यात्रियों और वाहनों के सुरक्षित एवं सुचारू आवागमन में सहायक होगा। आधुनिक इंजीनियरिंग, सौंदर्य और कार्यक्षमता का समन्वय प्रस्तुत करने वाला यह केबल-स्टे ब्रिज भविष्य की आधारभूत संरचना का एक उत्कृष्ट उदाहरण साबित होगा।