सबकी खबर , पैनी नज़र

July 21, 2026 5:49 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

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July 21, 2026 5:49 pm

उपायुक्त कार्यलय के बहार विभिन्न जन संगठनों ने मिलकर नीट पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के खिलाफ रैली निकालकर धरना प्रदर्शन किया।

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जन संगठन SFI, CITU, AIDWA, DSMM, AILU, DYFI, शिमला नागरिक सभा, HKS और सेब उत्पादक संघ नें मिलकर प्रदर्शन किया हमारा मानना है कि देश में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्ता का ढ़ाँचा चर्मरा गया है। इसके लिए देश की मोदी सरकार और देश के शिक्षामंत्री जिम्मेवार है।
नीट के पेपर में 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था पेपर लीक होने के बाद 22 छात्रों ने अभी तक  देश में आत्महत्या की है।
इसकी जबाबदेही मोदी सरकार की है।
जब 21 जून को फिर से नीट का पेपर फिर से करवाया गया तों यह सामने आता है कि 22 लाख छात्रों में से सिर्फ 19,99,895 छात्र पेपर दें पाए है और 2,79,848 छात्रों ने परीक्षा नहीं दी यह दर्शाता है मोदी सरकार और NTA की कमियों को उजागर करता है।
हमारी प्रमुख मांग निम्न प्रकार से है:-
1) सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए।
2) धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
3) NTA को बर्खास्त किया जाए।
4) NEP को रद्द किया जाए।
5) सार्वजनिक शिक्षा के ढ़ाँचे को मजबूत किया जाए।

‎हमारा मानना है कि NTA को देश की मुख्य प्रतियोगी परीक्षाओं (CUET,UGC net ,JEE, NEET) को करवाने की जिम्मेवारी है जिसमें लाखों लोग हर वर्ष कड़ी मेहनत करके भाग लेते है।
‎लेकिन NTA लगातार विफल रहा है। मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा को पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद 12 मई 2026 को पूरी तरह रद्द (Cancel) करना पड़ा। परीक्षा से करीब 15 दिन पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम सर्किलों में एक “गेस पेपर” घूम रहा था, जिसके 100 से ज्यादा सवाल हूबहू असली प्रश्नपत्र से मेल खा गए।

साल 2024 का नीट परीक्षा के नतीजे आने पर 67 छात्रों को पूरे 720 में से 720 अंक मिले, जिनमें से कई छात्र एक ही परीक्षा केंद्र (झज्जर, हरियाणा) से थे। इसके अलावा कई छात्रों को 718 और 719 अंक मिले, जो परीक्षा के मार्किंग पैटर्न के हिसाब से गणितीय रूप से असंभव थे। जून 2024 में आयोजित हुई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) पेपर लीक होने के कारण परीक्षा को ठीक अगले दिन रद्द करना पड़ा।
‎2021 में JEE MAINS इंजीनियरिंग के लिए होने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा भी NTA के कार्यकाल में सुरक्षित नहीं रह सकी। कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) होने के बावजूद, रूसी हैकरों की मदद से परीक्षा केंद्रों के सिस्टम को ‘रिमोट एक्सेस’ सॉफ्टवेयर के जरिए हैक कर लिया गया।
‎इस विफलता की सीधी जिम्मेवारी मुख्य रूप से देश के शिक्षा मंत्री की बनती है। सरकार अपनी ज़िम्मेवारी निभाने में पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, जिससे छात्रों का भरोसा टूट गया है। इसलिए हम तत्काल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफ़े की मांग करते है।
‎देश की राजधानी दिल्ली में जो छात्र भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन कर रहे है उसका हम खुलेतौर पर समर्थन करते है।
इसके साथ साथ सोनम वांगचुक 20 दिन से भूख हड़ताल में बैठे थे उनको दिल्ली पुलिस द्वारा जिस तरह उठाया गया है ये लोकतंत्र में गला घोंटने का काम किया है इसका हम पूरी तरह विरोध करते है यह मोदी सरकार की तानाशाही है इसके खिलाफ छात्र पूरे देश में आंदोलन कर रहा है।
इस धरना प्रदर्शन में CPIM ने भी समर्थन दिया है और कहा कि देश में मोदी सरकार के नीतियों के कारण देश में हर वर्ग परेशान है इस तानाशाही सरकार के खिलाफ मिलकर लड़ने कि जरूरत है।

इसके साथ SFI ने कहा कि आज  देशभर में परीक्षा घोटालों, पेपर लीक, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण तथा शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अनियमितताओं के विरुद्ध जंतर-मंतर, नई दिल्ली में छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह आंदोलन केवल कुछ परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी आवश्यकता है। जंतर-मंतर में चल रहा आंदोलन पूरे देश के विद्यार्थियों की चिंता और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
इसलिए SFI ने पूरे देश में सार्वजनिक शिक्षा को बचाने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के खिलाफ पूरे छात्र समुदाय और युवाओं से संसद मार्च का आह्वान क्या था परंतु आज सुबह यह देखा गया  कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से संसद की ओर जा रहें थे उस समय दिल्ली पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया जाता है जिसका हम कड़े शब्दों में विरोध करते है।
पेपर लीक के खिलाफ चल रहें आंदोलन का समर्थन करते हुए  SFI हिमाचल प्रदेश में शिमला उपायुक्त कार्यालय के बहार क्रमिक हड़ताल शुरू करने जा रही है।

हम हिमाचल प्रदेश के सभी छात्रों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील करते है कि वे देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
‎निवेदक :- SFI, CITU, AIDWA, DSMM, AILU, DFYI, शिमला नागरिक सभा और सेब उत्पादक संघ।