शिमला: 30 अगस्त, 2026, लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC), आज 31 अगस्त 2026 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। इसके साथ ही राष्ट्र के प्रति उनकी 39 वर्षों की गौरवपूर्ण एवं समर्पित सैन्य सेवा का अध्याय पूर्ण हुआ।
दूसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ऐसे गौरवशाली परिवार से आते हैं, जिसने सामूहिक रूप से एक शताब्दी से अधिक समय तक राष्ट्र की सेवा की है। उनके पिता स्वर्गीय विंग कमांडर शिव कुमार शर्मा भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान पायलट थे और उन्होंने चार सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया—1961 में गोवा, 1962 में फुकचेह एवं डेमचोक, 1965 में हलवारा तथा 1971 में पठानकोट। वर्ष 1965 में सर्गोधा के ऊपर उनका विमान मार गिराया गया, जिसमें उन्होंने रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बावजूद इजेक्ट किया। इसके बाद उन्होंने पुनः स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर 1971 तक लड़ाकू विमान उड़ाने की क्षमता हासिल कर ली। उनके ससुर ब्रिगेडियर सरजीत सिंह कालेर (सेवानिवृत्त) ने तीनों प्रमुख युद्धों में भाग लिया—1962 में रेजांगला, 1965 में 1 जाट लाइट इन्फैंट्री के साथ अमृतसर-लाहौर सेक्टर में तथा 1971 में 1 जाट के एडजुटेंट के रूप में। बाद में उन्होंने 2 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री (1 JAT) की कमान भी संभाली। लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा के बड़े भाई एयर कमोडोर शैलेंद्र शर्मा, वायु सेना मेडल (सेवानिवृत्त), मिराज-2000 पायलट रहे हैं और उन्होंने 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान कारगिल, द्रास एवं मश्कोह क्षेत्रों में हवाई हमलों में भाग लिया।
मेयो कॉलेज, अजमेर के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने अपने सैन्य जीवन के प्रारंभिक चरण में ही असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (71वां कोर्स) में वे अकादमी कैडेट कैप्टन रहे। भारतीय सैन्य अकादमी (81 रेगुलर कोर्स) में भी वे अकादमी अंडर ऑफिसर रहे तथा प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और सिख लाइट इन्फैंट्री मेडल फॉर बेस्ट स्पोर्ट्समैन से सम्मानित हुए। इस प्रकार वे अपने कोर्स के सर्वश्रेष्ठ कैडेट तथा सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी, दोनों का गौरव प्राप्त करने वाले दुर्लभ अधिकारियों में शामिल रहे। उन्होंने 19 दिसंबर 1987 को भारतीय सेना की पुरानी एवं गौरवशाली बख्तरबंद रेजिमेंट ‘The Scinde Horse’ में कमीशन प्राप्त किया।
अपने सैन्य जीवन के प्रारंभिक वर्षों में 11 राजपूताना राइफल्स के साथ जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के दौरान आतंकवाद-रोधी अभियानों में असाधारण वीरता के लिए उन्हें सेना मेडल (वीरता) से अलंकृत किया गया। आगे चलकर उन्होने The Scinde Horse, एक आर्मर्ड ब्रिगेड, एक इन्फैंट्री डिवीजन तथा एक पिवट कोर की कमान संभाली—ये सभी नियुक्तियां पश्चिमी मोर्चे पर महत्वपूर्ण रही हैं। उन्होंने स्ट्राइक कोर के बीजीएस (ऑपरेशंस), मेजर जनरल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) तथा कमांड मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियों पर भी कार्य किया। उन्हें दो बार विदेश में सेवा का अवसर मिला। पहली बार उन्होंने भूटान स्थित मुख्यालय इंडियन मिलिट्री ट्रेनिंग टीम में जीएसओ-2 (ऑपरेशंस) के रूप में सेवा दी तथा बाद में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (MONUSCO) में चीफ मिलिट्री पर्सनल ऑफिसर के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने 52 देशों के 21,000 से अधिक सैनिकों के प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली।
डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, नई दिल्ली के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट में समग्र मेरिट क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त कर ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ट्रॉफी’ हासिल की। वर्ष 2024 में मेयो कॉलेज, अजमेर द्वारा उन्हें व्यावसायिक उत्कृष्टता एवं प्रेरणादायी नेतृत्व के लिए जेटीएम गिब्सन अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने 01 जुलाई 2024 को आर्मी ट्रेनिंग कमांड के 25वें आर्मी कमांडर के रूप में कमान संभाली।
आर्मी ट्रेनिंग कमांड में परिवर्तनकारी कार्यकाल।
आर्मी ट्रेनिंग कमांड में उनका कार्यकाल कमांड के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण एवं परिवर्तनकारी कार्यकालों में से एक रहा। उनके नेतृत्व मे ARTRAC ने चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ क्वाड्रेनियल ट्रेनिंग डायरेक्टिव 2025-2029 ( COAS Quadrennial Training Directive ) जारी किया तथा ड्रोन वारफेयर प्रशिक्षण को अग्रणी रूप से संस्थागत बनाया। इसके अंतर्गत 50,000 से अधिक सैन्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया और मानव रहित प्रणालियों से संबंधित क्षमता को एक सीमित विशेषज्ञता से आगे बढ़ाकर एक बुनियादी सैन्य दक्षता के रूप में विकसित किया गया।
उनके कार्यकाल में मैन्युवर वारफेयर रेंज, अर्बन वारफेयर नोड्स तथा साइबर एवं इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर रेंज स्थापित करने की पहल की गई। साथ ही, ‘विदुर वक्ता’ (कॉग्निटिव रेड टीमिंग) को पूरे भारतीय सेना में अपनाने के लिए संस्थागत रूप दिया गया। उनके नेतृत्व में ARTRAC ने 74 प्रकाशन, पांच महत्वपूर्ण सैन्य सिद्धांत (डॉक्ट्रिन), प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ 40 समझौता ज्ञापन (MoUs) और 33 सेमिनार आयोजित किए। इसके अतिरिक्त, 15 प्रतिष्ठानों को सेंटर ऑफ एक्सपर्टीज के रूप में विकसित किया गया, ताकि वर्ष 2030 तक 33 नई एवं विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को आत्मसात किया जा सके।
हिमाचल प्रदेश एवं शिमला में योगदान।
लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा के कार्यकाल का हिमाचल प्रदेश और शिमला पर भी उल्लेखनीय प्रभाव रहा। 23 मार्च 2026 को मुख्यालय ARTRAC ने अन्नाडेल में ‘श्रद्धांजलि स्थल’ राष्ट्र को समर्पित किया। यह राज्य की राजधानी में युद्ध वीरों की स्मृति में स्थापित पहला और एकमात्र ऐसा स्मारक है, जिसके शीर्ष पर 52 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित है। आर्मी हेरिटेज म्यूजियम का पुनर्गठन एवं आधुनिकीकरण किया गया, जो हिमाचल प्रदेश के सर्वाधिक रेटिंग वाले संग्रहालयों में उभरा। इसमें नई अन्नाडेल गैलरी तथा एआर-वीआर एक्सपीरियंस सेंटर स्थापित किए गए। 13,675 सदस्यीय पूर्व सैनिक समुदाय के कल्याण के लिए शिमला सीएसडी कैंटीन का जीर्णोद्धार, हमीरपुर सीएसडी कैंटीन का स्थानांतरण तथा शिमला ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक को मिलिट्री हॉस्पिटल शिमला में स्थानांतरित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए गए। सैन्य एवं नागरिक समन्वय को बढ़ावा देने के लिए आर्मी डे रन, कारगिल विजय दिवस समारोह का गैटी थिएटर में आयोजन, पूर्व सैनिकों को ‘योद्धा सम्मान’ के तहत नकद पुरस्कार तथा राज्य पुलिसकर्मियों सहित दस नागरिकों को जीओसी-इन-सी कमेंडेशन प्रदान किए गए।
उनके कार्यकाल के दौरान लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन 2026, भविष्य के लिए भारतीय सेना को तैयार करने हेतु इंडियन आर्मी फ्यूचर्स ट्रेनिंग कमांड IAFTC की परिकल्पना, नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को आत्मसात करने तथा योग्यता एवं मेरिट की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए व्यापक एग्जाम सेल सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी आगे बढ़ाए गए।
28 अगस्त 2026 को आर्मी कमांडर ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आर्मी ट्रेनिंग कमांड के सभी अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने एआरटीआरएसी को बहु-क्षेत्रीय युद्धक तैयारी के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में परिवर्तित करने तथा 21वीं सदी के युद्धक्षेत्र के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। विश्वभर में बदलते संघर्षों तथा पश्चिमी और उत्तरी दोनों सीमाओं पर उभरते खतरों के संदर्भ में उन्होंने पूर्ण-स्पेक्ट्रम युद्धक तैयारी, तीव्र गति से प्रौद्योगिकी को आत्मसात करने तथा सशक्त, सक्षम, लचीले और चुस्त कनिष्ठ नेतृत्व पर बल दिया। उन्होंने ‘प्रक्रिया-उन्मुखता’ से ‘परिणाम एवं क्षमता-उन्मुखता’ की ओर संस्थागत बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए इंडियन आर्मी फ्यूचर्स ट्रेनिंग कमांड IAFTC की स्थापना की पुरजोर वकालत की। इसका उद्देश्य एक सक्रिय, अनुकूलनशील और प्रौद्योगिकी-सक्षम सेना का निर्माण करना है। उन्होंने दोहराया कि प्रत्येक संस्थागत प्रयास के केंद्र में सैनिक ही होना चाहिए। उन्होंने सभी रैंकों का आह्वान किया कि वे ‘शून्य-त्रुटि मानसिकता’ से बाहर निकलें, समावेशी नेतृत्व को बढ़ावा दें तथा भविष्य की सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्था और परिचालन तैयारियों के लिए उच्च मानदंड स्थापित करते रहें।
‘The Scinde Horse’ के प्रथम लेफ्टिनेंट जनरल।
लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा अपनी रेजिमेंट ‘The Scinde Horse’ के प्रथम लेफ्टिनेंट जनरल एवं आर्मी कमांडर हैं तथा इस रेजिमेंट के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारी भी रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पिछले पांच वर्षों के दौरान उन्हें भारतीय सेना की 12 गौरवशाली आर्मर्ड रेजिमेंटों का कर्नल नियुक्त किया गया। इनमें 4 हॉर्स (हॉडसन हॉर्स), 14 हॉर्स (The Scinde Horse), 20 लांसर्स, 42 आर्मर्ड रेजिमेंट, 46 आर्मर्ड रेजिमेंट, 54 आर्मर्ड रेजिमेंट, 63 कैवेलरी, 67 आर्मर्ड रेजिमेंट, 70 आर्मर्ड रेजिमेंट, 81 आर्मर्ड रेजिमेंट, 84 आर्मर्ड रेजिमेंट और 88 आर्मर्ड रेजिमेंट शामिल हैं। सेवानिवृत्ति के साथ वे इन सभी प्रतिष्ठित रेजिमेंटों की कर्नलशिप से मुक्त हो रहे हैं, जिन्हें पिछले पांच वर्षों में मार्गदर्शन एवं नेतृत्व प्रदान करने का उन्हें गौरव प्राप्त हुआ।
सेवानिवृत्ति के अवसर पर श्रद्धांजलि एवं गार्ड ऑफ ऑनर।
31 अगस्त 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने अन्नाडेल स्थित ‘श्रद्धांजलि स्थल’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कर्तव्य की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके पश्चात अन्नाडेल में 111 इन्फैंट्री बटालियन टेरिटोरियल आर्मी (कुमाऊं) की सम्मान गार्ड द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
एक उत्कृष्ट पेशेवर और एक समर्पित सैनिक के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा भारतीय सेना से दूरदर्शी नेतृत्व, संस्थागत सुधार और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की अमिट विरासत छोड़कर सेवानिवृत हुए ।
जन संपर्क(रक्षा) चंडीगढ़







