ब्रिटेन के प्रतिष्ठित चार वर्षीय पीएचडी कार्यक्रम में चयन, 20 शोधार्थियों में सबसे कम उम्र की भाविका
दक्षिण एशिया, भारत और हरियाणा से एकमात्र चयन
चंडीगढ़। पवन चोपडा, हरियाणा की धरती ने शिक्षा, विज्ञान और शोध के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय कराया है। रोहतक से जुड़ी मेधावी छात्रा भाविका सैनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी की पुत्री भाविका सैनी का चयन ब्रिटेन के प्रतिष्ठित चार वर्षीय संरचित पीएचडी कार्यक्रम के लिए हुआ है। इस उपलब्धि के साथ भाविका न केवल अपने परिवार, बल्कि हरियाणा और भारत के लिए भी गौरव का विषय बनी हैं।
विशेष बात यह है कि प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए चयनित 20 शोधार्थियों के समूह में भाविका सैनी सबसे कम उम्र की शोधार्थी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दक्षिण एशिया, भारत और हरियाणा से इस कार्यक्रम के लिए चयनित वह एकमात्र शोधार्थी हैं। छोटी उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धात्मक शोध कार्यक्रम में स्थान बनाना भाविका की शैक्षणिक प्रतिभा, मेहनत और पर्यावरण विज्ञान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
*पिता वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी के लिए गौरव का क्षण*
भाविका की इस उपलब्धि से वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी और उनका पूरा परिवार बेहद उत्साहित है। पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय मनबीर सैनी ने अपनी कर्मभूमि में अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं और सामाजिक सरोकारों को पत्रकारिता के माध्यम से सामने रखा है। अब उनकी पुत्री ने शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
एक पत्रकार पिता के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है कि उनकी बेटी ने उस क्षेत्र को अपना शोध विषय बनाया है, जिसका सीधा संबंध समाज, मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से है। भाविका ब्रिटेन में पीएम 2.5 और वायु प्रदूषण से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं पर शोध करेंगी। ऐसे समय में जब वायु प्रदूषण पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बना हुआ है, भाविका का इस विषय पर उच्चस्तरीय शोध के लिए चयन विशेष महत्व रखता है।
मनबीर सैनी के परिवार के लिए यह केवल बेटी के विदेश जाने या किसी प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाने की खुशी नहीं है, बल्कि यह उस शैक्षणिक यात्रा की सफलता है, जिसमें वर्षों की मेहनत, अनुशासन और परिवार के संस्कार शामिल हैं।
*पीएम 2.5 और वायु प्रदूषण पर करेंगी शोध*
ब्रिटेन पहुंच चुकी भाविका सैनी अब अपने चार वर्षीय पीएचडी कार्यक्रम के दौरान वायु प्रदूषण और पीएम 2.5 से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन करेंगी। उनका शोध मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर वायु प्रदूषण के प्रभावों को समझने की दिशा में केंद्रित रहेगा।
पीएम 2.5 बेहद सूक्ष्म प्रदूषक कण होते हैं, जो हवा की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। सांस से शरीर में प्रवेश करने वाले इन कणों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर दुनिया भर में वैज्ञानिक शोध हो रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध कार्यक्रम में भाविका का चयन उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और अवसर दोनों है।
*बर्मिंघम और ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं का मिलेगा मार्गदर्शन*
भाविका को इस शोध यात्रा के दौरान ब्रिटेन के प्रतिष्ठित बर्मिंघम विश्वविद्यालय और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से जुड़े ख्यातिप्राप्त शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन में काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों, अंतरराष्ट्रीय शोध दृष्टिकोण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बहुआयामी अध्ययन का अनुभव प्राप्त होगा।
चार वर्ष का यह संरचित पीएचडी कार्यक्रम भाविका के अकादमिक जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। शुक्रवार को उनके बर्मिंघम पहुंचने के बाद अब सोमवार से उनके शोध जीवन के इस नए अध्याय की औपचारिक शुरुआत होगी।
आईआईएसईआर भोपाल से शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय शोध यात्रा
भाविका ने इसी वर्ष जुलाई में प्रतिष्ठित आईआईएसईआर भोपाल से पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान में बीएस-एमएस की डिग्री हासिल की है। अध्ययन के दौरान उन्होंने पर्यावरण और पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में विशेष रुचि दिखाई और शोध आधारित शिक्षा के प्रति अपनी क्षमता विकसित की।
उनकी शैक्षणिक यात्रा में राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा में समुद्री जीवन से संबंधित विशेष अध्ययन भी महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। पृथ्वी विज्ञान, पर्यावरण और समुद्री जीवन जैसे अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े विषयों का अध्ययन भाविका की वैज्ञानिक समझ के व्यापक दायरे को दर्शाता है।
*छात्रवृत्ति और उपलब्धियों से भरी रही यात्रा*
मेधावी छात्रा भाविका की अब तक की शैक्षणिक यात्रा उपलब्धियों से भरी रही है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई। लगातार बेहतर अकादमिक प्रदर्शन और शोध के प्रति रुचि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम तक पहुंचाया।
उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि यदि विद्यार्थी को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिले और वह निरंतर मेहनत करता रहे तो छोटे शहर और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
*रोहतक की बेटी, ब्रिटेन में हरियाणा का मान*
भाविका की शैक्षणिक यात्रा की जड़ें हरियाणा के रोहतक से जुड़ी हैं। रोहतक की धरती से निकलकर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित शोध कार्यक्रम तक पहुंचना हरियाणा के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी उपलब्धि विशेष रूप से उन छात्राओं के लिए प्रेरणादायक है, जो विज्ञान और शोध के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
हरियाणा की बेटियों ने खेल, शिक्षा, प्रशासन और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अब भाविका सैनी का नाम वैज्ञानिक शोध के अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रदेश की प्रतिभाओं की इस सूची में जुड़ता दिखाई दे रहा है।
*मनबीर सैनी के लिए बेटी की सफलता बनी उपलब्धि का नया अध्याय*
वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी की पत्रकारिता यात्रा सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों से जुड़ी रही है। उनकी पुत्री भाविका का पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचना परिवार की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जोड़ता है।
पत्रकारिता समाज की समस्याओं को सामने लाने का माध्यम है, वहीं वैज्ञानिक शोध उन समस्याओं के समाधान की दिशा तलाशता है। इस लिहाज से मनबीर सैनी की पत्रकारिता यात्रा और भाविका का वैज्ञानिक शोध अपने-अपने क्षेत्रों में समाज से जुड़े सरोकारों को सामने लाने वाली दो अलग लेकिन महत्वपूर्ण दिशाएं कही जा सकती हैं।
*हरियाणा की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा*
भाविका सैनी की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है। यह हरियाणा के उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी सफलता बताती है कि प्रतिभा को सही दिशा, मेहनत और अवसर मिले तो वह अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती है।
ब्रिटेन में भाविका की चार वर्षीय शोध यात्रा अब शुरू हो चुकी है। आने वाले वर्षों में पीएम 2.5, वायु प्रदूषण, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य से जुड़े उनके शोध के परिणाम वैज्ञानिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी के परिवार के लिए यह निश्चित रूप से गर्व और खुशी का क्षण है। वहीं हरियाणा के लिए यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की बेटियां आज वैश्विक अकादमिक और वैज्ञानिक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रोहतक से शुरू हुआ भाविका सैनी का सफर अब बर्मिंघम तक पहुंच चुका है और यह अंतरराष्ट्रीय उड़ान आने वाले वर्षों में नई उपलब्धियों का आधार बनने की उम्मीद जगाती है।









