Jaipur: राज्य सरकार (State Government) प्रशासन गांवों और शहरों के संग अभियान चला रही है, लेकिन इस अभियान का लाभ सभी दिव्यांगों को नहीं मिल पा रहा है. सामाजिक न्याय विभाग की उदासीनता के चलते दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं (Government schemes) से लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं.
अभियान पर उठने लगे बडे़ सवाल
राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने प्रशासन गांवों और शहरों के संग अभियान की शुरूआत इसलिए की, ताकि पीड़ित व्यक्तियों को उनका कहा मिल सके. सरकारी योजनाओं में सालों से लंबित पड़े मामलों का निपटारा हो सके. लेकिन इस अभियान की शुरूआत होते ही सवाल उठने लगे है और ये सवाल दिव्यांगों के हितों से जुडे है.
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (Social Justice & Empowerment Department) 21 श्रेणियों की बजाय सिर्फ 8 तरह के ही दिव्यांगता को ही वरीयता रहा है. जबकि केंद्र सरकार (Central Government) ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुसार दिव्यांग जनों की 21 श्रेणियां है. ऐसे में 13 तरह के ही दिव्यांगता वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. पूरे मामले पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता डायरेक्टर ओपी बुनकर ने चुप्पी साध ली.
इन श्रेणियों में ही मिल रहा लाभ
प्रशासन गांवों और शहरों के संग अभियान (Prashasan Shehro Sang Abhiyan) में सामाजिक न्याय विभाग को सभी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में स्वीकृतियां, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, पालनहार योजना, सुखद दाम्पत्य योजना में स्वीकृतियां देना है. जिसमें 8 श्रेणी के दिव्यांग जनों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है. उसमें अंधता, कम द्रृष्टि, कुष्ठ रोग मुक्त, श्रवण शक्ति का हा्स, चलन निशक्तता, मानसिक मंदता, मानसिक रुग्णता, और बोनापन शामिल है. इसके अलावा दिव्यांग पेंशनर्स और उनके परिवारजनों को बीपीएल की तरह सभी सुविधाएं दी जाएंगी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से यह बजट घोषणा भी राज्य में अभी तक लागू नहीं हुई है.
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ऐसे में यह कहा जा सकता है कि लाखों दिव्यांगजनों को तो सरकारी योजना का लाभ ही नहीं मिल रहा है. 5 साल बाद भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग 21 श्रेणियों के दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दे पा रहा है.








