हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान द्वारा, रझाना पंचायत, जिला शिमला में बाँस पौधरोपण और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर मनाया अमृत महोत्सव देश आज़ादी की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है इस उपलक्ष्य पर देश भर में आज़ादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम हो रहें है । इसी कड़ी में हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा 17 जनवरी, 2022 को रझाना पंचायत, ज़िला शिमला के बड़ागाँव और पट्टी गाँव में बाँस पौधरोपण और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमे संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, स्टाफ एवं रझाना पंचायत के ग्रामीणों सहित 60 लोगों ने भाग लिया । इस कार्यक्रम के दौरान बड़ागाँव और पट्टी गाँव के समीप नाले किनारे 300 बाँस पौधों का पौधरोपण किया गया । डॉ. जगदीश सिंह, वैज्ञानिक-एफ, प्रभागाध्यक्ष, विस्तार प्रभाग ने डॉ॰ एस॰ एस॰ सामंत, निदेशक हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, श्रीमती रीना ठाकुर, प्रधान, श्री मुकुन्द मोहन शांडिल उप प्रधान, वार्ड सदस्यों सहित सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया एवं अमृत महोत्सव के महत्व और इस कार्यक्रम का उद्देश्य बताया । डॉ॰ सिंह ने बताया कि बाँस ग्रामीणों की आजीविका में महतवपूर्ण योगदान देता है । डॉ॰ सामंत बताया कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय बाँस मिशन योजना की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य गैर-वन सरकारी और निजी भूमि में बाँस रोपण के तहत वन क्षेत्र को बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीणों की
आजीविका में बढ़ोतरी करना है । बाँस का पौधरोपण किसानों के खेतों, घरों, सामुदायिक भूमि, बंजर भूमि और नालों के आसपास किया जा सकता है । डॉ। संदीप शर्मा, ने बताया कि बांस पौधों का एक बहुमुखी समूह है, जो पारिस्थितिक प्रदान करने में सक्षम है तथा लोगों को आर्थिक और आजीविका सुरक्षा भी प्रदान कर सकता हैं । भारत में बाँस की 136 प्रजातियां हैं, जिसमें से 125 स्वदेशी और 11 विदेशी हैं । भारत में बांस और रतन का उद्योग 28,005 करोड़ रुपये का है ।
डॉ. जगदीश सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय बाँस मिशन के तहत बाँस तकनीकी सहायता समूह (बीटीएसजी) नामक राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी कि स्थापना की है । जिसका मुख्य उद्देशय; मिशन को आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करना तथा क्षेत्र के लिए बांस की उपयुक्त प्रजातियों की सिफारिश करना एवं सलाह देना है । वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून भी तकनीकी सहायता समूह का हिस्सा है । हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला इसी परिषद का संस्थान है, जो बाँस मिशन के लिए कार्य कर रहा है । डॉ॰ सिंह ने बताया कि बाँस पौधरोपण से भूक्षरण कि रोकथाम होगी और ग्रामीणों के लिए चारा भी उपलब्ध होगा । उन्होनें बताया संस्थान बांस की नर्सरी बीड प्लासी नालागढ़ में तैयार की है, अगर, ग्रामीण अपने खेत के आसपास बांस पौधरोपण करना चाहते हैं है, तो वहाँ से बाँस के पौधे ले सकते हैं । डॉ॰ अश्वनी तपवाल, ने बाँस की नर्सरी एवं पौधरोपण पर जानकारी सांझा की । डॉ॰ राजकुमार वर्मा, वैज्ञानिक-जी नें बाँस के पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डाला । रीना ठाकुर, प्रधान रझाना पंचायत ने ने संस्थान के निदेशक एवं डॉ॰ जगदीश सिंह, का उनकी पंचायत में बाँस पौधरोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम करवाने के लिए धन्यवाद दिया । श्री मुकुन्द मोहन उप प्रधान ने कहा कि उन्होनें संस्थान से रझाना पंचायत में नाले किनारे बाँस पौधरोपण का आग्रह किया था, संस्थान द्वारा उनका आग्रह स्वीकार करने और बाँस पौधरोपण हेतु उन्होनें संस्थान का धन्यवाद किया ।



