सबकी खबर , पैनी नज़र

September 21, 2026 10:09 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

September 21, 2026 10:09 pm

जी.सी. गड़ागुसैंन में बी.कॉम. स्ट्रीम बंद करना और अधूरी आधारभूत सुविधाएँ छात्रों के भविष्य पर हमला

दिनांक: 09 जून 2026, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय महाविद्यालय गड़ागुसैंन में बी.कॉम. स्ट्रीम को समाप्त करने के फैसले की कड़ी निंदा करती है। सरकार इस निर्णय को कम नामांकन का हवाला देकर सही ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि वर्षों से कॉलेज में आवश्यक सुविधाओं, शिक्षकों और आधारभूत ढांचे की भारी कमी रही है।
गड़ागुसैंन प्रदेश के दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बाहर जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे क्षेत्र में यह कॉलेज उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके बावजूद सरकार ने शिक्षा को मजबूत करने के बजाय पाठ्यक्रमों को बंद करने का रास्ता चुना है।
वर्ष 2018 के बाद कॉलेज भवन के निर्माण कार्य को आज तक पूरा नहीं किया गया है। पर्याप्त कक्षाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव ने विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का माहौल कमजोर किया है। साथ ही लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े रहे हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई और ड्रॉपआउट दर में वृद्धि हुई। सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए अब कम नामांकन को आधार बनाकर स्ट्रीम बंद कर रही है।
SFI का मानना है कि नामांकन में कमी का कारण विद्यार्थियों की रुचि का अभाव नहीं, बल्कि सरकार द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों की लगातार उपेक्षा है। पहले सुविधाएँ खत्म करो, शिक्षकों की नियुक्तियाँ न करो, भवन अधूरे छोड़ दो और फिर कम नामांकन का हवाला देकर पाठ्यक्रम बंद कर दो—यह शिक्षा के निजीकरण और सरकारी संस्थानों को कमजोर करने की नीति का हिस्सा है।
SFI राज्य कमेटी मांग करती है कि:
1. जी.सी. गड़ागुसैंन में बी.कॉम. स्ट्रीम को तत्काल बहाल किया जाए।
2. वर्ष 2018 से लंबित भवन निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए।
3. कॉलेज में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सभी रिक्त पद भरे जाएँ।
4. विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
5. ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के उच्च शिक्षा संस्थानों को बंद करने के बजाय उन्हें सशक्त बनाया जाए।
यदि सरकार ने इस जनविरोधी निर्णय को वापस नहीं लिया तो SFI प्रदेशभर में विद्यार्थियों को संगठित कर व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।