शील गांव, सुणाणी गांव, खाली गांव, माजरी गांव पूरी तरह से नेस्ते नाबूत हो गए। पहाड़ों के शिखर से मलवा, पत्थर घरों को तोड़ता हुआ, मिट्टी में मिलाता हुआ नदी तक पहुंच गया। इसमें लगभग 60 घर पूरी तरह तबाह हो गए, 600 बीघा लहलहाती फसलों समेत जमीने समाप्त हो गई और लोग शरणार्थी की स्थिति में धार्मिक स्थलों में आश्रय लिये हुए हैं। उन परिवारों से भी मिलना हुआ और उनकी व्यथा सुनी। इन परिवारों के पुनर्वसन का एकमात्र उपाय है कि सरकार इन्हें किसी अन्यत्र स्थान पर जितनी भूमि इनकी समाप्त हुई है, उतनी भूमि देते हुए आर्थिक सहायता करे ताकि इनका जीवन दोबारा से बस सके। इस अभियान में पूर्व मंत्री एवं प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डाॅ0 राजीव सैजल, पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी, पूर्व विधायक श्रीमती विनोद चंदेल व अन्य श्रेष्ठ लोग साथ थे।
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