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March 10, 2026 8:51 am

dna analysis of lakhimpur-kheri violence, ajay mishra teni replied, rakesh tikait mediator | लखीमपुर खीरी हिंसा में हुई मौतों का जिम्मेदार कौन? सियासत के बीच ये रहे तीन अलग-अलग पक्ष

नई दिल्ली: डीएनए (DNA) में बात उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की जहां आपको लखीमपुर खीरी (Lakhimpur-Kheri) में पक रही राजनैतिक खीर के बारे में बताते हैं. ये खीर इतनी स्वादिष्ट है कि हर पार्टी का नेता इसे खाना चाहता है. इसमें इंसानों का खून मिला है जिसे नफरत की भट्टी पर पकाया गया. इस कहानी में कई ट्विस्ट है जिनका इस्तेमाल लोग अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं. कोई इसे राजनैतिक रंग देना चाहता है तो कोई इसके नाम पर माहौल खराब करना चाहता है. वहीं कुछ लोग चाहचे हैं कि ये घटना प्रशासन और किसानों के बीच नए संघर्ष में बदल जाए.

लखीमपुर की लड़ाई क्या राजनैतिक पर्यटन?

एक गाड़ी चार प्रदर्शकारियों को कुचल देती है और उसके बाद प्रदर्शनकारी गाड़ी के ड्राइवर समेत तीन लोगों को पीट पीटकर मार डालते हैं. उपद्रवी इतने क्रूर थे कि इन्होंने एक पत्रकार की भी हत्या कर दी. ये लोग खुद को किसान कह रहे हैं लेकिन हमें लगता है कि इन्हें किसान कहना बेइमानी होगा. लखीमपुर की लड़ाई अब राजनैतिक पर्यटन में बदल गई है. हर नेता लखीमपुर खीरी जाकर अपने लिए वोट निकालना चाहता है.

कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के कई नाटकीय वीडियो ट्रेंड कर रहे हैं. सबसे दर्दनाक वीडियो वो है जिसमें आप देख पाएंगे कि प्रदर्शनकारियों ने कितनी बेदर्दी से गाड़ी के ड्राइवर की हत्या की. ये प्रदर्शन यूं तो लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर होते हैं. लेकिन जो न्यूज़ चैनल इन पर सवाल उठाते हैं, ये लोग उनके रिपोर्टर्स के खून के प्यासे हो जाते हैं और इस लखीमपुर के वाकये में हमारे रिपोर्टर की जान भी मुश्किल से बची. इस पूरी घटना के सच्चे विश्लेषण के दौरान अब आपको ये बताते हैं कि ये हिंसा हुई कैसे.

कैसे हुई ये हिंसा

इस हिंसा की मूल जड़ में 25 सितम्बर को हुई एक घटना है. दरअसल, 25 सितंबर को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी (Ajay Mishra Teni) अपने संसदीय क्षेत्र लखीमपुर खीरी में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. इस दौरान यहां किसान यूनियन के कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए. जिससे नाराज होकर उन्होंने मंच से ये कह दिया कि वो विरोध कर रहे इन लोगों को जानते हैं और उन्हें 2 मिनट में सुधार सकते हैं. इसी के बाद लखीमपुर खीरी में किसानों का एक गुट, जिसमें समाजवादी पार्टी के भी कुछ नेता बताए जा रहे हैं, उन्होंने उनका विरोध शुरू कर दिया. और कल फिर वहां हिंसा हो गई. 

अजय मिश्रा टेनी के इसी बयान के विरोध में किसान यूनियन और इलाक़े के कुछ नेताओं ने ये ऐलान किया था कि वो 3 अक्टूबर यानी कल उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का लखीमपुर खीरी आने पर विरोध करेंगे. इसी के बाद उन्होंने कल उस हेलीपैड को अपने कब्ज़े में ले लिया, जहां उप मुख्यमंत्री का हेलिकॉप्टर उतरना था. इसी जगह पर फिर बाद में हिंसा भी हुई. हमें पता चला है कि जो लोग केशव प्रसाद मौर्य को काले झंडे दिखाना चाहते थे, उनमें समाजवादी पार्टी के भी कुछ नेता हैं और इन लोगों ने हिंसा से कुछ देर पहले उन्हें और सांसद अजय मिश्रा टेनी को धमकी भी दी थी. 

विरोध की वजह से ही केशव प्रसाद मौर्य हेलिकॉप्टर की जगह सड़क के रास्ते लखीमपुर खीरी पहुंचे और कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उनके साथ अजय मिश्रा टेनी भी थे इस समय तक वहां हिंसा नहीं हुई थी. लेकिन कुछ देर बाद खबर आई कि जहां हेलीपैड बनाया गया है, वहां किसानों ने गाड़ियों को आग लगा दी है और कई लोग इसमें मारे गए हैं. इस खबर के बाद वहां और लोग इकट्ठा हो गए.

हिंसा के तीन अलग-अलग पक्ष

हालांकि हिंसा कैसे हुई, इसके तीन अलग अलग पक्ष हैं. एक पक्ष ये है कि कार्यक्रम के दौरान अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू मिश्रा 3 गाड़ियों के साथ केशव प्रसाद मौर्य को रिसीव करने निकले थे. इस दौरान उनकी गाड़ी ने सड़क घेर कर खड़े किसानों को कुचल दिया. आरोप है कि उनकी गाड़ी 100 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड में थी, जिसकी वजह से दो गाड़ियां वहां पलट गईं और उनके भी कुछ लोग मर गए.

दूसरा पक्ष ये है कि जिन गाड़ियों से किसानों को कुचला गया, वो आशीष मिश्रा नहीं बल्कि उनके ड्राइवर हरिओम मिश्रा चला रहे थे, जिनकी किसानों ने पीट पीट कर हत्या कर दी. खुद को किसान कहने वाले इन लोगों ने बीजेपी के दो और कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या कर दी.

और

तीसरी पक्ष ये है कि जब केशव प्रसाद मौर्य को रिसीव करने के लिए बीजेपी की ये गाडियां जा रही थीं, तब कुछ किसानों ने इन पर पथराव कर दिया और इससे घबरा कर भागने के चक्कर में ये घटना हुई, जिसकी पुलिस ने भी आशंका जताई है. इस हिंसा के जितने भी वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें प्रदर्शनकारी हिंसा और आगजनी करते हुए दिख रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ की पड़ताल

हमारी टीम ने जब इन सभी वीडियो (Videos) को ध्यान से सुना और इनकी जांच की तो पाया कि गाड़ियां तेज स्पीड की वजह से नहीं पलटी थीं, जैसा कि दावा किया जा रहा है. बल्कि इन गाड़ियों को कुछ किसानों ने पलट कर उनमें आग लगाई थी. इसके अलावा गाड़ी में बैठे बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ भी वहां मारपीट करते हुए कुछ लोगों को देखा गया. इनमें से ज्यादातर लोग यही कह रहे थे कि कोई भी जिंदा नहीं बचना चाहिए. अब सवाल है कि क्या पीट पीट कर लोगों की हत्या करने वाले ये किसान हो सकते हैं?

राजनीति की भट्टी में वोटों की मिठास!

लखीमपुर खीरी में इस समय राजनीति की भट्टी पर ऐसी खीर पक रही है, जिसमें वोटों की मिठास है. और इस खीर को सब खाना चाहते हैं. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव, मायावती, प्रियंका गांधी, राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी और ममता बनर्जी की पार्टी के पांच नेताओं ने आज लखीमपुर खीरी जाने की कोशिश की. हालांकि वहां धारा 144 लागू होने की वजह से उन्हें पहले ही रोक दिया गया.

लखीमपुर खीरी, क्षेत्रफल के मामले में उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा ज़िला है. लेकिन अब ये यूपी का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल भी बन सकता है. सारे विपक्षी नेता वहां जाकर हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के साथ सेल्फी खिंचावाने के लिए बेताब हैं. प्रियंका गांधी तो लखीमपुर खीरी जाने के लिए दिल्ली से लखनऊ पहुंच गई और उन्होंने पुलिस को चकमा देकर सीतापुर जिले से वहां जाने की भी कोशिश की, हालांकि जब उन्हें हिरासत में ले लिया गया तो काफी हंगामा हुआ.

पुलिस ने जब प्रियंका गांधी के काफिले को रोका तो एक फिल्म की शूटिंग की तरह ही वहां कई कैमरे चालू हो गए और प्रियंका गांधी ने लोकतंत्र और संविधान के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करनी शुरू कर दी. ठीक वैसे ही जैसे कोई अभिनेता या अभिनेत्री लाइट कैमरा ऐक्शन के बाद अपने डायलॉग कहना शुरू करता है. प्रियंका गांधी ने पुलिस पर बदसलूकी का भी आरोप लगाया, जबकि कुछ तस्वीरों में वो खुद महिलाओं पुलिसकर्मियों को धक्का देती नज़र आ रही हैं.

हिरासत में प्रियंका गांधी को सीतापुर के जिस गेस्ट हाउस में रखा गया, वहां से उनका झाड़ू लगाते हुए एक वीडियो भी सामने आया, जिसे कांग्रेस ने ये कहते हुए सोशल मीडिया पर डाला कि प्रियंका गांधी किसानों के साथ खड़ी हैं. लेकिन हमें लगता है कि ये सारी कोशिशें यूपी चुनाव में वोट पाने के लिए हो रही हैं, और लखीमपुर खीरी को इसका आधार बनाया जा रहा है.

रॉबर्ट वाड्रा ने किया बचाव 

प्रियंका गांधी को पुलिस हिरासत में लेने पर रॉबर्ट वाड्रा ने भी उनका बचाव किया है और कहा है कि वो पीड़ित परिवारों से मिले बिना वापस नहीं आएंगी. लखीमपुर खीरी में आज नहीं तो कल राजनीति का मेला लगने वाला है. अखिलेश यादव ने भी आज लखीमपुर खीरी जाने की कोशिश की लेकिन उन्हें लखनऊ में उनके घर के बाहर से ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया. दिलचस्प ये कि पहले उनके घर के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठा हुई, फिर अखिलेश यादव ने लंबा चौड़ा भाषण दिया और जब उन्हें मीडिया की अच्छी खासी कवरेज मिली. फिर वो पुलिस के साथ चलने के लिए तैयार हुए. 

राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी ने तो फिल्मी अंदाज में हापुड़ में पुलिस बैरिकेड को ही उड़ा दिया. इसके बाद उनके समर्थक Toll Plaza से भागते हुए नज़र आए. आप भी उनका ये वीडियो देखिए

याद कीजिए हाथरस की वो घटना

आपको याद होगा जब पिछले साल उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की के साथ रेप की वारदात हुई थी. तब भी नेताओं के बीच वहां जाने की होड़ मच गई थी. तब भी ये नेता किसी भी कीमत पर वहां पहुंचना चाहते थे.

राकेश टिकैत की मौजूदगी 

इस खबर से जुड़ा एक और पहलू ये है कि किसान नेता राकेश टिकैत ने अब किसान आंदोलन पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है. हमारा मानना ये है कि ये आंदोलन अब किसानों का है ही नहीं. किसान नेता राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी जाकर प्रशासन के साथ समझौता किया. उनका कोई रोल नहीं था लेकिन वो लखीमपुर खीरी पहुंचे फिर वहां पर उन्होंने ही प्रशासन के साथ शर्तों पर सहमति बना कर विवाद को खत्म कराया.

किसान आंदोलन की शुरुआत पिछले साल अगस्त में पंजाब से हुई थी. सिंघु बॉर्डर पर आन्दोलन कर रहे ज्यादातर किसान भी पंजाब से हैं. लेकिन एक साल बाद इस आंदोलन में पंजाब के किसान पीछे रह गए और राकेश टिकैत ने इसे अपने कब्जे में ले लिया है. हैरानी की बात ये कि इस समय आंदोलन से जुड़े ज़्यादातर फैसले वही ले रहे हैं और इस हिंसा के बाद भी समझौता करने वालों में उन्हीं का नाम है.

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