हिमाचल को 90:10 फंडिंग का बड़ा लाभ, पहाड़ी राज्यों के विकास को गति देगी केंद्र की योजना*
*वीबी–जी राम जी योजना से हिमाचल के गांवों को मिलेगा नया जीवन, 125 दिन की रोजगार गारंटी से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर*
*वीबी–जी राम जी योजना ग्रामीण भारत के लिए नया युग, रोजगार को विकास से जोड़ने का ऐतिहासिक कदम*
शिमला : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए एक दूरदर्शी, पारदर्शी और विकासोन्मुखी व्यवस्था लागू की है। संसद के शीतकालीन सत्र में पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – वीबी–जी राम जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में वीबी–जी राम जी योजना पर आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने कहा कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार को स्थायी ग्रामीण विकास, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जोड़ने का एक ठोस और परिणामोन्मुखी मॉडल है। इससे गांवों में टिकाऊ विकास सुनिश्चित होगा और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से विभिन्न सरकारों ने ग्रामीण रोजगार के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। वर्ष 1960–61 में रूरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर 2005 में मनरेगा तक अनेक प्रयास हुए। मनरेगा लगभग दो दशकों तक लागू रही, लेकिन बदलती सामाजिक–आर्थिक परिस्थितियों और जमीनी अनुभवों के आधार पर एक नई, अधिक प्रभावी और विकास आधारित योजना की आवश्यकता थी, जिसके परिणामस्वरूप वीबी–जी राम जी अधिनियम अस्तित्व में आया।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मनरेगा में 100 दिन की रोजगार गारंटी का प्रावधान था, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। इसके विपरीत वीबी–जी राम जी योजना में 125 दिन की कानूनी गारंटी दी गई है, जो सीधे विकास परियोजनाओं से जुड़ी होगी। इस योजना के तहत ग्राम सभा स्तर पर गांव का विकास प्लान तैयार होगा, जो ब्लॉक और जिला स्तर से होते हुए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा। उसी विकास प्लान के क्रियान्वयन से रोजगार सृजन होगा और गांव का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।
रेखा वर्मा ने कहा कि यह योजना पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मल्टी–लेवल मॉनिटरिंग, छह माह में समीक्षा और समयबद्ध भुगतान जैसी व्यवस्थाएं इसमें शामिल हैं। यदि समय पर रोजगार या भुगतान नहीं होता है, तो मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही तय होगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस फंडिंग पैटर्न को लेकर जानबूझकर भ्रम फैला रही है, जबकि सच्चाई यह है कि हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र–राज्य का अनुपात 90:10 रखा गया है, जो प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी है। अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 है। यह केंद्र सरकार की पहाड़ी राज्यों के प्रति संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
रेखा वर्मा ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण रोजगार योजनाओं पर अपेक्षाकृत सीमित निवेश हुआ, जबकि मोदी सरकार के दौरान निवेश, परिसंपत्ति निर्माण और कार्य निष्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है। हिमाचल प्रदेश में भी मोदी सरकार के कार्यकाल में रोजगार सृजन दोगुना हुआ है, जो केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि वीबी–जी राम जी योजना के अंतर्गत लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह योजना चार प्रमुख क्षेत्रों—ग्रामीण आधारभूत ढांचा, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका—पर केंद्रित है। योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय को भी बढ़ाया गया है, ताकि निगरानी और ऑडिट व्यवस्था मजबूत हो सके।
अंत में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने कहा कि वीबी–जी राम जी योजना किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित नहीं है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यदि प्रदेश सरकार अपना अंश समय पर नहीं देती है, तो यह उसकी ग्रामीण विकास के प्रति उदासीनता को दर्शाएगा। भाजपा इस योजना को घर–घर तक पहुंचाने के लिए कार्यशालाओं, मंडल और बूथ स्तर तक जागरूकता अभियान चलाएगी और ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण के लिए पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।








