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March 4, 2026 8:47 am

‘हर काम देश के नाम’

भारतीय सेना, हिमाचल प्रदेश सरकार और श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रा. लि. के बीच त्रिपक्षीय समझौता, सीमावर्ती क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती को मिलेगा बढ़ावा
शिमला / चंडीगढ़ : 20 जनवरी 2026 सैन्य–नागरिक सहयोग को सुदृढ़ करने और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय सेना, हिमाचल प्रदेश सरकार और श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रा. लि. ने 19 जनवरी 2026 को शिमला में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के चयनित सीमावर्ती एवं दूरस्थ गांवों में औषधीय और सुगंधित पौधों की बड़े पैमाने पर खेती के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करना है।
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को संरचित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सुनिश्चित खरीद व्यवस्था के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान कर सशक्त बनाना है। यह पहल दूर-दराज के क्षेत्रों में पड़ी अनुपयोगी और अल्प-उपयोगी भूमि को उत्पादक संसाधनों में परिवर्तित करने के साथ-साथ पारंपरिक आयुर्वेदिक एवं स्वदेशी औषधीय पद्धतियों के पुनरुत्थान और संवर्धन की दिशा में भी कार्य करेगी।
समझौते के तहत चयनित गांवों के किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें फसल की खेती, गुणवत्ता नियंत्रण, कटाई के बाद प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन शामिल होगा। श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रा. लि. तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार नीतिगत सहयोग, भूमि स्वीकृति और स्थानीय प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएगी। भारतीय सेना सीमावर्ती क्षेत्रों में समन्वय एवं स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास निर्माण के लिए नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगी।
एमओयू में उत्पादित औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए सुनिश्चित खरीद व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को बाजार से सीधा जुड़ाव मिलेगा। इससे किसानों की आय स्थिर होगी, आर्थिक असुरक्षा में कमी आएगी और दीर्घकालिक सहभागिता को प्रोत्साहन मिलेगा।
आर्थिक लाभों के अतिरिक्त, यह पहल सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने तथा पर्यावरणीय रूप से स्थायी कृषि प्रथाओं को प्रोत्साहित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। यह पहल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समावेशी विकास और जन-केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
यह साझेदारी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक संस्थागत सहयोग के साथ जोड़ने की साझा सोच को प्रतिबिंबित करती है, जिससे सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा और सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन तथा स्थानीय समुदायों के बीच संबंध और अधिक मजबूत होंगे।