शिमला: एसएफआई द्वारा 20 जुलाई से शिमला उपायुक्त कार्यालय के बाहर शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने तथा पेपर लीक के खिलाफ भूख हड़ताल की शुरुआत की है । जिसका आज चौथा दिन जारी हैं । 23/07/2026 को भूख हड़ताल में एसएफआई के कार्यकर्ता अरुण , अंजली भगत, तिजेंदर , दिया और उपेंद्र बैठे हैं।एसएफआई का कहना है कि नीट के पेपर में 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था पेपर लीक होने के बाद 22 छात्रों ने अब तक देश में आत्महत्या की है । जिस पर मोदी सरकार और उनके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कोई भी जबाबदेही नहीं आई है।
जब 21 जून को फिर से नीट का पेपर करवाया गया तों यह सामने आता है कि 22 लाख छात्रों में से सिर्फ 19,99,895 छात्र पेपर दें पाए है और 2,79,848 छात्रों ने परीक्षा नहीं दी । यह मोदी सरकार और NTA की कमियों को उजागर करता है। इसके बाद भी छात्र लगातार दिल्ली के जंतर मंतर पर NTA को बर्खास्त करने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे । परन्तु पिछले कल दिल्ली के अंदर छात्रों के शांतिपूर्ण धरने में केन्द्र सरकार द्वारा दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल करके छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज तथा पथराव किया , बजाय की उनकी मांगों को सुन जाए और उसपर कुछ कार्यवाही करे । दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए इस बर्बर लाठीचार्ज से बहुत से छात्रों और परिजनों को गंभीर चोट आई । एसएफआई भाजपा सरकार की इस कायरतापूर्ण कार्यवाही की कड़े शब्दों में विरोध करती है। और SFI शिमला शहरी कमेटी जंतर मंतर पर छात्रों और जनता के उस आंदोलन का समर्थन करती है और SFI शिमला शहरी कमेटी शिमला के अंदर इस आंदोलन को तब तक लड़ती रहेगी जब तक हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाता।
हमारी प्रमुख मांग निम्न प्रकार से है:-
1) धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
2) NTA को बर्खास्त किया जाए।
3) NEP को रद्द किया जाए।
4) सार्वजनिक शिक्षा के ढ़ाँचे को मजबूत किया जाए।
हमारा मानना है कि NTA को देश की मुख्य प्रतियोगी परीक्षाओं (CUET,UGC net ,JEE, NEET) को करवाने की जिम्मेवारी है जिसमें लाखों लोग हर वर्ष कड़ी मेहनत करके भाग लेते है। लेकिन NTA लगातार विफल हो रहा है और परीक्षाओं को सही तरीके से नहीं करवा पा रहा । 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा को पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद 12 मई 2026 को पूरी तरह रद्द (Cancel) करना पड़ा। परीक्षा से करीब 15 दिन पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम सर्किलों में एक “गेस पेपर” घूम रहा था, जिसके 100 से ज्यादा सवाल हूबहू असली प्रश्नपत्र से मेल खा गए।
इसी प्रकार साल 2024 के नीट परीक्षा के नतीजे आने पर 67 छात्रों को पूरे 720 में से 720 अंक मिले, जिनमें से कई छात्र एक ही परीक्षा केंद्र (झज्जर, हरियाणा) से थे। इसके अलावा कई छात्रों को 718 और 719 अंक मिले, जो परीक्षा के मार्किंग पैटर्न के हिसाब से गणितीय रूप से असंभव थे। जून 2024 में आयोजित हुई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) पेपर लीक होने के कारण परीक्षा को ठीक अगले दिन रद्द करना पड़ा। 2021 में JEE MAINS इंजीनियरिंग के लिए होने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा भी NTA के कार्यकाल में सुरक्षित नहीं रह सकी। कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) होने के बावजूद, रूसी हैकरों की मदद से परीक्षा केंद्रों के सिस्टम को ‘रिमोट एक्सेस’ सॉफ्टवेयर के जरिए हैक कर लिया गया। इस विफलता की सीधी जिम्मेवारी मुख्य रूप से देश के शिक्षा मंत्री और NTA एजेंसी की बनती है जो देश के अंदर इन परीक्षाओं को करवाती है । सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, जिससे छात्रों का भरोसा टूट गया है। इसलिए हम तत्काल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफ़े की मांग करते है। देश की राजधानी दिल्ली में जो छात्र भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन कर रहे है उसका हम खुलेतौर पर समर्थन करते है। इसके साथ साथ सोनम वांगचुक 20 दिन से भूख हड़ताल में बैठे थे उनको दिल्ली पुलिस द्वारा जिस तरह उठाया गया है ये लोकतंत्र में गला घोंटने का काम किया है इसका हम पूरी तरह विरोध करते है यह मोदी सरकार की तानाशाही है इसके खिलाफ छात्र पूरे देश में आंदोलन कर रहा है।
इसके साथ SFI ने कहा कि आज देशभर में परीक्षा घोटालों, पेपर लीक, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण तथा शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अनियमितताओं के विरुद्ध जंतर-मंतर, नई दिल्ली में छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह आंदोलन केवल कुछ परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता का प्रश्न है। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी आवश्यकता है। जंतर-मंतर में चल रहा आंदोलन पूरे देश के विद्यार्थियों की चिंता और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
इसलिए SFI ने पूरे देश में सार्वजनिक शिक्षा को बचाने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के खिलाफ पूरे छात्र समुदाय और युवाओं से संसद मार्च का आह्वान किया था । परंतु आज सुबह यह देखा गया कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से संसद की ओर जा रहें थे उस समय दिल्ली पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया जाता है जिसकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते है। और SFI पेपर लीक के खिलाफ चल रहें आंदोलन का समर्थन करती है। हम हिमाचल प्रदेश के सभी छात्रों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील करती है कि वे देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।







