सोलन, 9 जून,
शूलिनी यूनिवर्सिटी ने 2,000 इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) एप्लीकेशन का आंकड़ा पार करके इनोवेशन डे मनाया। यह उपलब्धि भारत के सबसे सक्रिय यूनिवर्सिटी इनोवेशन इकोसिस्टम में से एक को बनाने के ग्यारह वर्षों के सफर को दर्शाती है। इनोवेशन का यह सफर 2015 में शुरू हुआ था।
सालाना पेटेंट रिपोर्ट पेश करते हुए, शूलिनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स ऑफिस (SIPRO) के डायरेक्टर दिनेश कुमार ने सभी इनोवेटर्स की लगन के लिए उनका धन्यवाद किया और IP इकोसिस्टम बनाने में यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के लगातार सहयोग को सराहा।
रिपोर्ट के अनुसार, शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अब तक 2,000 IP एसेट्स फाइल किए हैं, जिनमें 1,224 यूटिलिटी पेटेंट, 512 डिज़ाइन एप्लीकेशन, 247 कॉपीराइट और 17 ट्रेडमार्क शामिल हैं। इनमें से 989 पेटेंट पब्लिश हो चुके हैं और 656 इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज़ को मंज़ूरी या रजिस्ट्रेशन मिल चुका है। अकेले 2025 में, यूनिवर्सिटी ने 182 पेटेंट एप्लीकेशन, 37 डिज़ाइन एप्लीकेशन और 51 कॉपीराइट एप्लीकेशन फाइल किए; इसी दौरान 180 पेटेंट पब्लिश हुए और आठ पेटेंट मंज़ूर हुए।
इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के प्रमुख इनोवेटर्स को सम्मानित किया गया।2025 में सबसे ज़्यादा पेटेंट फाइल करने वालों में, स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. राज कुमार सैनी ने 17 पेटेंट एप्लीकेशन के साथ पहला स्थान हासिल किया। उनके बाद फैकल्टी ऑफ़ एग्रीकल्चर के डीन प्रो. सोमेश शर्मा रहे, जिन्होंने 15 फाइलिंग कीं। स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड केमिकल साइंसेज के प्रो. पंकज रायज़ादा और स्कूल ऑफ़ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन डॉ. दीपक कुमार ने 12-12 पेटेंट फाइल किए।
स्कूल-वाइज़ कैटेगरी में, ‘स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चर’ 29 पेटेंट एप्लीकेशन के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद ‘स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्युटिकल साइंसेज़’ (23 एप्लीकेशन) और ‘स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी’ (21 एप्लीकेशन) का स्थान रहा। ‘शूलिनी इंस्टीट्यूट ऑफ़ लाइफ़ साइंसेज़ एंड बिज़नेस मैनेजमेंट’ (SILB) की SIPRO IPR लैब के प्रतिनिधियों को विशेष सम्मान दिया गया, जिन्होंने एक साल से भी कम समय में 10 पेटेंट एप्लीकेशन फ़ाइल किए।
इस समारोह का मुख्य आकर्षण यूनिवर्सिटी का ‘वन स्टूडेंट, वन पेटेंट’ अभियान था, जिसके तहत हर स्टूडेंट को पेटेंट-योग्य आइडिया विकसित करने और क्लासरूम से बाहर इनोवेशन में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने ‘वन स्टूडेंट, वन पेटेंट’ अभियान के प्रति यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को दोहराया और स्टूडेंट्स व फैकल्टी से असल दुनिया की चुनौतियों के समाधान खोजने और अपने आइडिया को पेटेंट में बदलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “इनोवेशन हर स्टूडेंट की एकेडमिक यात्रा का एक अहम हिस्सा होना चाहिए।”
प्रो-चांसलर विशाल आनंद ने स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को आत्मविश्वास के साथ अपने आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “इनोवेशन तब फलता-फूलता है जब लोग प्रयोग करने, सीखने और आइडिया को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए तैयार रहते हैं।”
वाइस-चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने इनोवेटर्स की लगन और दृढ़ता की तारीफ़ की और कम्युनिटी के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया — आने वाले वर्षों में 10,000 पेटेंट होने चाहिए
रजिस्ट्रार डॉ. सुनील पुरी ने शूलिनी में पेटेंट से जुड़ी गतिविधियों के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने हमेशा फैकल्टी और रिसर्चर्स को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, “सालों पहले जो विज़न तय किया गया था, वह अब संस्थान की खास ताकतों में से एक बन गया है।”
डायरेक्टर (प्लानिंग) प्रो. जे.एम. जुल्का ने इस उपलब्धि को शानदार बताया और कहा कि एक अच्छे इकोसिस्टम में छोटे-छोटे आइडिया भी आगे चलकर कीमती पेटेंट बन सकते हैं।
SIPRO के सीनियर मैनेजर हिमांशु शर्मा ने आगे की योजना के बारे में बताया। SIPRO ने 2026 में 300 यूटिलिटी पेटेंट फाइल करने का लक्ष्य रखा है और अगले साल तक कुल IPएप्लीकेशन की संख्या 3,000 से ज़्यादा करने का इरादा है। ऑफिस का लक्ष्य हर साल कम से कम 300 पब्लिश्ड पेटेंट और 25 ग्रांटेड पेटेंट हासिल करना भी है। शर्मा ने रिसर्चर्स से पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी (PCT) एप्लीकेशन फाइल करने का आग्रह किया ताकि QS और टाइम्स हायर एजुकेशन जैसी इंटरनेशनल रैंकिंग में शूलिनी की स्थिति और मजबूत हो सके।
कार्यक्रम का समापन SIPRO की IPR अटॉर्नी डॉ. ऋचिका मेहता के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने इनोवेशन का कल्चर बनाने में योगदान के लिए यूनिवर्सिटी लीडरशिप, इनोवेटर्स, फैकल्टी, स्टूडेंट्स और SIPRO टीम का आभार व्यक्त किया।









