हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ व शिमला नागरिक सभा ने जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर डीसी ऑफिस के बाहर किसानों की बेदखली, ताला बंदी व ढारो को तोड़ने के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सैंकड़ों लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन में डॉ कुलदीप सिंह तंवर, विजेंद्र मेहरा, जगत राम, फ़ालमा चौहान, जयशिव ठाकुर, विवेक कश्यप, जगमोहन ठाकुर, डॉ विजय कौशल, जगदीप पंवर, प्रताप चौहान, कपिल नेगी, रंजीव कुठियाला, कपिल शर्मा, राकेश सलमान, पंकज, भूमि, हीरानंद शांडिल, हिमी देवी, हेमराज चौधरी, सुनील वशिष्ठ, राम सिंह आदि शामिल रहे। किसान सभा से राज्य अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर ने बात रखते हुए कहा कि किसान पिछले काफी सालों से किसानों को बेदखल करने जमीन से जुड़े अन्य मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहा है। किसानों ने थोड़ी सी सरकारी जमीन अपना जीवन यापन के लिए अगर खेती बाड़ी के रहा है तो सरकार उससे उसे बेदखल कर रही है। न तो सरकार नौकरियों दे पा रही है और अगर लोग खेती बड़ी कर अपना जीवन यापन कर रही है तो वह भी करने नहीं दे रही। 2002 में तत्कालीन धूमल सरकार से कहा कि लोगों की 20 बीघा जमीन का नियमति करने के लिए 50 रु लेकर फार्म भरवाएं लेकिन कुछ नहीं हुआ ऊपर से उन लोगों के खिलाफ हाई कोट में केस शुरू हो गए। चुनावों के दौरान बड़ी बड़ी घोषणाएं तो की जाती हैं। लोगों को घर बनाने के लिए जमीन देने की बात करते है लेकिन जीतने के बाद सब भूल जाती है। किसान सभा सरकार से मांग करती है कि केंद्रीय सरकार के ऊपर सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुला कर दबाव बना कर वन संरक्षण कानून 1980 में संशोधन कर हिमाचल की जनता को राहत दे क्योंकि हिमाचल की लगभग 67 प्रतिशत जमीन केंद्र के अधीन यानि वन विभाग के पास है। अगर सरकार भूमि हीनों को जमीन व प्राकृतिक आपदा से उजड़े किसानों देनी भी चाहती है तो कहा से देगी तथा सरकार से मांग करती हैं कि बेदखली को रोकने के लिए तुरंत कोई एफिडेविड कोट में दे ताकि बेदखल किए जा रहे किसानों के हक में कोई नीति बनाई जाए। किसान सभा लगातार किसानों को जमीन दे जुड़े मुद्दों पर संघर्ष के लिए संगठित कर रही है और आगे इन्हीं मुद्दों को लेकर 20 मई को किसान मजदूरों का धरना प्रदर्शन किया जाएगा।





