सबकी खबर , पैनी नज़र

June 22, 2026 6:43 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

June 22, 2026 6:43 pm

जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर हिमाचल प्रदेश

15 अगस्त 2019 को जलजीवन मिशन योजना की घोषणा के समय हिमाचल प्रदेश के कुल 17.27 लाख ग्रामीण घरों में से 7.62 लाख (44 प्रतिशत) घरों में नल के पानी की आपूर्ति हो रही थी। राज्य सरकार के सफल प्रयासों के चलते अब तक 15.41 लाख (89 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा चुका है और यह तेजी से शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की ओर अग्रसर है। कोविड-19 महामारी और इसकी वजह से साल 2020-21 में निर्माण गतिविधियों में सीमा निर्धारण के बावजूद जल जीवन मिशन के तहत 7.78 लाख (45 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति को बहाल किया गया। यह सब तब किया गया जब कोविड महामारी के अलावा राज्य भारी बर्फबारी, भूस्खलन और ठंड का सामना कर रहा था जो काफी चुनौतीपूर्ण था और ऐसे हालात में निर्माण गतिविधियों को जारी रखना और उससे जुड़ी सामग्रियों को हिमालयी क्षेत्रों में पहंचाना आसान नहीं था।
राज्य के गठन के स्वर्ण जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश जल शक्ति विभाग ने वर्ष 2021 को जल की गुणवत्ता और संरक्षण के लिए समर्पित किया है। 25 जनवरी को शुरू हुआ यह अभियान 24 जनवरी 2022 तक जारी रहेगा। इस अभियान के अन्तर्गत तमाम गतिविधियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य समुदाय को सिर्फ योजना में शामिल करना ही नहीं बल्कि जल आपूर्ति के कार्यों के क्रियान्वयन, मरम्मत व देखभाल जैसे कामों से भी जोड़ना है। इसके माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलाने की आवश्यक्ता है जिससे सुदूर हिमालयी क्षेत्रों में हर घर जल योजना के महत्व और इसमें उनकी भूमिका से अवगत कराया जा सके। इस संबंध में रेडियो जिंगल्स का विकास किया गया है जिसे आल इंडिया रेडियो पर प्रसारित किया जाता है। योजना को पंचायत के प्रत्येक सदस्य तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है क्योंकि हर घर जल योजना बूम-अप अप्रोच के तौर पर काम कर रही है जिसमें सबकी सहभागिता जरूरी है। विभाग द्वारा इसे लेकर विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। 22 मार्च को विश्व जल दिवस और 15 अगस्त एंव 2 अक्टूबर के मौके पर पानी से जुड़े विभिन्न मुद्दों और आने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को ग्राम प्रधानों से अपने वर्चुअल संबोधन में जल के विवेकपूर्ण उपयोग की शपथ दिलायी। लोगों ने ‘कैच द रेन‘ अभियान के तहत भू-जल प्रबंधन और जल संरक्षण की शपथ ली। इसी तरह लोग 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को सुनने के लिए एकत्रित हुए जव वह जीपी/पानी सामी और वीडब्ल्यूएससी को संबोधित कर रहे थे। राज्य के कुल 18,150 गांवों में से 17,518 गांवों में ग्रामीण जल स्वच्छता समिति/पानी समिति का गठन किया जा चुका है जो अपना काम कर रही हैं। राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन राज्य की 38 कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ मिलकर सामुदायिक स्वच्छता के लिए जीपीएस/वीडब्ल्यूएससीएस की मदद के लिए काम कर रही हैं। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन द्वारा तैयार की गयी मार्गर्शिका की 30 हजार प्रतियों को मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में प्रयोग में लाने के लिए पीआरआइएस और निगरानी समिति के सदस्यों को वितरति किया गया।
किसी भी प्रकार की विकासात्मक गतिविधियों में शामिल बच्चों को पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और उनके स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने की शिक्षा दी गयी। पानी की गुणवत्ता व जल संरक्षण से संबंधित पोस्टरों को सभी 17298 स्कूलों व 17769 आंगवबाड़ी केंद्रों में लगाया गया है। हिमाचल प्रदेश प्रदेश वह हिमालयी राज्य है जो कुछ पड़ोसी देशों की सीमाओं को भी स्पर्श करता हैं जहां पर पहुंचना कठिन होता है। जल जीवन मिशन की जानकारी को लोगों तक फैलानेे के लिए विभाग द्वारा हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कोर्पोरेशन (एचआरटीसी) की भी सहायता ली गयी है जिसके तहत संदशों, चित्रों और स्लोगनों को बसों पर लगया गया। 27 विभागों में डिपो की होर्डिंग्स लगाकर हर घर नल के पानी की आपूर्ति के लिए विभाग के साथ हाथ मिलाने की पहल की जा रही है। अभी तक 18,079 भित्ति चित्रों और 4,661 होर्डिंग्स के द्वारा गांवों, ग्राम पंचायत इमारतों, बस स्टैंड, प्रखंडों, जिले की प्रशासनिक इमारतों, अस्पतालों व अन्य प्रमुख स्थानों को जागरूकता फैलाने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।
नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता को जांचने के लिए पांच सदस्यीय महिला निगरानी समिति का गठन किया गया है। 26,666 महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जल की गुणवत्ता को मापने के लिए समिति को 15000 एफटीके प्रदान किया गया है। वर्तमान सरकार पारदर्शी शासन प्रणाली में विश्वास करती है, प्रत्येक गांव में पानी की गुणवत्ता की जांच इस व्यस्था में जनता का विश्वास बनाने में मदद करता है।
इस समय राज्य में 28,600 नव नियुक्त पंचायत प्रतिनिधि हैं, इनमें से 15,168 को योजना के कार्यान्वयन, निगरानी व संचालन के लिए विभाग द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में यह बताया गया है कि कैसे नल के पानी की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है, इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि प्रत्येक घर, स्कूल, आंगनबाड़ी व ग्राम पंचायतों में पीने, दोपहर के भोजन को पकाने, हाथ धोने व शौचालयों में प्रयोग किये जाने वाले पानी की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
राज्य में 1200 हजार स्थानीय लोगों को प्लंबर के रूप में जबकि बाकी 6000 लोगों को फिटर, पंप आपरेटर व तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। यह हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है क्योकि कई बार सुदूर क्षेत्रों में कुशल जन शक्ति के अभाव में कार्य में रुकावट पैदा हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में कुशल लोगों की मौजूदगी से लंबे समय तक पानी की आपूर्ति में सहायता मिलेगी।
पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए राज्य में 56 प्रयोगशालाओं का एक बड़ा नेटवर्क है जिसमें नाममात्र की कीमत पर कोई भी व्यक्ति, स्कूल, गांव या पंचायत द्वारा जरूरत पड़ने पर नमूना लिया जा सकता है। राज्य द्वारा जल के लिए एक परामर्श एजेंसी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है। एनएबीएल से मान्यता प्राप्त इस लैब में 78 पैरामीटर के साथ पानी की गुणवत्ता को परखा जाता है, जो सामान्य पेयजल गुणवत्ता निगरानी प्रोटोकाॅल 2013 पर आधारित है। मिशन के अन्तर्गत माण्डी जिले में नई जल परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के दृष्टिकोण के बाद इस मिशन का सार ‘कोई भी बाहर नहीं‘ है। इस पहाड़ी राज्य का लक्ष्य 2022 तक प्रत्येक ग्रामीण घरों तक पहंचना और मिशन की सूचनाओं को हर किसी तक पहुंचाना है।