सबकी खबर , पैनी नज़र

June 2, 2026 12:33 pm

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हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (हि.व.अ.सं.) ने “AM जैव उर्वरकों का औषधीय पौधों की जैविक खेती में उपयोग” प्रशिक्षण कार्यक्रम

शिमला (हिमदेव न्यूज़) 12दिसंबर, 2022 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (हि.व.अ.सं.) ने “AM जैव उर्वरकों का औषधीय पौधों की जैविक खेती में उपयोग” पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 12/12/2022 को वन विज्ञान केंद्र (व.वि.के.) जगतसुख, जिला कुल्लू में किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल्लू जिले के 30 किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण मुख्य रूप से AM बायोफर्टिलाइजर्स का उपयोग करके समशीतोष्ण औषधीय पौधों की जैविक खेती पर किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने पर केंद्रित था । डॉ. अश्विनी तपवाल, वैज्ञानिक-एफ, हि.व.अ.सं., शिमला और उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक ने मुख्य अतिथि श्रीमती मीरा शर्मा, आई एफ एस, सी सी एफ और निदेशक जी एच एन पी कुल्लू, और प्रतिभागियों का स्वागत किया । उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किए जाने वाले विषयों के बारे में जानकारी दी और औषधीय पौधों की जैविक खेती में कृषि और वन पारिस्थितिकी प्रणालियों में माइकोराइजा के महत्व और AM कवक के उपयोग पर प्रकाश डाला। डॉ. तपवाल ने बताया कि एच एफ आर आई ने स्थानीय माइकोराइजल स्ट्रेन से AM बायोफर्टिलाइजर तैयार किया है तथा इसका चोरा और मुशकबला की खेती में प्रभावकारिता का परीक्षण किया है।
श्रीमती मीरा शर्मा ने अपने उद्घाटन भाषण में औषधीय पौधों की जैविक खेती में जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों का उपयोग फसलों की जैविक खेती में लागत प्रभावी, पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ समाधान हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को फसल की खेती और रोग प्रबंधन के लिए पर्यावरण के अनुकूल साधनों को अपनाने की सलाह दी।
डॉ. संदीप शर्मा, निदेशक हि.व.अ.सं.ने किसान के खेतों में खाद और वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने और आधुनिक नर्सरी की स्थापना के लिए उपयोगकर्ता के अनुकूल तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने औषधीय पौधों की खेती में कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट के उपयोग के संदर्भ में लागत लाभ विश्लेषण की भी व्याख्या की।
डॉ. जगदीश सिंह, वैज्ञानिक एफ और प्रमुख विस्तार प्रभाग हि.व.अ.सं. ने समशीतोष्ण औषधीय पौधों की जैविक खेती के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को औषधीय पौधों की जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया और व.वि.के. जगतसुख में एच एफ आर आई की नर्सरी में औषधीय पौधों के स्टॉक की उपलब्धता के बारे जानकारी साझा की।
डॉ. जोगिंदर सिंह, मुख्य तकनीकी अधिकारी, हि.व.अ.सं. ने जलवायु परिवर्तन के चलते मोटे आनाजों की बढ़ती प्रसांगिता पर अपने विचार सांझा किए और बताया की यह पारंपरिक ओरगनिक सुपर फूड है।