
है यही अर्ज़ तुझसे
तू मुझको अब मशहूर कर दे
और कुछ नहीं चाहिए
तू मुझसे इश्क ज़रूर कर ले
बनकर लैला मेरी तू
मुझको मजनूं तस्लीम कर दे
देकर जगह दिल में अपने
अब मुझे तू तरमीम कर दे
फूल पतों और इन शाखों से
अब तू मुझको आज़ाद कर दे
चुराकर इस ज़माने की नज़रों से
अब तू अपने दिल में कैद कर दे
छोड़ दे शर्माना अब तो
मेरी दोस्ती कबूल कर ले
मानकर मुझको भंवरा
तू खुद को फूल कर ले
छोड़कर ज़माने का डर
खुद को मेरे हवाले कर दे
बनाकर कोई भी बहाना
मिलकर मुझे दीवाना कर दे
तेरे दिन रात, सुबह शाम
तू अब मेरे नाम कर दे
कर इतनी इनायत मुझपर
मुझे अपना साया कर दे
और कुछ नहीं चाहिए अब मुझे
बस अपना हाथ मुझे सौंप दे
उजाला बनकर राह का मेरी
तू बस ज़िंदगीभर मेरा साथ दे।
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