शिमला, 09 जून
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा अपने हिमाचल प्रदेश प्रवास के दौरान आज शिमला के होटल पीटरहॉफ में प्रदेश के सांसदों एवं विधायकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने की।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य निरुपम चकमा, डॉ. आशा लकड़ा, तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक में हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
बैठक के दौरान जनजातीय समुदाय के कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क, रोजगार, आधारभूत सुविधाओं एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। माननीय सांसदों एवं विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं एवं सुझावों को आयोग के समक्ष रखा।
आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास एवं वहां के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए विषयों एवं सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सांसद सुरेश कुमार कश्यप, विधायक जनक राज एवं अनुराधा राणा ने अपने क्षेत्र से संबंधित विभिन्न समस्याओं को आयोग के समक्ष रखा। आयोग के अध्यक्ष ने सभी मांगो को प्रदेश सरकार के माध्यम से रिकमेंडेशन प्रस्तुत करने को कहा।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (जनजातीय विकास) ओंकार चंद शर्मा ने आयोग का हिमाचल पधारने पर स्वागत किया तथा बैठक का संचालन किया।
बैठक में जानकारी दी गई कि हिमाचल प्रदेश में भोट/बोध, गद्दी, गुज्जर, जाड़, लम्बा, खम्पा, किन्नौरा, लाहौला, पंगवाला, स्वांगला, बेटा, बेड़ा, डेम्बा, गारा, जोबा तथा हाटी समुदाय अनुसूचित जनजातियों के रूप में अधिसूचित हैं।
वही जनगणना 2011 के अनुसार हिमाचल प्रदेश की कुल जनसंख्या 68.65 लाख है, जिसमें लगभग 3.92 लाख अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोग निवास करते हैं, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 5.71 प्रतिशत है।









