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April 4, 2026 12:21 pm

26 नवंबर 2020 को दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों द्वारा एक बड़ा आंदोलन शुरू किया गया था।

किसानों की मुख्य मांगों में तीन काले कृषि कानूनों की वापसी, सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, बिजली संशोधन विधेयक 2019 को लागू ना करना आदि शामिल थे। यह आंदोलन 13 महीने तक जारी रहा और इस दौरान 750 से अधिक किसानों की शहादत भी हुई। इसके उपरांत 19 नवंबर 2021 को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की गई। तत्पश्चात 9 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार द्वारा एक समझौते की चिट्ठी संयुक्त किसान मोर्चा को भेजी गई जिसमें किसानों की मुख्य मांगे मानने का लिखित आश्वासन दिया गया और इस लिखित पत्र और सरकार के ठोस आश्वासन के बाद दिल्ली के सभी मोर्चों से किसान आंदोलन का स्थगन किया गया।बहुत दुख की बात है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस समझौते की चिट्ठी में लिखी गए किसी भी वायदे को पूरा नहीं किया गया। जिसमें एमएसपी पर संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों को लेकर एक निष्पक्ष कमेटी का गठन,बिजली संशोधन विधेयक 2019 को लागू ना करना और देश के सभी राज्यों या सरकारी संस्थानों द्वारा किसानों के विरुद्ध दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेना आदि शामिल थे। इसके अतिरिक्त शहीद किसानों के परिवारों को आर्थिक सहायता राशि का आबंटन और सरकारी नौकरी आदि मांगो पर पर भी केंद्र सरकार ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया था।भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक निर्वाचित सरकार द्वारा लिखित में किए गए वायदे से पीछे हटना आजाद भारत के इतिहास में यह पहला उदाहरण है।संयुक्त किसान मोर्चा तथा भारतीय किसान यूनियन ने हिमाचल प्रदेश ने पूरे प्रदेश में संबंधित जिलाधीश के माध्यम से एक ज्ञापन द्वारा केंद्र सरकार को उसके वायदे की याद करवाई और शहीद किसानों के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की।
केंद्र सरकार किसानों के साथ किए गए अपने वादों को जल्द पूरा करें तथा भारत जो कृषि प्रधान देश है उसमें किसानों की बेहतरी के लिए नीति और नियत को लेकर सरकार आगे बढ़े। अभी भी सरकार अगर अपने वायदों से मुकरती है तो लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के मुहाने पर पहले से भी अधिक दृढ़ता और संख्या के साथ घेराव और आंदोलन शुरू किया जाएगा जिसकी जिम्मेवार खुद केंद्र सरकार होगी।अनिंदर सिंह नॉटी
अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन हिमाचल प्रदेश
एवम सुरमुख सिंह,चरणजीत सिंह जैलदार, हरिराम शास्त्री, जसविंदर बिलिंग, गुरजीत सिंह नंबरदार, देवरूप सैनी, श्याम आजाद लाहौल, मनीष ठाकुर सोलन, बलविंदर सिंह ठाकुर, जरनैल सिंह, बलजिंदर सिंह सहित प्रदेश पदाधिकारी