
शिमला, 21 जुलाई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हप्पुटवा) तथा हिमाचल राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (एचजीसीटीए) ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के समस्त शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कर्मचारियों तथा पूर्व छात्रों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की है। दोनों शिक्षक संगठनों ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में भी उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में नई उपलब्धियाँ स्थापित करेगा और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में हप्पुटवा के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास, महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज तथा हिमाचल राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (एचजीसीटीए) के उपाध्यक्ष डॉ निखिल सारटा,महासचिव डॉ. संजय कांगों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि प्रदेश की बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना का केंद्र है। पिछले 57 वर्षों में इस विश्वविद्यालय ने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर उन्हें प्रशासन, न्यायपालिका, शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, साहित्य, पर्यटन, उद्योग तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में उत्कृष्ट योगदान देने के योग्य बनाया है।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि इस वर्ष का स्थापना दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस अवसर पर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है कि इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र आज प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने ही विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में सम्मिलित होंगे। यह विश्वविद्यालय और उसके विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का विषय है कि इसी परिसर से शिक्षा प्राप्त करने वाला एक विद्यार्थी आज प्रदेश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद पर कार्य करते हुए राज्य का नेतृत्व कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने सदैव समाज को ऐसे योग्य नागरिक दिए हैं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। विश्वविद्यालय की यह गौरवशाली परंपरा आगे भी निरंतर जारी रहे, यही सभी शिक्षकों की कामना है।
प्रेस विज्ञप्ति में शिक्षक नेताओं ने कहा कि जहाँ एक ओर स्थापना दिवस उत्सव का अवसर है, वहीं दूसरी ओर यह उच्च शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक निर्णय लेने का भी उपयुक्त समय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत हजारों प्राध्यापक पिछले लंबे समय से कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के अंतर्गत लंबित पदोन्नतियों की बहाली की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के कारण वर्षों से शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अनेक पात्र शिक्षक समय पर पदोन्नति से वंचित हैं।
शिक्षक संगठनों ने कहा कि कैरियर एडवांसमेंट स्कीम केवल वेतन वृद्धि का विषय नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, अनुसंधान, प्रकाशनों, नवाचार, मार्गदर्शन तथा संस्थागत विकास की मान्यता से जुड़ी व्यवस्था है। समय पर पदोन्नति न होने से शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होता है तथा उनकी शैक्षणिक प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त शोध परियोजनाओं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग तथा विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता रैंकिंग पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के माध्यम से शिक्षकों की पदोन्नतियाँ नियमित रूप से की जा रही हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में इस प्रक्रिया पर लगी रोक के कारण हजारों शिक्षक प्रभावित हैं। इससे प्रदेश के उच्च शिक्षा तंत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। संयुक्त वक्तव्य में शिक्षक नेताओं ने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों को बड़ी सौगात देते हुए कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के अंतर्गत लंबित पदोन्नतियों को बहाल करने की घोषणा करें। उनका मानना है कि यदि स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर यह निर्णय लिया जाता है तो इससे न केवल हजारों शिक्षकों को न्याय मिलेगा बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को भी नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने सदैव विपरीत परिस्थितियों में भी विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार तथा समाजोन्मुख गतिविधियों में प्रदेश के शिक्षक लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए शिक्षकों की लंबे समय से लंबित वैध मांगों का समाधान होना समय की आवश्यकता है। शिक्षक संगठनों ने आशा व्यक्त की कि माननीय मुख्यमंत्री शिक्षकों की समस्याओं के प्रति सकारात्मक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थापना दिवस के अवसर पर ऐसी घोषणा करेंगे जो प्रदेश के उच्च शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक सिद्ध होगी। इससे शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा तथा प्रदेश की उच्च शिक्षा नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगी।अंत में दोनों शिक्षक संगठनों ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस की पुनः शुभकामनाएँ देते हुए विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति, उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों तथा प्रदेश के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।








