सबकी खबर , पैनी नज़र

September 14, 2026 5:38 am

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हिमाचल प्रदेश में हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बनेगी स्थायी नीति

शिमला: हिमाचल प्रदेश में हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है। माना जा रहा है कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब ठोस निर्णय की उम्मीद जगी है। यह पहल उस समय शुरू हुई, जब हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया।
संघ ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आज भी मात्र 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। संघ के मुताबिक कई कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई है, जबकि कई दुर्घटनाओं में दिव्यांग हो चुके हैं। इसके बावजूद उनके भविष्य की कोई सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है और न ही उनके परिवारों के लिए कोई ठोस सहारा उपलब्ध है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव ने इस मुद्दे को सचिव (कार्मिक) को भेज दिया है। अब कार्मिक विभाग स्तर पर नीति निर्माण को लेकर प्रारंभिक कसरत शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार विभिन्न विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों का डाटा जुटाने और उनकी सेवा शर्तों की समीक्षा करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। संघ ने सरकार के समक्ष प्रमुख मांगों में सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, न्यूनतम वेतन लागू करने, सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग रखी है। बिजली बोर्ड संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह संयोजक सोहनलाल तुलिया ने उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से समझते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।