जन्मदिवस मनाने का ढूंढा अलग अंदाज
अक्सर सेवा सहयोग की भावना संस्कार और सोच से आती है
हर व्यक्ति चाहता है कि समाज में कुछ बदलाव हो बस यही सोच उसे दुनिया से अलग करती है। हाल ही में पुष्कर फाउंडेशन ने इसी सोच के साथ काम करना शुरू किया था। जिसके चेयरमैन वीरेंद्र आर्यन ने जानकारी देते हुए बताया कि वो अभी तक कई परिवारों को आर्थिक मदद दे चुके हैं। संस्था के साथ जुड़ने वाले सदस्यों को उनके मौलिक अधिकार के साथ कर्तव्यों की बात भी शुरू दिन से समझाई जाती है। आज आलम ये है कि संस्था से जुड़ने वाला हर व्यक्ति अपने स्तर पर भी समाज में कोई न कोई सहयोग आए दिन करता रहता है।अभी गीतांजलि सूद ने अपने बेटे आर्यांश पुष्कर के जन्मदिवस पर दिव्यांग बच्चों को वाटर थर्मस, घडी जैसी कुछ जरूरत की चीजें वितरित कर के मिसाल कायम की है। पेशे से गीतांजलि सूद अध्यापिका है और संस्था में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के पद पर आसीन है। उनकी ये सोच निसंदेह प्रणम्य है। समस्त नारी शक्ति को एक आवाह्न भी है कि वो स्वभावलंबी बने और समाज में बदलाव हेतु आगे भी आएं।इस मौके पर संस्था के चेयरमैन के साथ अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।



