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March 6, 2026 10:07 am

विदेशी सेबों पर सुरक्षात्मक आयात शुल्क बहाल करें ताकि स्थानीय बाजार सुरक्षित रहे।

शिमला 02 फ़रवरी 26, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) हिमाचल प्रदेश केंद्रीय सरकार द्वारा पेश किए गए यूनियन बजट 2026 की कड़ी निंदा करता है। यह बजट हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के किसानों और बागवानों की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है। सेब उगाने वाले हमारे किसान, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, पहले से ही मुश्किलों में हैं। बजट ने आयात के खतरे, वित्तीय सहायता बंद करने और हमारे क्षेत्र के पर्यावरणीय योगदान को बिल्कुल अनदेखा कर दिया है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।
पिछले कुछ सालों में न्यूजीलैंड से सेब पर आयात शुल्क कम करने से सस्ते विदेशी सेब भारतीय बाजार में भर गए हैं। इससे स्थानीय कीमतें गिर गई हैं और हजारों हिमाचल के किसानों की कमाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अब यूरोपीय संघ (EU) के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से यूरोप के सस्ते सेबों की बाढ़ आने वाली है। इससे हमारे देशी सेबों की बाजार में जगह और कमजोर हो जाएगी। ये नीतियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि देशी खेती और किसानों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही हैं, जिससे हमारे किसान आर्थिक तबाही की कगार पर पहुंच रहे हैं।
इसके अलावा, इस बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (राजस्व घाटा अनुदान) को वापस ले लिया गया है। इससे हिमाचल प्रदेश की पहले से तंग अर्थव्यवस्था पर और बोझ पड़ेगा। राज्य सरकार को खेती के लिए सब्सिडी, बुनियादी ढांचा और सहायता कार्यक्रमों पर पैसा देने में मुश्किल होगी। हिमाचल के किसान कठिन पहाड़ी इलाकों और मौसम में मेहनत करके अच्छे सेब उगाते हैं, लेकिन उन्हें व्यवस्थित रूप से किनारे किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा दुख की बात है कि बजट में हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के कार्बन क्रेडिट महत्व को पूरी तरह अनदेखा किया गया है। हमारे बाग और जंगल बड़े कार्बन सिंक हैं, जो देश और दुनिया के पर्यावरण लक्ष्यों में योगदान देते हैं। किसानों और बागवानों को जलवायु परिवर्तन से लड़ने में उनकी भूमिका के लिए सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए, लेकिन बजट में कुछ नहीं है – न कोई खास योजना, न आर्थिक मदद, न पर्यावरणीय योगदान की कोई मान्यता। यह साफ अनदेखी अस्वीकार्य है और केंद्र सरकार का पहाड़ी राज्यों की खेती की हकीकत से दूर होना दिखाता है।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) हिमाचल प्रदेश हमारे किसानों के साथ एकजुट है और इन किसान-विरोधी फैसलों का विरोध करता है। हम मांग करते हैं कि इन नीतियों पर तुरंत विचार किया जाए ताकि हमारा सेब उद्योग बचे और हमारे उत्पादकों को न्याय मिले। विरोध में हम अपने सदस्यों को संगठित करके माननीय प्रधानमंत्री जी को सीधे पत्र लिखेंगे। हम बजट के प्रावधानों पर पुनर्विचार और हिमाचल के कृषि समुदाय के लिए खास राहत की मांग करेंगे।
हम सरकार से मांग करते हैं:
विदेशी सेबों पर सुरक्षात्मक आयात शुल्क बहाल करें ताकि स्थानीय बाजार सुरक्षित रहे।
EU FTA की समीक्षा करें, बाजार में बाढ़ रोकने के लिए किसान सुरक्षा शामिल करें।
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बहाल करें और खेती के लिए राज्य को ज्यादा फंड दें।
पहाड़ी राज्यों में पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए कार्बन क्रेडिट प्रोत्साहन और खास योजनाएं शुरू करें।
अब सिर्फ बातों का समय नहीं रहा; हमारे किसानों को तुरंत कार्रवाई चाहिए ताकि उनकी आजीविका बचे और हिमाचल की बागवानी विरासत सुरक्षित रहे।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) भारत भर के कृषि कार्यकर्ताओं के अधिकारों और कल्याण के लिए लड़ने वाली प्रमुख किसान संगठन है, जिसमें हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रीय मुद्दों पर खास ध्यान दिया जाता है।