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March 13, 2026 6:03 pm

हिमाचल प्रदेश में “सैक्स सार्टड सीमन” परियोजना——–वीरेंद्र कंवर

हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अन्तर्गत ” सैक्स सार्टड सीमन” परियोजना शुरु की गई है जिससे गाय/भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से बछिया /बछड़ी का जन्म सुनिश्चित किया जाएग। केन्द्र सरकार ने इस परियोजना के कार्यन्वन के लिए 841.65 लाख रुपये की धनराशि जारी की है।
राज्य के पशुपालन मंत्री श्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा गाय/भैंसों में 90 प्रतिशत तक बछिया / बछड़ी पैदा होने की संभावनाऐं रहती हैं। यह परियोजना सितंबर 2022 को राज्य के सभी 12 ज़िलों में एकमुशत लागू की जाएगी।
राज्य के पशुपालन मंत्री श्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि ‘‘सैक्स सार्टड सीमन’’ की बीस हज़ार खुराक की पहली खुराक राज्य सरकार ने प्राप्त कर ली है तथा इस डोज़ को गुणवत्ता के मापदंडों पर जांचने परखने के बाद पालमपुर में रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस खुराक के सैंपल में “एक्स” ” X ” क्रोमोज़ोम की गुणवत्ता की जांच के लिए हैदराबाद में प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है तथा इसकी गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच के बाद इसे गायों।/भैंसों पर प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के अन्तर्गत पहला कृत्रिम गर्भाधान सितंबर 2022 में किया जाएगा।
पशुपालन मंत्री श्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि पहाड़ी गायों को गिर, साहिवाल, क्रास ब्रैड जर्सी जैसी विकसित प्रजातियों के सैक्स सार्टड सीमन उपलब्ध करवाए जाएंगे ताकि भावी नस्ल दूधारू पैदा हो सके। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में 90 फीसदी तक बछिया /बछड़ी पैदा होने की संभावनाऐं होती हैं जबकि अभी तक बच्छड़ा तथा बछिया /बच्छड़ी लगभग बराबर प्रतिशत में पैदा होते हैं।
श्री वीरेंद्र कंवर पशु पालन मन्त्री ने बताया कि एक सैक्स सार्टड खुराक की कीमत 675 रुपये प्रति खुराक आंकी गई है जबकि किसानों को यह खुराक 125 रुपये प्रति डोज़ की दर से उपलब्ध करवाई जाएगी। इस डोज़ की प्रत्येक स्ट्रा पर 425 रुपये प्रति स्ट्रा का अनुदान केन्द्र सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा जबकि 125 रुपये प्रति स्ट्रा का अनुदान राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से 2025-26 के पांच वर्षों के दौरान 60,000 प्रति वर्ष कृत्रिम गर्भाधारण की दर से तीन लाख कृत्रिम गर्भाधारण सुनिश्चित करके कुल दो लाख चालीस हज़ार (2.4 लाख) बछिया /बच्छियों के जन्म का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष राज्य में 1.68 लाख डोज़ उपयोग करके 60,000 कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से 48,000 बछिया /बच्छियों के जन्म का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य सरकार इस परियोजना के अन्तर्गत निजी क्षेत्र में कार्यरत पशु चिकित्सकों की भागीदारी भी सुनिश्चित करेगी। निजी क्षेत्र में कार्यरत पशु चिकित्सकों को कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रति पशु एक सौ रुपया राशि प्रदान की जाएगी। पहली डोज़ पर गर्भाधारण करने वाले पशुओं पर निजी क्षेत्र में कार्यरत पशु चिकित्सकों को तीन सौ रुपये तथा दूसरी डोज़ पर पशुओं के गर्भाधारण करने पर निजी पशु चिकित्सकों को 150 रुपये प्रोत्साहन स्वरुप प्रदान किये जाएंगे। कृत्रिम गर्भाधारण टैकनीशियन को बच्छड़ी पैदा होने पर 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। अगर कृत्रिम गर्भाधान के दो प्रयासों के बाद भी गाय/भैंस गर्भवती नहीं होती तो संबंधित किसान की 250 रुपये की धनराशि वापिस कर ली जाएगी। पशुओं में गर्भ धारण की उच्च दर प्राप्त करने के लिए सभी ज़िलों के दक्ष कृत्रिम गर्भाधारण तकनीशियनों की पहचान की जा रही है। प्रारंभ में केवल मात्र पशुपालन अधिकारियों/वरिष्ठ पशु चिकित्सकों को ही सैक्स सार्टड सीमन तकनीक प्रयोग करे की अनुमति होगी तथा बाद में मुख्य वैटनरी फार्मसिस्ट, पशुपालन सहायकों तथा अन्य वैटनरी फार्मसिस्ट स्टाफ को सैक्स सार्टड सीमन तकनीक प्रयोग करने की अनुमति होगी।