शिमला 12 जनवरी 26, आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन संबंधित सीटू के बैनर तले आईसीडीएस प्रोजेक्ट शिमला के चक्कर, न्यू शिमला व संजौली वृत्तों के आंगनबाड़ी कर्मियों ने डीपीओ कार्यालय निगम विहार शिमला के बाहर ड्यूटी के दौरान मृत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा को न्याय, मुआवज़ा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा व विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने एवं अन्य मांगों के संबंध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला सचिव विवेक कश्यप एवं कार्यालय सचिव रामप्रकाश भी शामिल रहे इसके बाद यूनियन ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय को बाल विकास परियोजना अधिकारी शिमला के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
यूनियन नेता हरदेई देवी, मीना देवी, ललिता देवी, प्रोमिला, संध्या एवं पुष्पा रोहाल ने कहा कि मंडी जिला के टारना वृत्त में पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी निभाते समय गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की हुई मृत्यु ने प्रदेश भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गहरे आक्रोश और पीड़ा में डाल दिया है। यह घटना कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था का परिणाम है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से विभिन्न विभागों का जोखिमपूर्ण कार्य तो कराया जाता है, लेकिन किसी भी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में न तो सरकार और न ही संबंधित विभाग इन सबकी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता है। इससे पूर्व में भी ड्यूटी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मृत्यु की घटनाएँ हो चुकी है दो वर्ष पूर्व कुल्लू के सैंज क्षेत्र में फिसल कर गिरने तथा जून 2024 में चम्बा ज़िले में मीटिंग में जाते समय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरला एवं श्रेष्ठा की सड़क दुर्घटना में मृत्यु, इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अत्यंत कम मानदेय पर पल्स पोलियो, बीएलओ ड्यूटी, फेस ट्रैकिंग, हाउस-टू-हाउस सर्वे जैसे बहु-विभागीय एवं जोखिमपूर्ण कार्य करने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा दी जाती है, न बीमा सुविधा और न ही सामाजिक सुविधा दी जाती है । यह स्थिति संस्थागत शोषण का प्रतीक है। उन्होंने मांग की है कि हर्षा के परिजनों को तत्काल 50 लाख रुपये का मुआवज़ा प्रदान किया जाए व
पूर्व में ड्यूटी के दौरान मृत सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मामलों में भी एक समान मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जिस भी विभाग का कार्य करें, उस विभाग की स्पष्ट, लिखित एवं कानूनी जवाबदेही तय की जाए। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दुर्घटना बीमा, जोखिम भत्ता एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। बहु विभागीय ड्यूटी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं और साहियकाओं का पिछले 4 महीनों से केंद्र का और दिसंबर माह का राज्य के वेतन का हिस्सा तुरंत दिया जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं और साहियकाओं क़ो केंद्र का और राज्य के वेतन को एक मुश्त दिया जाए।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कोई स्वयंसेवक नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी जान के साथ हो रहा यह खिलवाड़ अब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सभी आंगनबाड़ी कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी की जाए व उन्हें रेगुलर किया जाए। उन्होंने प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ग्रेच्युटी लागू करने की मांग की है। उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट के निर्देशानुसार आंगनबाड़ी कर्मियों को तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रूप में नियमित करने की मांग की है। उन्होंने वरिष्ठता के आधार पर मेट्रिक व ग्रेजुएशन किये कर्मियों की सुपरवाइजर में तुरन्त भर्ती करने, सरकारी कर्मचारी के दर्जे, हरियाणा की तर्ज़ पर वेतन व वरिष्ठता लाभ देने, पंजाब की तर्ज़ पर मेडिकल सहित अन्य छुट्टियां देने, रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष करने, वर्दी के लिए उचित आर्थिक सहायता देने, मोबाइल रिचार्ज व स्टेशनरी की सुविधा देने, पोषण ट्रेकर ऐप की दिक्कतों को दूर करने की मांग तथा नन्द घर बनाने की आड़ में आईसीडीएस को वेदांता कम्पनी के हवाले करके निजीकरण की साज़िश तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, पोषण ट्रैकर ऐप व बजट कटौती के मुद्दे पर आंगनबाड़ी कर्मियों से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि आईसीडीएस का निजीकरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस से भविष्य में कर्मियों को रोज़गार से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से वर्ष 2013 में हुए पेंतालिसवें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार आंगनबाड़ी कर्मियों को नियमित करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि आंगनबाड़ी कर्मियों को हरियाणा की तर्ज़ पर वेतन और अन्य सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए पेंशन,ग्रेच्युटी,मेडिकल व छुट्टियों की सुविधा लागू करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि प्री प्राइमरी कक्षाओं व नई शिक्षा नीति के तहत छोटे बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा आंगनबाड़ी वर्करज़ को दिया जाए क्योंकि वे काफी प्रशिक्षित कर्मी हैं। इसकी एवज़ में उनका वेतन बढाया जाए व उन्हें नियमित किया जाए। चुनाव ड्यूटी लगाने पर इंसेंटिव दिया जाए। आंगनवाड़ी वर्करज एवं हेल्परज के खाली पदों को तुरंत भरा जाए। आंगनवाड़ी वर्करज एवं हेल्परज से अतिरिक्त काम का डबल भुगतान किया जाए।




