
चमकना है तुझे सूरज के माफिक
सितारा बनकर कुछ नहीं होगा
है यही दस्तूर निकलता है सूरज जब
हर सितारे को फिर छुपना ही होगा
टिमटिमाना नहीं है तुम्हें
तुम्हें तो चमकना है हर पल
पड़े जब तेरी आभा फीकी
आए न कभी जीवन में वो कल
महसूस करे ये ज़माना भी
तेरी गर्मी को हर पल
सितारा बनकर क्या मिलेगा
खो जायेगा जाने किस पल
इंतज़ार रहता है सूरज का
बेसब्री से सबको, जान लो
जलना ही है तुम्हें सितारा बनकर भी
सूरज बन जाओ, मान लो
सितारे खुद जलते हैं
नहीं अंधेरा मिटा पाते रोशनी से
चमकता है सारा भूमंडल
और ये चांद भी सूरज की रोशनी से
बनकर सूरज मिटाओ तम
तभी कुछ बात बनेगी यारों
है अंधेरा जीवन में जिनके
राह दिखाओ उनको भी यारों
खुद तो जी लेता है कोई भी
तुम सूरज बनकर जीयो यारों
जीवन बन गया है अमावस्या जिनका
उनको भी उजाला दिखाओ यारों।
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